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Bhupen Hazarika: महज 12 साल की उम्र में लिख दिए थे दो फिल्मों के गाने, मां से मिली थी गाने की प्रेरणा

Sat, 05 Nov 2022 07:57 AM IST
शशि सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Sat, 05 Nov 2022 07:57 AM IST
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Bhupen Hazarika death Anniversary know more about Legendary Singer Composer life and unknown facts
भूपेन हजारिका - फोटो : सोशल मीडिया

भूपेन हजारिका असमी से लेकर हिंदी सिनेमा की म्यूजिक इंडस्ट्री के एक ऐसे दिग्गज थे, जिन्होंने न केवल सैकड़ों फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया था साथ ही साथ ना जाने कितने गानों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। संगीत की दुनिया में अपने अद्भुत योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा गया था। 5 नवंबर 2011 को संगीत जगत ने अपने इस अनमोल रत्न को खो दिया, लेकिन अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से आज भी वह लोगों के दिलों में जिंदा हैं। जानते हैं भूपेन हजारिका के जीवन और संगीत में उनके योगदान के बारे में कुछ खास बातें।

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भूपेन हजारिका

मां से मिली गाने की प्रेरणा
असम में जन्में भूपेन अपने दस भाई बहनों में सबसे बड़े थे। संगीत में अपना बेहतरीन योगदान देने वाले भूपेन हजारिका को गाने की प्रेरणा उनकी मां से मिली थी और शायद यही वजह रही कि उन्होंने महज 10 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत कर दी थी, उस समय वह असमिया भाषा में गाने गाया करते थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी भूपने हजारिका ने सिर्फ 12 साल की उम्र में ही दो फिल्मों के लिए गाने लिख दिए थे और साथ ही रिकॉर्ड भी किया था। वह दोनों गाने दो फिल्मों- इंद्रमालती: काक्सोट कोलोसी लोई और बिसवो बिजोई नौजवान में फिल्माए गए थे।
 

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भूपेन हजारिका - फोटो : social media

भूपेंन हजारिका ने वर्ष 1942 में इंटर तक की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से की। इसके बाद 1952 में कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री ली थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद भूपेन हजारिका ने गुवाहाटी में ऑल इंडिया रेडियो में गाना शुरु किया था। भूपेन हजारिका ने अपने करियर में न सिर्फ गानों को अपनी आवाज दी बल्कि तकरीबन एक हजार गाने और 15 किताबें भी लिखीं।

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भूपेन हजारिका - फोटो : सोशल मीडिया

भूपेन हजारिका को कई भाषाओं का ज्ञान था वह बंगाली गानों को हिंदी में अनुवाद करके अपनी आवाज देते थे। पहली पत्नी से अलग हो जाने के बाद भूपेन हजारिका ने संगीत को अपना साथी बना लिया। उन्होंने 'मिल गई मंजिल मुझे','रुदाली','साज','दरमियां', 'गाजगामिनी' जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत दिए।

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भूपेन हजारिका - फोटो : social media

इन पुरस्कारों से थे सम्मानित
संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भूपेन हजारिका को 1975 में राष्ट्रीय पुरस्कार, 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के अवार्ड दिया गया। इसके अलावा वह असोम रत्न और पद्म भूषण से भी सम्मानित थे। मरणोपरांत सरकार के द्वारा भूपेन हजारिका को साल 2019 में भारत रत्न से भी नवाजा गया था।

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