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Bioscope S2: ‘परिंदा’ के संवाद लेखक ने सुनाई नाइंसाफी की कहानी, कल्ट फिल्म के माथे लगा ये कलंक

Fri, 05 Nov 2021 01:36 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 05 Nov 2021 01:36 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Parinda Vidhu Vinod Chopra Anil Kapoor Jackie Shroff Nana Patekar
फिल्म ‘परिंदा’ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘परिंदा’ एक ऐसी फिल्म है जिसे बनाने में आई दिक्कतों की कहानियों पर एक हिंदी फिल्म अलग से तैयार हो सकती है। जैसा कि फिल्म के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन कहते हैं कि विधु के पसंदीदा निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कोपोला रहे हैं तो उनकी तरह का ही नाम रखने को विधु ने भी अपने नाम को विस्तार दे दिया और बन गए विधु चोपड़ा से विधु विनोद चोपड़ा। बाद में उनके असिस्टेंट रहे संजय भंसाली भी संजय लीला भंसाली बने। संजय ने फिल्म ‘परिंदा’ के गानों की शूटिंग में विधु की बहुत मदद की थी। फिल्म ‘परिंदा’ के प्रीमियर शो के लिए विधु ने जब कश्मीर में रह रही अपनी मां से मुंबई आने की बात की तो उनके मुताबिक मां को यकीन भी नहीं था कि उनका बेटा हवाई जहाज की टिकट के लायक पैसे जुटा पाएगा। विधु ये बात इस बात के साथ जोड़कर बताते हैं कि मां इस फिल्म के लिए आईं तो वापस कश्मीर नहीं जा पाईं क्योंकि फिर वहां दंगे फसाद शुरू हो गए। विधु को मुंबई में कभी फाकाकशी के दिन गुजारने पड़े हों या फिर कि वह इंडस्ट्री में बिल्कुल नए थे, ऐसा भी नहीं था। मशहूर निर्माता निर्देशक रामानंद सागर उनके बड़े भाई थे और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाने में शुरू के दिनों में मदद भी काफी की। दोनों के पिता एक थे, लेकिन माएं अलग अलग।

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नाना पाटेकर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

एक लेखक की मेहनत का ‘परिंदा’

फिल्म ‘परिंदा’ के निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा ने अपने इंटरव्यू में अक्सर यही दावा किया है कि नाना पाटेकर का फिल्म के लिए चुनाव उन्होंने दादर के एक नाट्यगृह में उनका नाटक ‘पुरुष’ देखने के बाद किया था। वह यह भी कहते हैं कि तब नाना को फिल्मों में कोई नहीं जानता था हालांकि रंगमंच में उनका बड़ा नाम हो चुका था। लेकिन, फिल्म के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन के मुताबिक इस किरदार की परदे पर इस तरह अवतरित होने के पीछे की कहानी कुछ और ही है। इम्तियाज कहते हैं, “हिंदी सिनेमा में अभिनेता हों या निर्देशक, लेखकों के नामों का जिक्र बहुत कम करते हैं। मुझे अन्ना के किरदार की लाइनें तक अब तक याद हैं। ‘ना भाई ना बहन ना बेटा, धंधे के मामले में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसा का बेटा नहीं। करन को चुप रहना होगा या जाना होगा। उसको अपनी बोट पे ले जा, समझा, नहीं समझे तो गोली मार दे।’, ये अन्ना के किरदार का असली खाका है। ये संवाद मुझे इतने साल बाद अब भी याद है तो इसलिए क्योंकि मैंने अन्ना को गढ़ा है, क्रिएट किया है।” वह ये भी बताते हैं कि नाना पाटेकर इस फिल्म में कैसे आए।

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फिल्म ‘परिंदा’ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

नाना की किस्मत बदल देने वाला ‘परिंदा’

चर्चित हॉलीवुड फिल्म ‘ऑन द वाटरफ्रंट’ से प्रेरित फिल्म ‘परिंदा’ की कहानी वैसी है जैसी अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की फिल्म ‘दीवार’ की या फिर आमिर खान और रजित कपूर की फिल्म ‘गुलाम’ की। ‘परिंदा’ में दो भाई करन और किशन हैं। दोनों अनाथ। मुंबई की सड़कों पर पले बढ़े। छोटे भाई को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए किशन अपराध के दलदल में उतर जाता है औऱ अन्ना सेठ के लिए काम करता है। करन का दोस्त प्रकाश पुलिस अफसर है और अन्ना के गैरकानूनी धंधों की जानकारी रखता है। प्रकाश का कत्ल दोनों भाइयों के बीच टकराव की पहली कड़ी बनता है। फिल्म की कहानी में इसके बाद तमाम दांव पेंच हैं। कहानी अपराध और अपराधी में किससे बचें, किसे बचाएं का तार पकड़कर बहुत ही संतुलन के साथ आगे बढ़ती जाती है। कहानी में करन और पारो की मोहब्बत है। करन और किशन के बीच के झंझावात हैं। बड़े भाई की लाचारी है। छोटे भाई का गुस्सा है। और, इन सबके बीच जरायम की आग पर पकती रहती है अन्ना की हांडी। सीनों में दहकती आग फिल्म के क्लाइमेक्स में बाहर आती है और सब कुछ जलाकर खाक कर देती है। अपराधी को भी और अपराध की दुनिया को भी। फिल्म ने हिंदी सिनेमा में अपराध आधारित सिनेमा को एक नई शक्ल देने में मदद की। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। भारत की तरफ से नामित होकर ऑस्कर तक भी गई। फिल्म को कामयाबी दिलाने में नाना पाटेकर के किरदार का खासा योगदान रहा।

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Bioscope with Pankaj Shukla Parinda Vidhu Vinod Chopra Anil Kapoor Jackie Shroff Nana Patekar
फिल्म ‘परिंदा’ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

नाना से पहले नसीर को मिली ‘परिंदा’

फिल्म ‘परिंदा’ के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन के मुताबिक फिल्म में विलेन के किरदार का नाम पहले पाट्या था जो उस समय के एक बड़े डॉन यूसुफ पटेल के नाम पर रखा गया। इम्तियाज बताते हैं, “जब मैं इस फिल्म का हिस्सा बना तो मुझे फिल्म की पटकथा का 16वां ड्राफ्ट मिला था। फिल्म में विलेन का नाम था पाट्या और इसे परेश रावल करने वाले थे। ये रोल नाना के पास कैसे गया इसका भी दिलचस्प किस्सा है। दो भाइयों की इस कहानी में बड़े भाई किशन का रोल सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह को करना था। उनको मैंने विधु के घर पर कहानी सुनाई। विधु नहाने जा रहे थे और मुझे बोलकर गए कि इनको पूरी कहानी मत सुनाना बस इंटरवल तक ही सुनाना, लेकिन एक लेखक के तौर पर मैंने ईमानदारी दिखाते हुए नसीर को पूरी कहानी सुना दी। तो नसीर बोले जब छोटे भाई का मर्डर हो जाएगा तो उसके बाद हॉल में कौन रुकेगा। और, ये कहकर उन्होंने फिल्म छोड़ दी।”

 

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फिल्म ‘परिंदा’ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

नसीर के बाद अमिताभ तक पहुंची ‘परिंदा’

नसीर के बाद परिंदा में किशन का ये रोल अमिताभ बच्चन को भी सुनाया गया और फिर नाना पाटेकर ये किरदार करने को तैयार हो गए। इम्तियाज बताते हैं, “अनिल कपूर को तब लगा कि अगर नाना पाटेकर ये रोल करते हैं तो उनका रोल कमजोर हो जाएगा। अनिल के कहने पर हम जैकी श्रॉफ से मिले और जैकी ने कहानी सुनते ही बोल दिया, ‘”ठीक है बिड़ू, मैं करेगा ये फिल्म।’ फिल्म में जैकी श्रॉफ का एक सीन है जिसमें वह फूटफूट कर रोते हैं। इस सीन में किशन अपने गांव में बसने के सपने करन को समझा रहा है। ये जैकी श्रॉफ के करियर का सबसे लंबा अनकट सीन है, जिसे करने के लिए मैंने जैकी को कई कई दिन रात जागकर रिहर्सल कराई थी।”

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