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'द लायन किंग' में 'जाजू' की आवाज बन खुश हैं असरानी, इंटरव्यू में एक्टर्स को दी ये सलाह

अक्षित त्यागी, अमर उजाला, मुंबई Published by: shrilata biswas Updated Mon, 29 Jul 2019 10:21 AM IST
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asrani said he is happy for zazu character in the lion king
asrani - फोटो : social media

76 साल के हो चुके मशहूर हास्य कलाकार गोवर्धन असरानी अंग्रेजों के जमाने के जेलर से लेकर द लायन किंग के जाजू तक अपना जलवा बरकरार रखे हुए हैं। 50 साल से भी ज्यादा समय से अभिनय की दुनिया में सक्रिय असरानी से एक खास मुलाकात।

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asrani said he is happy for zazu character in the lion king
the lion king - फोटो : social media

आपको लगता है कि द लायन किंग में जाजू की आवाज ने आपके करियर को एक नया मोड़ दे दिया है?
हां, मेरे लिए यह बिल्कुल नया प्रयोग रहा। फिल्मों में इंसानों की डबिंग तो करते आए हैं, लेकिन एक पक्षी की डबिंग? मैं तो खुद ही चौंक गया कि इन लोगों ने मुझे क्या सोचकर बुला लिया। मुझे कहानी सुनाई गई तो पता चला कि यह तो राजा का खबरी है और बच्चों का खयाल रखता है। बस, इस किरदार की यही बात मुझे बेहद दिलचस्प लगी।

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Asrani - फोटो : file photo

समय के साथ आपने खुद को काफी बदला है, किसी भी क्रिएटिव इंसान के लिए बदलाव कितना जरूरी है?
अमिताभ बच्चन जी ने पांच साल काम नहीं किया। लौटने के बाद वह फिर हीरो बने लेकिन दर्शकों ने फिर भी उन्हें स्वीकार नहीं किया। तब उन्हें चरित्र अभिनेता बनना पड़ा। कलाकारों को कभी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। जब आप बदलाव के निर्णायक मोड़ पर होते हैं तो आपको खुद भी बदलना ही पड़ता है। 

हां, आप तो खलनायक से हास्य कलाकार बने?
हां, उस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा और नीतू सिंह भी थे। मैंने विलेन का किरदार निभाया था। पर वह फिल्म चली नहीं। लोगों ने मुझे साफ मना कर दिया कि भाई विलेन मत बनो, उसके बाद मैंने उस तरफ सोचना ही बंद कर दिया। 

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asrani - फोटो : social media

आज के जमाने में किसी का हास्य अभिनय आपको प्रभावित करता है?

आज सब कुछ हीरो कर रहा है। हीरोइन भी करती है और विलेन भी करता है। आप देख लीजिए कि कॉमेडी जैसे औरत के कपड़े पहनना और चुटकुले छोड़ना, यह सब कुछ अब एक हीरो कर रहा है तो कॉमेडियन का सिनेमा में काम ही क्या है। हिंदी फिल्मों में कॉमेडियन अब बस एक साइडकिक बनकर रह गया है। 

हीरो तो आप भी रहें, कुछ बताइए ना उन दिनों के बारे में?
मैं पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से आया था दो साल का कोर्स करके। बंबई में पहली फिल्म गुड्डी मुझे पांच साल के संघर्ष के बाद मिली। फिर गुजराती फिल्में मिलीं जिनमें मैंने हीरो के रोल किए लेकिन मेरा मन मुंबई में था तो वापस यहां आकर कॉमेडी करने लगा। निर्देशन भी किया, लेकिन वहां भी मामला जमा नहीं। अब मैं चरित्र अभिनेता के तौर पर ही काम कर रहा हूं।

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asrani - फोटो : social media
कभी किसी ने कहा हो कि आप हास्य कलाकार से अलग भी कुछ बन सकते थे?
उस वक्त सभी का अपना तरीका था। महमूद साहब टॉप पर थे। उसके पहले जॉनी वॉकर हुआ करते थे। पर मैंने कभी किसी की नकल नहीं की। भाग्य भी अच्छा निकला क्योंकि निर्देशक सभी अच्छे मिले। ऋषिकेश मुखर्जी, गुलजार, शक्ति सामंत जैसे निर्देशकों ने मुझे अच्छे किरदार दिए। गुलजार साहब ने कहा था, ‘तू यार कॉमेडी का लगता ही नहीं है मुझे।’ लेकिन, मैं कभी इससे बाहर निकल नहीं पाया।
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