भोजपुरी इंडस्ट्री का रुतबा अब पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। इस इंडस्ट्री के कई ऐसे सितारे हैं जिनके गानों को काफी पसंद किया जाता है और आज वे किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे भोजपुरी लोकगायक से मिलवाने जा रहे हैं, जो 102 की उम्र में भी गाने गा रहे हैं। उम्र के जिस पायदान पर आदमी शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, उस पड़ाव पर जंग बहादुर सिंह अपनी आवाज के जादू से देशभक्तों में जोश भर देते हैं।
Bhojpuri: मिलिए 102 वर्षीय भोजपुरी लोकगायक से, जो आज भी अपनी आवाज के जादू से भर देते हैं देशभक्तों में जोश
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बिना माइक के कोसों दूर तक जाती है आवाज
1920 में बिहार के सिवान में जन्मे जंग बहादुर सिंह को बचपन से ही गाने में रुचि थी। वह पश्चिम बंगाल के आसनसोल में सेनरेले साइकिल कारखाने में नौकरी किया करते थे। जंग बहादुर सिंह ने भोजपुरी की व्यास शैली में खूब गाने गाए हैं। उन्होंने झरिया, धनबाद, दुर्गापुर, रांची समेत अन्य क्षेत्रों में भी अपनी आवाज के जादू को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और देशभक्तों के लिए खूब गाने गाए थे। वह एक ऐसे गायक हैं, जिन्हें माइक की भी जरूरत नहीं होती और उनकी आवाज कोसों दूर तक चली जाती है।
कुश्ती में भी आजमाया था
जंग बहादुर सिंह ने किसी से भी गाने नहीं सीखा था। वह लोक गायक बनने से पहले पहलवान थे। उन्होंने बड़े-बड़े पहलवानों के साथ कुश्तियां भी लड़ीं। जब वह 22-23 साल के थे तो अपने छोटे भाई के पास झरिया, धनबाद गए थे। वहां उन्होंने कुश्ती के दंगल में बिहार का प्रतिनिधित्व किया और तीन कुंतल के बंगाल की ओर से लड़ने वाले पहलवान को हरा दिया। इसके बाद जंग बहादुर सिंह 'शेर-ए-बिहार' बन गए। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने गायकी की ओर रुख कर लिया। लोग उन्हें इतना पसंद करते थे कि किसी कार्यक्रम में भीड़ जुटानी हो तो आयोजक उनके पोस्टर चस्पा करा देते थे।
चार घंटे तक गा सकते हैं गाना
भोजपुरी में जंग बहादुर सिंह आजादी का संघर्ष से अब तक ढेरों देशभक्ति गीत गा चुके हैं। वह देशभक्तों में जोश जगाने के लिए घूम-घूमकर देशभक्ति के गीत गाते थे। वह कई बार पुलिस के आक्रोश का भी शिकार हुए, लेकिन उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। देश को आजादी मिलने के बाद भी उनका गाना गाने का सिलसिला जारी रहा और धीरे-धीरे वह लोक धुन पर देशभक्ति गीत गाने के लिए जाने जाने लगे। 60 के दशक में झारखंड, बंगाल और बिहार में उनका खूब नाम था। लेकिन आज जंग बहादुर की याददाश्त धूमिल पड़ रही है। उन्हें दिल की बीमारी के चलते डॉक्टर ने गाने से मना किया है, लेकिन आज भी वह चार घंटे तक लगातार गाना गा लेते हैं।