पूरी दुनिया में संगीत के लिए मशहूर और अकादमी व ग्रैमी अवार्ड विजेता संगीतकार ए आर रहमान ने पहली बार फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा है। उन्होंने अपना यह सफर एक संगीतमय फिल्म के साथ शुरू किया है, जिसका नाम है "99 सांग्स"। यह उनकी संगीत यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। फिल्म के लीड किरदार के लिए इसके हीरो इहान भट्ट ने साल भर तक पियानो बजाना सीखा है और रहमान ने उन्हें एक्टिंग की तालीम लेने विदेश भी भेजा।
रहमान के ‘99 सांग्स’ स्पेशल कॉन्सर्ट ने बांधा समा, मेगा बजट फिल्म के गानों का ओटीटी पर श्रीगणेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ए आर रहमान की यह फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। उसके पहले ही "99 सांग्स" का अनुभव लेने के लिए इसके गानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है। हिंदी, तमिल और तेलुगू में फिल्म के इन गानों की स्ट्रीमिंग की जा रही है। "99 सांग्स" के विशेष कॉन्सर्ट के बारे में, ए.आर. रहमान का कहना है, “पहले मेरा यह विचार था कि मैं हर शहर और हर कॉलेज में जाऊं और अपनी फिल्म के गानों को परफॉर्म करूं, लेकिन समय की नजाकत को देखते हुए ऐसा संभव नहीं है । इसलिए हमने इस शो की अवधारणा की है।”
इस विशेष संगीत कार्यक्रम में रहमान के साथ-साथ बेनी दयाल, शाश्वत सिंह, शाशा तिरुपति, विजय येसुदास, श्रीकांत हरिहरन, पूर्वी कौतिश, हरिचरण व अन्य शामिल रहे। यह शो वास्तव में संगीत की शक्ति का उत्सव है। फिल्म निर्माण की कला की तरह रहमान "99 सांग्स" के साउंडट्रैक के माध्यम से एक यात्रा पर दर्शकों को ले जाने के लिए कहानी के साथ संगीत को जोड़ते हैं और ऐसा लगता है कि हम कोई एक पुस्तक पढ़ रहे हैं और उसके पन्ने पलट रहे हैं। रहमान के मुताबिक “99 सॉन्ग्स’ पुरानी दुनिया और नई दुनिया के बीच एक आदमी के संघर्ष की कहानी है।"
संगीत कार्यक्रम की शुरुआत आध्यात्मिक प्रेम गीत "ओ आशिका" से हुई, जिसे शाश्वत सिंह ने गाया। इस गाने में रहमान पियानो पर धुनो बजाते हुए अलग ही समा बांध देते हैं। जैसा कि गीतकार विर्क ने समझाया, यह निस्वार्थ भावनाओं और एक बेहतर दुनिया की भावना को लेकर रचा गया संगीत है। निर्देशक और स्क्रीनप्ले लेखक विश्वेश कृष्णमूर्ति ने कहा कि "99 सांग्स"के निर्माण के दौरान फिल्म निर्माण के साथ उनका रिश्ता मजबूत होता गया। । भावुक कृष्णमूर्ति ने रहमान के बारे में कहा “वह संगीत के बारे में एक फिल्म बनाना चाहते थे और चाहते थे कि मैं इसे निर्देशित करूं। मैंने गहराई तक जाने की कोशिश की। रहमान ने वास्तव में मुझे इस फिल्म में और बेहतर बना दिया।"
इस अवसर पर शाश्वत सिंह ने अपने सुरीले गाने "सोफिया" से लोगों का मन मोह लिया। पूर्वी कौटिश ने "ज्वालामुखी" गाकर लोगों को भावुक कर दिया। कुछ और गाने जैसे " तेरी नजर", "ओ मेरा चांद", "साई शिरडी साई" "सो जा सो जा" " नयी नयी" आदि मंत्रमुग्ध कर देने वाली परफॉर्मेंसेस के साथ इस सुरीली शाम का समापन हुआ।