कुदरत की नियामतों को पहचानना आसान नहीं है। खासतौर से जब बात बच्चों की हो। ऐस ही कुछ ‘खास’ बच्चों के बीच मंगलवार की सुबह सुबह पहुंचे अभिनेता अजय देवगन। मौका था मुंबई के 54 स्कूलों के करीब हजार बच्चों के समागम का। शहर के कोने कोने से जुटे इन दिव्यांग बच्चों का कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया जमनाबाई नरसी स्कूल के बच्चों ने। सबने मिलकर खेल खेले। जीत का जश्न मनाया। जो हारे उनको दिल से लगाया। और, इस सब के बीच एक खास लम्हा ऐसा भी आया जब अजय देवगन भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके।
Ajay Devgn: ‘खास’ बच्चों की लगन देख भावुक हुए अजय देवगन, जमनाबाई नरसी स्कूल में जुटे मुंबई के ‘स्पेशल’ नौनिहाल
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फिल्मी सितारों के बच्चों के लिए मशहूर स्कूल जमनबाई नरसी स्कूल के परिसर में ये अपनी तरह का 19वां आयोजन रहा। नरसी मोनजी एजूकेशनल ट्रस्ट की उर्वशी ठाकेर और जयराज ठाकेर साल 2002 से उन खास बच्चों के लिए ये आयोजन करते आ रहे हैं जिनमें से कोई देख नहीं सकता, कोई सुन नहीं सकता, किसी का शरीर कमजोर है तो कोई बौद्धिक रूप से दूसरे बच्चों से अलग पड़ गया। इन सारे बच्चों को एक साथ इकट्ठा करे और अपने स्कूल के सामान्य बच्चों के साथ उन्हें खेलने कूदने का मौका देकर इनकी हौसला अफजाई के इस प्रयास की मंगलवार के कार्यक्रम में पहुंचे अभिनेता अजय देवगन ने भी खूब तारीफ की।
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बच्चों से रूबरू होते हुए अजय देवगन इन चमत्कारिक बच्चों की खूब तारीफ की। वह कहते हैं, ‘इन बच्चों के इस खास दिन पर इनके बीच आना किसी आत्मावलोकन से कम नहीं है। ये दिन बच्चों की मेहनत और खेल के प्रति इनके प्रेम के साथ साथ इनके हौसले की भी गवाही देता है।’ कार्यक्रम के दौरान जब विक्टोरिया मेमोरियल स्कूल के बच्चों ने आंखों में रोशनी में न होने की परवाह न करते हुए मलखम्भ का प्रदर्शन किया तो पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। खेल के प्रति इन बच्चों की ये ललक देखकर अजय देवगन भी काफी भावुक दिखे।
इस मौके पर इस आयोजन की संस्थापक उर्वशी ठाकेर ने कहा कि उनका उद्देश्य शुरू से खास बच्चों के लिए खास मौके सृजित करने पर रहा है। साल 2002 में इसकी शुरुआत हुई थी। वह कहती हैं, ‘खास स्कूलों के इन दिव्यांग बच्चों के लिए खेलों के उल्लास की अनुभूति कराने का का अपना सपना पूरा होते मुझे बहुत खुशी होती है। मेरा ये सपना साल दर साल हकीकत में तब्दील होता जा रहा है। इन आयोजनों से हम जीवन के कुछ ऐसे सबक सीखते हैं जो हमें जीवन जीने का एक नजरिया देते हैं।’
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नरसी मोनसी एजूकेशनल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी जयराज ठाकेर भी इस मौके पर काफी भावुक दिखे। वह कहते हैं, ‘इसे हम अपना सौभाग्य ही समझते हैं कि इन खास बच्चों के जीवन में खुशी के खुशी के पल लाने के इस आयोजन से जुड़ने का हमें मौका मिला। ये सालाना खेल उत्सव हमारे लिए बहुत मायने रखता है। हर साल हम इस दौरान अपने खुद के भीतर झांककर देखते हैं और ये जानने की कोशिश करते हैं कि इन खास बच्चों की और कौन कौन सी जरूरतों हम पूरा कर सकते हैं और कैसे इनका दिन सुगम बना सकते हैं।’