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सेल्समैन की नौकरी करते थे अरशद वारसी, अब बोले- मैंने कभी किसी काम को छोटा नहीं समझा
Wed, 20 Nov 2019 08:04 AM IST
भावना शर्मा
मुंबई ब्यूरो
मुंबई ब्यूरो
Published by: भावना शर्मा
Updated Wed, 20 Nov 2019 08:04 AM IST
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Arshad Warsi
- फोटो : file photo
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सेल्समैन की नौकरी से करियर शुरू करने वाले अरशद वारसी ने हिंदी सिनेमा के चंद सबसे मशहूर किरदारों में से एक सर्किट को घर-घर तक पहुंचाया है। अरशद को जब भी जिस तरह का किरदार मिला उसे उन्होंने अपना बनाकर पर्दे पर पेश कर दिया। वह जल्द ही एक और कॉमेडी फिल्म पागलपंती में नजर आने वाले हैं।
अरशद वारसी
- फोटो : self
किसी किरदार को अपनाने का आपका क्या सीक्रेट है?
अभिनेता के लिए जरूरी होता है कि वह हर एक किरदार को अपना ले और उस किरदार में पानी की तरह बह जाए। ये वही लोग कर सकते हैं जिन्हें किरदार की चमड़ी ओढ़ना आता है। सभी लेखक कुछ अलग सोच के साथ किरदार लिखते हैं। मैं हमेशा लेखक निर्देशक से किरदार के बारे में पूछता हूं। वह जैसा बताते हैं मैं उसे वैसा ही उतारने की कोशिश करता हूं। एक अभिनेता के तौर पर अभिनेता को वही करना चाहिए जो जो लेखक और निर्देशक ने सोचा है वह नहीं जो अभिनेता करना चाहता है।
अभिनेता के लिए जरूरी होता है कि वह हर एक किरदार को अपना ले और उस किरदार में पानी की तरह बह जाए। ये वही लोग कर सकते हैं जिन्हें किरदार की चमड़ी ओढ़ना आता है। सभी लेखक कुछ अलग सोच के साथ किरदार लिखते हैं। मैं हमेशा लेखक निर्देशक से किरदार के बारे में पूछता हूं। वह जैसा बताते हैं मैं उसे वैसा ही उतारने की कोशिश करता हूं। एक अभिनेता के तौर पर अभिनेता को वही करना चाहिए जो जो लेखक और निर्देशक ने सोचा है वह नहीं जो अभिनेता करना चाहता है।
अरशद वारसी
- फोटो : social media
मुन्नाभाई सीरीज की अगली फिल्म पर क्या अपडेट है, कुछ बता सकते हैं?
मैं भी अक्सर निर्देशक राज कुमार हीरानी से यही पूछता रहता हूं। उनका जवाब होता है कि वह लिख रहे हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक वह मुन्नाभाई सीरीज की अगली सीक्वेल की दो तीन पटकथाएं लिख चुके हैं, बस क्लाइमेक्स और कहानी के अंत को लेकर अटके हैं। किसी दिन भी दिन राजू का फोन आ सकता है कि मिल गया मुझे कहानी का अंत, चलो अब शुरू करते हैं फिल्म।
मैं भी अक्सर निर्देशक राज कुमार हीरानी से यही पूछता रहता हूं। उनका जवाब होता है कि वह लिख रहे हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक वह मुन्नाभाई सीरीज की अगली सीक्वेल की दो तीन पटकथाएं लिख चुके हैं, बस क्लाइमेक्स और कहानी के अंत को लेकर अटके हैं। किसी दिन भी दिन राजू का फोन आ सकता है कि मिल गया मुझे कहानी का अंत, चलो अब शुरू करते हैं फिल्म।
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Arshad warsi bike
अभिनेता के तौर पर आप किस तरह की कहानी की खोज में रहते हैं?
मुझे ऐसी कहानी पसंद आती है जो सुनते ही आपके दिल को छू जाए। अब चाहे वह कॉमेडी, एक्शन या फिर ड्रामा हो, फर्क नहीं पड़ता। बस कहानी आपके किसी एक जज्बात को छू ले।
पागलपंती जैसी फिल्म का आपको इतना इंतजार क्यों रहा?
लंबे समय बाद मुझे ऐसी फिल्म मिली है जहां मुझे खुलकर कॉमेडी करने का मौका मिला है। हर निर्देशक का अपना काम करवाने का तरीका होता है। कुछ निर्देशिक स्क्रिप्ट से हटकर कुछ भी करने की गुंजाइश नहीं छोड़ते हैं लेकिन पागलपंती के निर्देशक अनीस बज्मी ने मुझे बांधकर नहीं रखा। मुन्नाभाई में मुझे ऐसा मौका मिला था जहां राजू हिरानी ने मुझे खुलकर कॉमेडी करने की छूट दी थी।
मुझे ऐसी कहानी पसंद आती है जो सुनते ही आपके दिल को छू जाए। अब चाहे वह कॉमेडी, एक्शन या फिर ड्रामा हो, फर्क नहीं पड़ता। बस कहानी आपके किसी एक जज्बात को छू ले।
पागलपंती जैसी फिल्म का आपको इतना इंतजार क्यों रहा?
लंबे समय बाद मुझे ऐसी फिल्म मिली है जहां मुझे खुलकर कॉमेडी करने का मौका मिला है। हर निर्देशक का अपना काम करवाने का तरीका होता है। कुछ निर्देशिक स्क्रिप्ट से हटकर कुछ भी करने की गुंजाइश नहीं छोड़ते हैं लेकिन पागलपंती के निर्देशक अनीस बज्मी ने मुझे बांधकर नहीं रखा। मुन्नाभाई में मुझे ऐसा मौका मिला था जहां राजू हिरानी ने मुझे खुलकर कॉमेडी करने की छूट दी थी।
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Arshad Warsi
निर्देशक अनीस बज्मी अक्सर सेट पर डायलॉग बदल देते हैं, एक अभिनेता के लिए ये कितना मुश्किल होता है?
मैं तो हमेशा दूसरे कलाकारों को यही सलाह देता हूं कि सेट पर कभी संवाद याद करके आए हीं नहीं। मैं सेट पर ही आता हूं और वहीं पढ़ता हूं और फिर बोल देता हूं। जब आप रटकर नहीं आते हैं तो कुछ नया करने की जगह होती है अगर रटकर आते हो तो थोड़ा मुश्किल होता है।
मैं तो हमेशा दूसरे कलाकारों को यही सलाह देता हूं कि सेट पर कभी संवाद याद करके आए हीं नहीं। मैं सेट पर ही आता हूं और वहीं पढ़ता हूं और फिर बोल देता हूं। जब आप रटकर नहीं आते हैं तो कुछ नया करने की जगह होती है अगर रटकर आते हो तो थोड़ा मुश्किल होता है।