अपनी रिलीज के दूसरे हफ्ते में भी देश विदेश में बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ में असल अवतार अगर किसी किरदार का हुआ है तो वह है कर्नल माइल्स क्वारिट्च का किरदार। कर्नल माइल्स को पिछली फिल्म ‘अवतार’ में कहानी की नायिका नेतिरी मार देती है। लेकिन, फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ में वह विज्ञान के सहारे फिर से जिंदा हो उठा है एक नए शरीर के साथ। इस किरदार को निभाने वाले अभिनेता स्टीफन लैंग को भारतीय सिनेमा के दर्शक उनकी हालिया हिट सोलो फिल्मों ‘डोंट ब्रीद’ और ‘डोंट ब्रीद 2’ से भी खूब पहचानते हैं। 70 साल के हो चुके लैंग अब भी एक्शन दृश्यों में पूरी सहजता से हिस्सा लेते हैं। कम लोग ही जानते हैं कि लैंग के पिता ने अपनी पूरी संपत्ति दान में दे दी थी और लैंग कहते हैं कि एक पिता अगर अपने पुत्र को सही आधार दे देता है तो उससे ज्यादा जरूरत और किसी चीज की दुनिया का सामना करने में पड़ती नहीं है। स्टीफन लैंग से ये एक्सक्लूसिव बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
Stephen Lang Exclusive: अवतार 2 के 70 वर्षीय विलेन ने बताया चुस्ती का राज, बोले, जब करने को कुछ न हो तो मैं..
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पुनर्जन्म नहीं नया अवतार
कर्नल माइल्स के किरदार के फिल्म ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ में फिर से दिखने के सवाल पर स्टीफन लैंग कहते हैं, ‘पुनर्जन्म की अवधारणा से तो आप परिचित होंगे ही। लेकिन, ये माइल्स का पुनर्जन्म नहीं है। मैं इसे उसका नया अवतार कहता हूं। उसका फिर से निर्माण हुआ है। जिस कंपनी में वह काम कर रहा था, उनके पास उसका डीएनए संरक्षित था। तो कंपनी के लोगों ने कुछ गुणा भाग किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि जिस तरह की योद्धा ये कर्नल था, उस हिसाब से उसका फिर से पुनर्निर्माण करना घाटे का सौदा नहीं होगा। अब वह नावी के शरीर में है और उससे उम्मीद यही है कि वह अपने उस मिशन में इस बार जरूर कामयाब होगा, जिसमें पिछली बार वह फेल हो गया था।’
बेटों को अभिनय में रुचि नहीं
स्टीफन लैंग अब तक करीब 80 फिल्मों में काम कर चुके हैं। इस सिनेमाई विरासत को उनकी अगली पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है लेकिन अलग तरीके से। लैंग बताते हैं, ‘मेरे दोनों बेटे इसी कारोबार में हैं लेकिन इनमें से एक निर्माता है और दूसरा सिनेमैटोग्राफी में है। इन लोगों ने देखा है कि अभिनेता बनना कितना कठिन है तो इनमें से कोई भी इस पेशे को पसंद नहीं करता। वैसे भी मैं अपनी विरासत की चिंता नहीं करता। मुझे काम करते रहने में आनंद आता है और मैं उम्मीद यही करता हूं कि मैं लगातार काम करता रहूं। मैं तब तक काम करता रहना चाहता हूं जब तक कि मैं अपने संवादों को याद करके कैमरे के सामने दोहराता रह सकूं और जब तक कि फिल्में बनाने वाले मुझे काम देते रहें।’
घर पर मेरी बेटी कमांडिंग ऑफिसर
लैंग की बहन नामी वकील हैं और बेटी न्यूयॉर्क की इंस्पेक्टर जनरल। एक अभिनेता के तौर पर जब वह परदे पर विलेन के किरदार करते हैं, तो इनकी प्रतिक्रिया क्या होती है? स्टीफन लैंग मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मेरे हिसाब से ये लोग मेरे काम का मान रखते हैं। वे ये भी बताते हैं कि मुझे क्या करना चाहिए। मेरी बेटी न्यूयॉर्क स्टेट की इंस्पेक्टर जनरल है तो घर पर भी वही मेरी कमांडिंग ऑफिसर होती है। साथ में मेरी बीवी का भी हुकुम चलता है। हालांकि, जब मैं सेट पर होता हूं तो भले मुझे कर्नल माइल्स का किरदार मिला हो यहां तो जेम्स कैमरून ही जनरल होते हैं।’
मेरे पिता ने मुझे जीना सिखाया
इन दिनों पिता पुत्र के रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने के प्रयास पूरी दुनिया में चल रहे हैं। स्टीफन लैंग के पिता ने अपनी पूरी संपत्ति दान में दे दी? क्या इसीलिए कि पूत सपूत तो का धन संचै? अपने पिता की याद करते ही स्टीफन लैंग का चेहरा चमक उठता है। वह कहते हैं, ‘मैं इस बात से बहुत खुश हूं कि वह फिल्म ‘अवतार’ देख सके। अभी उनको गुजरे छह सात साल हो चुके हैं। मेरे अपने पिता से बहुत कमाल के रिश्ते रहे। उनसे कभी मैंने किसी तरह के धन की उम्मीद की भी नहीं। उन्होंने मुझे जीने का एक अच्छा आधार दिया और मुझे अच्छी शिक्षा दिलाई। उन्होंने मुझे परिवार का मतलब सिखाया और ये सिखाया कि जीवन को कैसे सही तरीके से जीना चाहिए। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही मैं यहां तक आया हूं। वैसे मैं ये बता दूं कि अगर मुझे कभी पैसे की जरूरत पड़ती तो मेरे पिता शर्तिया कभी नहीं मना करते।’