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जब इस बॉलीवुड फिल्म में 'किन्नर' बनी थीं सीमा विश्वास तो खास इंटरव्यू में खोले थे बड़े राज

Mon, 14 Jan 2019 12:12 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Mon, 14 Jan 2019 12:12 AM IST
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Bandit queen Actress Seema Biswas birthday Special story
Seema Biswas
'बैंडिट क्वीन' और 'वाटर' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाली बेहतरीन अदाकारा सीमा बिस्वास अलग और हटकर फिल्म 'क्वींस! डेस्टिनी ऑफ द डांस' में भी दिखाई दीं। लॉस एंजिल्स मूवी अवार्ड में हुए समारोह में इस फिल्म ने 6 पुरस्कार भी हासिल किए, जिसमें सीमा बिस्वास को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के खिताब से नवाजा गया है। फिल्म फेयर और नेशनल अवार्ड से पुरस्कृत सीमा बिस्वास ने अमर उजाला के साथ खास इंटरव्यू में फिल्म से जुड़े अपने कुछ खास अनुभव बांटे थे। देखिए उनके 54वें जन्मदिन पर ये स्पेशल इंटरव्यू...
Bandit queen Actress Seema Biswas birthday Special story
Seema Biswas
फिल्म ''क्वींस! डेस्टिनी ऑफ द डांस' विदेश में धूम मचा रही है। ऐसा क्या है इस फिल्म में?
देखिए, इस फिल्म में हमने किन्नरों की ऐसी दास्तान को दिखाने का प्रयास किया है जो अभी तक अनटच रही हैं। फिल्म की कहानी, किरदार, निर्देशन और अभिनय अपने आप में निराला है। फिल्म को लॉस एंजिल्स मूवी अवार्ड समारोह में 6 श्रेणी में पुरस्कार मिल चुके हैं।

बॉलीवुड में क्वालिटी फिल्मों में स्तर कम हो रहा है। साउथ की रीमेक पर जोर है। ऐसा क्यों?
बॉलीवुड के लिए यह सही संकेत नहीं है। इस ओर हम सबको नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। रिमेक एक सीमा तक तो ठीक है लेकिन ऑरिजनेलिटी पर हमें जोर देना चाहिए।
Bandit queen Actress Seema Biswas birthday Special story
सीमा विश्वास - फोटो : amar ujala
अपने किरदार के बारे में बताएं? इस किरदार के लिए आपको किस तरह की मेहनत करनी पड़ी?
फिल्म में मेरा किरदार बहुत दमदार है। मैं गुरु अम्मा के रूप में दिखाई दूंगी जो किन्नर समाज को नेतृत्व प्रदान कर रही है। इस तरह का किरदार मैंने कभी नहीं निभाया है। इसलिए इस किरदार को आत्मसात करने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। शोध से लेकर किन्नरों तक से मैंने मुलाकात की। उनके रहन-सहन को मैंने करीब से देखा। यह सब करते हुए मुझे किन्नर समाज को समझने में बहुत मदद मिली।

फिल्म के टाइटल में क्वींस शब्द 'बैंडिट क्वीन' की याद दिलाता है। क्वींस रखने का खास मकसद?
फिल्म के टाइटल का बैंडिट क्वीन से कोई ताल्लुक नहीं है। 'क्वींस! डेस्टिनी ऑफ द डांस' में क्वींस शब्द को लेने के पीछे कारण यह है कि किन्नर समाज श्रृंगार, डांस और नजाकत से परिपूर्ण होता है। उनमें एक क्वीन के तरह सजने संवारने की ललक होती है। यहीं कारण है फिल्म के टाइटल में क्वींस को लिया गया।
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Bandit queen Actress Seema Biswas birthday Special story
seema biswas - फोटो : file photo
'क्वींस! डेस्टिनी ऑफ द डांस' का वास्तविकता से कितना नाता है? क्या फिल्म किन्नरों के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगी?
देखिए, 'क्वींस! डेस्टिनी ऑफ द डांस' का सीधे तौर पर वास्तविकता से संबंध नहीं है लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से यह असलियत को बयान करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह किन्नरों को समाज में वो सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। उन्हें तिरस्कार से गुजरा पड़ता है। फिल्म में दिखाया गया है कि अगर किसी लड़के में नारीत्व के गुण या भाव पैदा होते है तो उसे समाज ही नहीं परिवार से दूर कर दिया जाता है। हालात ऐसे हो जाते है कि उसे मजबूरन किन्नरों के समाज में आना पड़ता है।

किन्नरों के प्रति आपका खुद का नजरिया क्या है?
फिल्म करने के दौरान किन्नरों के बारे में मैंने बहुत कुछ देखा और समझा। किन्नरों को आज भी दुत्कार और समाज से अलग ही माना जाता है। समाज की व्यवस्था में वह अपने आप को अलग-थलग पाते हैं। आज भी संविधान और समाज में व्यवस्था नहीं कि वह अपने आपको ट्रांसजेंडर की श्रेणी में रखें। उन्हें मजबूरन मेल या फीमेल लिखने के लिए विवश किया जाता है। साफ दिखता है कि समाज आज भी उन्हें उनके असली रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं है।
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फूलन और फिल्म में फूलन बनीं सीमा बिस्वास
फिल्म को विदेशों में वाह-वाही मिल रही है भारत में भी मिलेगी?
फिल्म अच्छी है तभी तो विदेशी फिल्म समारोह में धूम मचा रही है और हमें उम्मीद है कि भारत में भी यह कमाल करेगी।

माना जाता है कि ऐसी फिल्में फिल्म फेस्टिवल में ही पूछी जाती है? आम दर्शक इस तरह की फिल्मों से कन्नी काट लेता है। ऐसा क्यों?
ऐसा पहले हुआ करता था। देश का दर्शक अब काफी परिपक्व हो गया। बोल्ड और अलग हटकर बनने वाली फिल्मों को आम दर्शक वर्ग भी स्वीकारने लगा है। इसलिए हमारी ऐसी फिल्म फिल्म समारोह में नहीं बॉक्स ऑफिस पर भी बेहतर बिजनेस करेगी।

आपने फिल्म में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का खिताब हासिल किया है? अवार्ड्स आपके लिए कितने मायने रखते हैं?
अवार्ड्स किसी को उत्साहित और प्रोत्साहित करने में बेहद मददगार होते है और इन्हें पाकर मैं भी खुश हूं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अवार्ड्स के लिए काम करती हूं। मैं अपना काम शिद्दत से करती हूं और यही मुझे अवार्ड पाने में मदद करते हैं। अगर इनसान अपने काम के प्रति वफादार होगा तो उसे बेहतर परिणाम हासिल होंगे। मैं किरदार को आत्मसात करने में विश्वास करती हूं।
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