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Bioscope S2: ये है बिना इंटरवल वाली हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म, सिर्फ सात दिन में लिखी गई पटकथा

Sun, 10 Oct 2021 05:27 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sun, 10 Oct 2021 05:27 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Ittfeaq Rajesh Khanna Yash Chopra Nanda Akhtar Ul Iman Salil Chowdhury
इत्तेफाक - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

क्या आपको पता है उस हिंदी फिल्म के बारे में जिसमें पहली बार कोई इंटरवल ही नहीं था? ये फिल्म थी यश चोपड़ा की अपने भाई बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा की कंपनी बी आर फिल्म्स के लिए बनाई गई आखिरी फिल्म ‘इत्तेफाक’, इसी फिल्म के बाद यश चोपड़ा ने अपनी खुद की कंपनी यशराज फिल्म्स की नींव डाली। ‘इत्तेफाक’ के ही हीरो राजेश खन्ना के साथ यश चोपड़ा ने अपनी कंपनी की पहली फिल्म ‘दाग’ बनाई थी। फिल्म ‘इत्तेफाक’ की रीमेक भी चोपड़ा परिवार तीन साल पहले बना चुका है। फिल्म ‘इत्तेफाक’ की रीमेक बनाने वाले अभय चोपड़ा के पिता रवि चोपड़ा फिल्म ‘इत्तेफाक’ में अपने चाचा यश चोपड़ा के सहायक थे। यश चोपड़ा के दूसरे सहायकों में आर के सिब्बल, महेन वकील, वासुदेव धीर, अरविंद जोशी और रमेश तलवार के नाम शामिल रहे। महेन वकील बाद में यशराज फिल्म्स के पहले कर्मचारी भी बने। सागर सरहदी यानी गंगा सागर तलवार के भतीजे रमेश तलवार का करियर भी इसी फिल्म से शुरू हुआ।

Bioscope with Pankaj Shukla Ittfeaq Rajesh Khanna Yash Chopra Nanda Akhtar Ul Iman Salil Chowdhury
इत्तेफाक - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सिर्फ एक हफ्ते में तैयार हो गई पटकथा

फिल्म ‘इत्तेफाक’ संयोग से बनी एक फिल्म है। फिल्म में कोई इंटरवल नहीं है। फिल्म की कुल अवधि ही एक घंटा 41 मिनट है।  ये उन दिनों की बात है जब यश चोपड़ा बी आर फिल्म के लिए ‘आदमी और इंसान’ बना रहे थे। फिल्म में धर्मेंद्र, फिरोज खान, सायरा बानो और मुमताज जैसे बड़े कलाकार थे। फिल्म की पूरी यूनिट बी आर फिल्म्स के अपने नियमित कर्मचारियों की थी और इसकी शूटिंग बहुत बड़े पैमाने पर चल रही थी कि अचानक सायरा बानो की तबीयत खराब हो गई। अभिनेताओं को तो खैर किसी तरह राजी किया गया तारीखें बदलने के लिए लेकिन तकनीशियन तो खाली बैठ गए। इस पर चोपड़ा बंधुओं को एक फिल्म तुरत फुरत बनाने का आइडिया सूझा जिसे सिनेमा की भाषा में ‘क्विकी’ कहते हैं। फिल्म के लिए कहानी की तलाश चल ही रही थी कि थिएटर देखने के शौकीन यश चोपड़ा ने एक दिन एक गुजराती नाटक देख लिया, ‘धुम्मस’। नाटक यश चोपड़ा को बहुत अच्छा लगा। वह बीआर फिल्म्स के पूरे स्टोरी डिपार्टमेंट को लेकर अगले दिन ये नाटक देखने फिर पहुंच गए। सबको कहानी पसंद आई। पता ये भी चला कि ये नाटक एक अंग्रेजी फिल्म ‘साइनपोस्ट टू मर्डर’ पर आधारित है। यश चोपड़ा तब तक इस नाटक पर फिल्म बनाने का मन बना चुके थे। पूरे स्टोरी डिपार्टमेंट ने बैठकर हफ्ते भर में फिल्म की पटकथा लिख डाली। अख्तर उल इमान को स्क्रिप्ट मिली तो उन्होंने फटाफट इसके डॉयलॉग लिख डाले और यश चोपड़ा ने ये पूरी फिल्म सिर्फ 28 दिन में शूट कर डाली।

Bioscope with Pankaj Shukla Ittfeaq Rajesh Khanna Yash Chopra Nanda Akhtar Ul Iman Salil Chowdhury
इत्तेफाक - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

राजेश खन्ना का हिट की हैट्रिक

लेकिन, फिल्म ‘इत्तेफाक’ की मेकिंग इतनी आसान भी नहीं रही, जितनी लिखने या पढ़ने में लगती है। कहानी के नायक दिलीप रॉय का रोल राजेश खन्ना तक पहुंचने से पहले तमाम दूसरे कलाकारों के आगे से होकर गुजरा। फिल्म की पटकथा जैसे ही बनकर तैयार हुई, यश चोपड़ा इसे लेकर सबसे पहले राजकुमार के पास गए। राजकुमार के साथ यश चोपड़ा ने सुपर हिट फिल्म ‘कानून’ बनाई थी। गाने ‘कानून’ में भी नहीं थे और गाने फिल्म ‘इत्तेफाक’ में भी नहीं है। हीरोइन के लिए ‘कानून’ में काम कर चुकीं नंदा ही यश चोपड़ा के जेहन में थीं। उन्हें एक ऐसी अभिनेत्री चाहिए थी जिस पर आखिर तक किसी दर्शक का शक़ ही न जाए। लेकिन, हीरो को लेकर लोचा हो गया जब राजकुमार ने ये किरदार करने से मना कर दिया। संजय खान से भी बात हुई। उनको कहानी पसंद भी आई। लेकिन बताते हैं जितना पैसा संजय खान ने इस फिल्म के लिए मांगा, वह फिल्म के बजट के हिसाब से ज्यादा था। फिर यश चोपड़ा का ध्यान गया एक नए कलाकार पर, नाम - शत्रुघ्न सिन्हा। शत्रुघ्न ने इस फिल्म में इंस्पेक्टर दीवान वाले किरदार के लिए ऑडीशन दिया था। लेकिन, इसी बीच ये कहानी राजेश खन्ना के पास पहुंच गई। राजेश खन्ना की तब तक दो तीन फिल्में रिलीज हो चुकी थीं और चार पांच फिल्में फ्लोर पर थीं। राजेश खन्ना को सब रोमांटिक हीरो वाले रोल ही दे रहे थे ऐसे में जब उन्हें ये मानसिक रूप से व्यथित कलाकार का किरदार मिला तो उन्होंने इसे तुरंत लपक लिया। यश चोपड़ा की तो जैसे मुंहमागी मुराद पूरी हो गई। राजेश खन्ना ने ये भी वादा कर दिया कि वह इस बारे में पैसे की बात नहीं करेंगे और जो भी फिल्म का बजट होगा उसके हिसाब से ही पैसे ले लेंगे। फिल्म ‘इत्तेफाक’ 1969 में ‘बंधन’ और ‘आराधना’ के बाद रिलीज हुई और राजेश खन्ना की हिट फिल्मों की पहली हैट्रिक की तीसरी फिल्म बनी।

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इत्तेफाक - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

आखिरी सीन तक कायम सस्पेंस

फिल्म ‘इत्तेफाक’ की अधिकतर कहानी पूरी एक रात में घटती है। शहर के प्रसिद्ध चित्रकार दिलीप को पुलिस अपनी ही पत्नी की हत्या करने के आऱोप में गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस को लगता है कि दिलीप की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तो उसे इलाज के लिए भेज दिया जाता है। वहां से भाग निकला दिलीप एक ऐसे घर में छुप जाता है, जहां एक विवाहिता अकेले है। दोनों के बीच चूहे बिल्ली का खेल चलता है। और, इस बीच इस घर में एक और लाश सामने आती है। घर की मालकिन का घर में घुसे कथित हत्यारे के प्रति भाव बदलता है और खेल दूसरे पाले में खेला जाने लगता है। यह सब प्रेम प्रकटन इसलिए था क्योंकि घर की मालकिन ने पुलिस को चुपके से फोन कर दिया है। पुलिस आती है तो लाश भी मिलती है और इस चित्रकार पर दूसरी हत्या का आरोप भी आ जाता है। ये पेंच कैसे सुलझता है, कैसे असली हत्यारा सामने आता है और कैसे आखिर तक ये फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है, ये देखने वाली बात है। फिल्म में अगर कुछ खटकने वाली बात है तो वो ये कि किसी की मानसिक हालत की तमाम वजहें अब समझी जाती हैं, किसी को पागल कह देना अब इतना आसान नहीं रहा। मानसिक बीमारी का भी अब इलाज होता है और ऐसे लोगों के साथ इस फिल्म जैसा व्यहार भी अब नहीं होता। लेकिन, ध्यान यहां ये भी रखना है कि ये फिल्म पचास साल पहले बनी है और तब के लेखक वही लिखा करते होंगे, जो उस वक्त का चिकित्सा शास्त्र उन्हें समझाता होगा।

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इत्तेफाक - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

राजेश खन्ना के हौसले की कहानी

फिल्म ‘इत्तेफाक’ पूरी तरह पटकथा पर टिकी फिल्म है। फिल्म का अधिकतर हिस्सा जिस घर में शूट किया गया है, उसे बनाया भी किसी नाटक के मंच की तरह ही है। सेट के हिस्से अलग अलग हो जाते होंगे तभी यश चोपड़ा के सबसे भरोसेमंद सिनेमैटोग्राफर के जी इतने प्रयोगात्मक फ्रेम इस फिल्म में बना पाए। फिल्म का कला निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी अव्वल नंबर है और उतना ही अव्वल नंबर है यश चोपड़ा का निर्दशन। फिल्म में प्रकाश और छाया के मिलन के यश चोपड़ा ने कुछ अद्भुत प्रयोग इस फिल्म में किए हैं। छाया से दीवार पर उभारी गई अदालत की प्रतिकृति यश चोपड़ा के निर्देशकीय कौशल की शुरूआती बानगी है। फिल्म ‘इत्तेफाक’ में राजेश खन्ना ने अपनी अभिनय यात्रा को एक नया मोड़ दिया। ये प्रयोगात्मक सिनेमा आज के दौर में आयुष्मान खुराना करें तो लोग उनके हौसले की दाद देते हैं। राजेश खन्ना ने ये हिम्मत और हौसला 52 साल पहले तब दिखाया जब हिंदी सिनेमा के हीरो ऐसा कुछ करने की सपने में भी नहीं सोचते थे। हालांकि, राजेश खन्ना का अभिनय बाद की फिल्मों में इस फिल्म से कई दर्जे बेहतर हुआ है लेकिन ऑल इंडिया कंपटीशन जीतकर हीरो बने पंजाब के जतिन खन्ना का राजेश खन्ना बनकर ऐसा कुछ कर पाना भी इतिहास का हिस्सा ही है। फिल्म की नायिका बनीं नंदा का नाम फिल्म का कास्टिंग में राजेश खन्ना से पहले आता है और अभिनय भी उनका यहां अव्वल नंबर है।

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