भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने सिनेमा जगत में अपने दम पर जगह बनाई है। लेकिन भोजपुरी सिनेमा का चमकता सितारा बनने से पहले खेसारी ने बेहद गरीबी का सामना भी किया है। उनकी हर फिल्म सुपरहिट मानी जाती है। लेकिन फिल्मों का ये बादशाद कभी दिल्ली के ओखला इलाके में लिट्टी चोखा बेचकर अपना गुजारा चलाता था। खेसारी ने लिट्टी-चोखा बेचने के साथ ही दूध बेचने तक का काम किया है। यहां तक की वह अपनी भैंसों का पेट भरने के लिए चोरी तक किया करते थे। खेसारी के पास कभी साइकिल खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन आज वह करोड़ो की संपत्ति के मालिक हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उनका असली नाम खेसारी नहीं है। बल्कि फिल्मों में आने के बाद उनका असली नाम गुमनाम हो गया और खेसारी लोगों की जबान पर चढ़ गया।
भोजपुरी: कभी सड़क पर लिट्टी चोखा बेचते थे खेसारी लाल, कहा- मेरा असली नाम मेरे मां-बाप भी भूल गए
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खेसारी का असली नाम
खेसारी लाल का असली नाम शत्रुघ्न है। इस नाम को लगभग कोई नहीं जानता। खेसारी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्हें 'खेसारी' नाम दुनिया ने दिया है। इससे बड़ी उनके लिए कोई कमाई नहीं है। यहां तक की मेरे मां बाप ने जो नाम दिया, उसे खुद वह भूल गए होंगे।
गरीबी के दिनों में हुई शादी
खेसारी लाल की शादी गरीबी के दिनों में ही गई थी। खेसारी की पत्नी उनके साथ दिल्ली में लिट्टी चोखा बेचती थीं। गरीबी का आलम ये था कि खेसारी की पत्नी चंदा ने एक ही साड़ी में कई महीने गुजार दिए थे।
छोड़ दी थी सरकारी नौकरी
लिट्टी चोखा बेचने के साथ ही खेसारी सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहे थे। उनका चयन बीएसएफ में हो गया। उनका मन नौकरी में नहीं लगा और वह नौकरी छोड़कर दिल्ली वापस आ गए। यहां आकर उन्होंने अपनी भोजपुरी एलबम निकाली। जिसके बाद खेसारी को उनकी पहली सफलता एल्बम 'माल भेटाई मेला' से मिली।
पहली फिल्म से ही बन गए सुपरस्टार
साल 2012 में भोजपुरी फिल्म 'साजन चले ससुराल' ने खेसारी लाल को रातों रात स्टार बना दिया। इसके बाद खेसारी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वह करोड़ो की संपत्ति के मालिक हैं।