छोटे परदे पर 'हिना' सीरियल को आए दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन जब भी मैं कहीं जाती हूं तो इसे लेकर बात जरूर होती है। मेरे हिसाब से अच्छी कहानियों का असर यही होता है कि उनके किरदार लोगों के जेहन में बस जाते हैं। बचपन में सुनी तमाम कहानियां भी हमें इसलिए याद रह जाती हैं, क्योंकि उनमें हम अपने जैसा कुछ ढूंढने में कामयाब रहते हैं, लेकिन जमाना बदलता है तो किरदार भी बदलते हैं। 'हिना' से लेकर 'बहू बेगम' तक महिलाओं की सोच में बदलाव आया है। जमाने से मुकाबला करने का उनका हौसला बढ़ा है और हमें भी अपने आसपास ऐसी महिलाओं का समर्थन करना चाहिए, जो अपने बूते कुछ कर दिखाने की मशक्कत कर रही हैं।
टीवी की 'बहू बेगम' बोलीं- 'मैं वही करती हूं, जो पसंद आए, एक बार हां की तो किसी की नहीं सुनती'
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किसी एक दायरे में बंधकर आरामदायक जिंदगी बिताते रहना इंसान के विकास में बाधा बनता है। मेरे हिसाब से अलग-अलग प्रांतों के लोगों से मिलना काफी फायदेमंद साबित होता है। उनके अलग-अलग अनुभवों से काफी कुछ सीखने को भी मिलता है। उनसे बात करने के बाद एक नई तरह की ऊर्जा महसूस होती है। मैं अक्सर सोचती हूं तो मुझे लगता है कि अच्छे और बुरे हर तरह के बदलाव एक ही मात्रा में हुए हैं। कुछ बदलावों ने टीवी पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ाई है। वहीं जिस तरह का काम आज होता है और जितनी मेहनत अभिनेताओं, लेखकों और निर्माताओं को करनी पड़ती है, उसका प्रभाव भी कंटेंट की गुणवत्ता पर पड़ता है।
पहले सभी सीरियलों की कहानी एक जैसी और साधारण हुआ करती थी पर आज नई-नई कहानियां हैं, और उनके प्रदर्शन में भी काफी बदलाव आया है, इससे मैं बेहद खुश हूं। पर कुछ बदलाव ऐसे भी हैं, जो अच्छे नहीं हैं। अभी एक नया दौर शुरू हुआ है ओटीटी का। इस वेब प्लेटफॉर्म ने ही नई-नई तरह की शैलियां और कहानियों की पेशकश को बढ़ावा दिया है। अब हर तरह के दर्शक अपनी-अपनी पसंदीदा शैलियों के अनुसार चयन कर सकते हैं। यह बेहद अच्छी बात है। वहीं कलाकारों और तकनीशियनों के लिए यह सबसे अच्छा समय है, इतने सारे माध्यमों के चलते अब काम का अभाव नहीं है। लेकिन, किसी भी नए के पीछे पागलों की तरह दौड़ पड़ना भी सही नहीं है। काम उतना ही करना चाहिए जितने में आपकी मानसिक शांति में खलल न पड़े।
मैं टीवी से इसीलिए दूर हुई। इसमें काम करना बहुत ही थका देने वाला होता है। एक कलाकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मेरा मानना है कि कोई बड़ा काम शुरू करने से पहले आपको खुद को शारीरिक रूप से जरूर तैयार करना चाहिए। कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले मैं तो लंबी छुट्टियां लेती हूं। इसके अलावा मैं यह भी कहती हूं कि इंसान को अपनी सोच का पक्का होना चाहिए। अगर हम दूसरों के दबाव में अपने फैसले बदलते रहते हैं तो फिर अपने जैसा कुछ हो नहीं पाएगा। मुझे भी किसी किरदार को करवाने के लिए खूब मनाना पड़ता है। इतनी आसानी से मैं किसी भी किरदार के लिए हामी नहीं भरती।
मैं कई बार अपने नए प्रोजेक्ट्स के बीच काफी समय खाली बिताती हूं। मुझे बहुत सारा काम करने का जुनून नहीं है। मैं वही करती हूं, जो मुझे पसंद आता है। लेकिन जब एक बार हां कर देती हूं, उसके बाद किसी की भी नहीं सुनती। अपने मन की भी नहीं। जीवन अनुभवों की पोथी होती है। हर अनुभव हमारे लिए एक सबक होता है। यह कैसा भी हो सकता है अच्छा या बुरा। तो अगर जीवन में आपके साथ कुछ बुरा हुआ है, तो उससे घबराना नहीं चाहिए। हर हादसा हमें कुछ न कुछ सिखाकर जरूर जाता है।