फिल्म 'पानीपत' को लेकर खूब वाहवाही लूटने वाले निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने अपनी अगली फिल्म पर काम शुरू कर दिया है। जिस तरह पिछली फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन को एक दमदार रोल देकर उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों के सामने बहुत ही शानदार तरीके से पेश किया, वैसे ही आशुतोष इस बार एक ऐसी अभिनेत्री पर मेहनत करने की तैयारी कर रहे हैं, जिनकी अब तक की छवि ‘इंदु की जवानी’ से आगे नहीं बढ़ सकी है।
आशुतोष गोवारिकर ने शुरू की एक और बायोपिक, इस बार सुनाएंगे पापड़ बनाने वालों की ये दिलचस्प कहानी
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कुछ दिनों पहले ओटीटी पर रिलीज हुई अक्षय कुमार के साथ कियारा आडवाणी की फिल्म 'लक्ष्मी' के लिए जितनी किरकिरी अक्षय कुमार की हुई, उतना ही कियारा आडवाणी को भी सुनने को मिला। सोशल मीडिया पर लगातार बातें होती रही हैं कि आखिर कियारा इस फिल्म में क्यों थीं जब उन्हें ठीक से कोई संवाद बोलने के लिए ही नहीं मिला! उसके बाद जब उनकी आने वाली फिल्म 'इंदु की जवानी' का ट्रेलर रिलीज किया गया तब सोशल मीडिया पर 'लक्ष्मी' की बात को ही दोहराया गया।
'इंदु की जवानी' का ट्रेलर देखने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर कियारा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यही वह फिल्म है जिसमें कियारा आडवाणी को थोड़े संवाद बोलने का मौका मिल रहा है। अब उनका नाम आशुतोष गोवारिकर की इस फिल्म से मुख्य तौर पर जुड़ा है तो कियारा के पास मौका है अपने आलोचकों का मुंह बंद करने का। आशुतोष और कियारा की इस फिल्म का कामचलाऊ शीर्षक 'कर्रम कुर्रम' बताया जा रहा है। आशुतोष की टीम इस फिल्म पर पिछले लगभग एक साल से काम कर रही है।
आशुतोष ने फिल्म की पटकथा पूरी कर ली है और इसका निर्देशन वह अपने सहायकों ग्लेन बरेटो और अंकुश मोहला के साथ मिलकर ही करने वाले हैं। दरअसल, आशुतोष को लिज्जत पापड़ के संस्थापकों की कहानी उनके सहायकों ने ही सुझाई थी। इसके बाद आशुतोष ने उन गुजराती गृहिणियों की जिंदगी पर फिल्म बनाने के अधिकार पा लिए हैं। फिल्म की शूटिंग वह अगले साल अगस्त में शुरू करेंगे। तब तक उन्हें फिल्म के बाकी कलाकारों का चयन भी करना है।
लिज्जत पापड़ की शुरुआत वर्ष 1959 में मुंबई की रहने वाली सात महिलाओं ने अपने परिवार का भरण पोषण ठीक प्रकार से करने की नीयत से शुरू की थी। इन सात महिलाओं का नाम जसवंतीबेन पोपट, जयाबेन विठलानी, पार्वतीबेन थोड़ानी, उजामबेन कुंडलिया, बानुबेन तन्ना, सी गवाड़े और लागूबेन गोकानी है। इन सात बहनों ने अपना काम एक दिन में पापड़ों की चार पैकेट बनाने से शुरू किया था। कुछ ही महीनों में वह दो सौ तक पहुंचीं और आज के समय में लगभग 45 हजार महिलाएं उनके लिए काम करती हैं।
इस प्रेरणादायक कहानी के लिए आशुतोष गोवारिकर की पहली पसंद कियारा आडवाणी ही थीं। उन्हें लगता है कि कियारा ही वह अभिनेत्री हैं जिसमें नम्र स्वभाव और सख्त स्वभाव दोनों को दिखाने की प्रचुर क्षमता है। आशुतोष को चाहिए कि मध्यम वर्गीय महिलाओं के लड़ने की उस प्रवृत्ति को कोई अभिनेत्री अच्छे से पर्दे पर दिखा सके। उनके लिए वह सिर्फ कियारा ही कर सकती हैं।
आशुतोष की पिछली दोनों फिल्में इतिहास पर आधारित रहीं। 'मोहनजो दारो' और 'पानीपत' की चर्चा इनकी मेकिंग को लेकर खूब हुइ। इससे पहले 'खेलें हम जी जान से' में भी आशुतोष ने खूब मेहनत की थी। 2008 में आई 'जोधा अकबर' आशुतोष की अब तक की सबसे बड़ी हिट मानी जाती है 'लगान' और 'स्वदेस' जैसी फिल्में बनाने का श्रेय भी आशुतोष को ही जाता है।