‘अपना अड्डा’ में इस बार बारी महाकाल की नगरी उज्जैन के हार्दिक सोनी की। सात साल की उम्र से रंगमंच करते रहे हार्दिक को फिल्मों में पहला मौका फिल्म ‘डॉक्टर जी’ में मिला। उन्होंने सिर्फ शहर में ही नहीं बल्कि पूरी रिश्तेदारी में ढिंढोरा पीट दिया अपनी इस कामयाबी का और फिल्म रिलीज हुई तो बेचारे पूरी फिल्म में लोगों को नजर नहीं आए। फोन आए तो बताना पड़ा कि फलां फलां सीन में वो जो बंदा चाय देकर पीछे से निकल रहा है, वह ये हैं। लेकिन, सिनेमा हो या जिंदगी कब कहां कोई चूक जाए और कब कहां कोई चूकी हुई बाजी भी जीत जाए, कहां नहीं जा सकता है। हार्दिक सोनी ने फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ में बड़ा हाथ मारा है। और, इसके लिए अपने हाथ-पांव मजबूत भी खूब किए। इस फिल्म की कहानी कुल 22 साल के अंतराल में फैली हुई है और इस कहानी में विलेन का किरदार करते समय हार्दिक की उम्र रही सिर्फ 24 साल।
Apna Adda 17: 22 साल की कहानी में 24 साल का विलेन, मिलिए ‘औरों में कहां दम था’ के पक्या यानी हार्दिक सोनी से
पापा ने भेजा नाटकों में अभिनय सीखने
हार्दिक सोनी से बात होती है तो बात शुरू से शुरू होती है। वह बताते हैं, “अभिनय का शौक तो नहीं कह सकते, लेकिन हां इसकी तरफ मेरे कदम बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में पापा की वजह से ही पड़े। वह उज्जैन नगर निगम में सरकारी कर्मचारी हैं और शुरू से चाहते रहे कि उनके बच्चे भी पढ़ लिखकर कोई सरकारी नौकरी कर लें। उन्होंने मुझे इसलिए नाटकों की कार्यशालाओं में भेजा था कि लड़का, इधर उधर घूमता न फिरे। लेकिन, एक बार अभिनय जो मेरे मन को पसंद आया तो फिर मैं कहीं और गया ही नहीं। बड़ोदरा से मैंने ड्रामा में ही स्नातक किया और उसके बाद मुंबई।”
सीनियर ने दिया ऑडिशन का पहला ज्ञान
हार्दिक ने अभिनय की शिक्षा सुबोध भावे, रोहिणी हट्टंगड़ी और प्रमोद चौहान जैसे अभिनय के उस्तादों से ली है। तो इस ट्रेनिंग का कुछ तो असर उनकी शख्सीयत पर भी रहा ही होगा। हार्दिक बताते हैं. “हां जिन्होंने हमें सिखाया है, वे सब बड़े उस्ताद हैं। तो थोड़ा गुरूर तो था ही। मुंबई आने से पहले ही मैंने यहां रहने, खाने का पूरा इंतजाम कर लिया था। पहले ऑडिशन का बुलावा भी जल्दी ही आ गया और मैंने कैमरा ऑन करके जो ऑडिशन तैयार किया, वह अब देखता हूं तो खुद पर खूब हंसी आती है।”
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आयुष्मान की फिल्म में पहला ब्रेक
ऐसा क्यों? पूछने पर हार्दिक बताते हैं, “मैंने बिल्कुल रामलीला वाली स्टाइल में वह ऑडिशन वीडियो तैयार किया था। फिर मेरे एक सीनियर सागर राणा ने मेरी मदद की। पहला ब्रेक मुझे अनुभूति कश्यप की फिल्म ‘डॉक्टर जी’ में मिला। सारे दोस्त-यारों, परिचितों-रिश्तेदारों सबको बता दिया कि मैं बड़े परदे पर आने वाला हूं। लेकिन, फिल्म रिलीज हुई तो मेरा रोल ही कट गया। आयुष्मान खुराना के साथ अच्छा सीन था। शूटिंग पर उसे करने के बाद अनुभूति मैडम ने मेरी तारीफ भी की थी।”
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और, अब चल पड़ी है गाड़ी..
फिर तो बहुत हताश हुए होंगे हार्दिक सोनी। लेकिन, वो फिल्म ‘बाजीगर’ का डायलॉग है न कि हारकर जीतने वाले को ही बाजीगर कहते हैं। हार्दिक ने भी हिम्मत नहीं हारी। वह कहते हैं, “मैं सिर्फ मेहनत पर यकीन करता हूं। खुद को निखारने के लिए खूब अभ्यास करता हूं। अब लगता है कि मेहनत का ये पसीना मुंबई की धूप पाकर चमकने भी लगा है। ‘कोटा फैक्ट्री’ सीजन 3 में लोगों ने देखा और खूब सराहा। ‘त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर’ रिलीज हुई तो खूब सारे संदेश और फोन आए और अब ‘औरों में कहां दम था’! नीरज पांडे सर ने मुझ पर भरोसा दिखा और इस फिल्म में जहां नायक और नायिका समय बदलने पर बदल जाते हैं, मैंने दोनों कालखंडों में अपना किरदार खुद ही निभाया है। हालांकि, बड़े पक्या के रोल के लिए मुझे जो शारीरिक परिवर्तन करना पड़ा, वह आसान नहीं था। उस दौरान मैंने एक एक दिन में किलो के हिसाब से रसगुल्ले खाए थे, वजन बढ़ाने के लिए।”
