फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

'थोड़ा सा खुश रहने के लिए अपने आपको धोखा देना पड़ता है', पढ़ें ऐसे ही सदाबहार 25 फिल्मी डायलॉग्स

Wed, 06 May 2020 01:16 AM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Avinash Pal Updated Wed, 06 May 2020 01:16 AM IST
विज्ञापन
Best Evergreen Bollywood Movie Dialogues from 40s 50s and 60s Era of indian cinema
सिनेमा के डायलॉग्स - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

हिंदी सिनेमा का इतिहास एक शताब्दी से भी पुराना है। 1913 में दादा साहेब फाल्के द्वारा पहली भारतीय फिल्म राजा हरीशचंद्र निर्देशित की गई थी। इसके बाद हिंदी सिनेमा ने धीरे- धीरे अपने पैर पसारना शुरू किए और अब 2020 में हिंदी सिनेमा पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखता है। किसी भी फिल्म की सफलता में अहम किरदार रखते हैं उसके डायलॉग्स। आज की फिल्मों के डायलॉग्स तो करीबन सभी को याद हैं लेकिन इस पैकेज में हम आपको बताते हैं 40 से 60 तक के दशक के कुछ बेहतरीन डायलॉग्स।

Best Evergreen Bollywood Movie Dialogues from 40s 50s and 60s Era of indian cinema
रोटी - फोटो : सोशल मीडिया
1. रोटी 
(सड़क पर एक भूखा इंसान भीख मांग रहा है लेकिन उसकी कोई मदद नहीं करता।)
नायक- रोटी माँगने से नहीं मिले तो छीनकर ले लो....मार कर ले लो।

2. रोटी 
(एक मुसलमान (शेख मुख़्तार) रेलवे स्टेशन पर खड़ा है और एक व्यक्ति चाय बेच रहा है- हिंदू चाय एक आना... शेख मुख़्तार चाय पीता है। उधर से दूसरा आदमी- मुस्लिम चाय एक आना करके चाय बेचता है।)
शेख मुख़्तार उससे भी चाय खरीदता है पर उसकी गर्दन पकड़ लेता है.
शेख मुख़्तार- एक ही चाय दो नाम से क्यों बेच रहे हो ?
Best Evergreen Bollywood Movie Dialogues from 40s 50s and 60s Era of indian cinema
गंगा जमुना - फोटो : सोशल मीडिया
3.सिकंदर 
(जहां पोरस की सेना सिकंदर से हार जाती है।)
सिकंदर ( पृथ्वीराज कपूर)- तुम्हारे साथ क्या सुलूक किया जाए? पोरस ( सोहराब मोदी) – जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।

4. गंगा जमुना 
(गाँव के गंगा ने मेहनत मज़दूरी करके अपने छोटे भाई को शहर में पढ़ाया है और वो पुलिस अफ़सर बनकर गाँव आया है। जबकि गंगा अन्याय से तंग आकर डाकू बन गया है और शादी कर ली है। गंगा (दिलीप कुमार) की पत्नी वैजयंती माला छोटे भाई से कहती है।)
वैजयंतीमाला- देवरजी अपनी भौजाई के लिए कंगन तो नहीं लाए पर भैया के लिए हथकड़ी लेकर आए हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Best Evergreen Bollywood Movie Dialogues from 40s 50s and 60s Era of indian cinema
आवारा - फोटो : सोशल मीडिया
5. आवारा 
(नायक पर मुकदमा चल रहा है।)
नायक- जज साहब, मै जन्म से अपराधी नहीं हूं। मेरी मां चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर वकील बनूं, जज बनूं परंतु हमारी बस्ती से एक गंदा नाला गुजरता है जिसमें अपराध के कीड़े बहते हैं। मेरी फिक्र छोड़िए, मुझे सजा दीजिए परंतु इन मासूम बच्चों को बचा लीजिए (अदालत की ऊपरी गैलरी में बच्चे भी बैठे हैं)।

6. आवारा 
(नायक राजकपूर आवारा हैं। नायिका के संरक्षक उसे पैसे देकर नायिका के जीवन से दूर जाने को कहते हैं। दर्शक जानते हैं कि फिल्म में वे पिता-पुत्र हैं।)
नायक- मैं अपने आपको गिरा हुआ, नीच और कमीना समझता था परंतु आप तो मेरे भी बाप निकले।

7. आवारा
नायक बचपन में ही अपनी बीमार और भूखी माँ के लिए रोटी चुराते हुए पकड़ा गया है। जेल में नायक को रोटी दी गई है।)
राजकपूर- यह कमबख़्त रोटी बाहर मिल जाती तो मैं बार-बार भीतर ( जेल) क्यों आता। (इसी संवाद से प्रेरित मनमोहन देसाई ने राजेश खन्ना के साथ रोटी फिल्म बनाई)

8. आवारा 
(जज रघुनाथ के संरक्षण में पली नरगिस भी वकील है। वो आवारा राजू से प्यार करती है जिस पर कत्ल का आरोप है।)
नरगिस- मेरा दिल कहता है कि राजू बेगुनाह है 
जज- दिल की बात अदालत नहीं मानती 
नरगिस- मेरे दिल की अदालत पर क़ानून नहीं चलता
(क्लाइमेक्स में नायक सज़ा सुनने के बाद)
राजू- जज रघुनाथ मेरा असली मुकदमा तो आपके दिल की अदालत में चल रहा है। मुझे फैसले का इंतज़ार है।
विज्ञापन
Best Evergreen Bollywood Movie Dialogues from 40s 50s and 60s Era of indian cinema
श्री 420 (1955) - फोटो : सोशल मीडिया
9. हमलोग
(दिया जल रहा है।)
बलराज साहनी का साथी- जिस दिए में तेल कम है वो कब तक चलेगा।
बलराज साहनी- जब तेल खत्म होगा तो सुबह हो जाएगी।

10. श्री 420 
(ईमानदार नायक की प्रेमिका का नाम विद्या है और उसे बेइमानी के रास्ते पर ले जाने वाली नादिरा का नाम माया है।)
सेठ सोनाचंद- राज अब तुम्हें विद्या की ज़रूरत नहीं माया की ज़रूरत है।

11. जागते रहो 
(गांव का सीधा-साधा आदमी प्यासा भटक रहा है और आधी रात को एक इमारत में पानी पीने जाता है। चोर समझ कर उसका पीछा किया जाता है। पूरी फिल्म में नायक खामोश है। अंत में वो पानी की टंकी पर चढ़कर एक संवाद बोलता है।)
राज- मैं गाँव का सीधा आदमी काम की तलाश में आपके शहर आया और आपने मुझे क्या सिखाया कि दूसरों की छाती पर पैर रखकर चल सको तो चलो।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed