Bioscope S2: बिग बी की फिल्मों में रेखा की डबिंग वाली ये है पहली फिल्म, रिलीज के 40 साल पूरे
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अमजद खान के करियर का टर्निंग प्वाइंट
ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में बिजनौर, उत्तर प्रदेश से पहुंचे 29 साल के एक लड़के ने हंगामा मचा रखा था। इसकी पहली ही फिल्म थी शशि कपूर, अमिता और जॉनी वॉकर के साथ बनी ‘हसीना मान जाएगी’। दूसरी फिल्म संजय खान और मुमताज के साथ ‘मेला’ भी सुपरहिट रही और तीसरी फिल्म ‘समाधि’ में धर्मेंद्र, आशा पारेख और जया भादुड़ी को लेकर प्रकाश मेहरा नाम के इस युवा निर्देशक ने कामयाबी की हैट्रिक बना दी। ‘समाधि’ के बाद प्रकाश मेहरा ने सुनील दत्त और राखी को लेकर जो फिल्म ‘आन बान’ बनाई, उसमें राकेश कुमार का काम बतौर सहायक चर्चा में आया। बाद मे राकेश ने प्रकाश मेहरा की तमाम फिल्मों में उनके सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। राकेश कुमार की दोस्ती इसी दौरान अमिताभ बच्चन से काफी अच्छी हो गई। ‘याराना’ से पहले दोनों तीन फिल्में साथ में कर चुके थे और जब ‘याराना’ बनाने के लिए इसके निर्माता एम ए नाडियाडवाला ने उनके संपर्क किया तो राकेश के जेहन में पहला नाम अमिताभ बच्चन का ही आया। अमिताभ बच्चन की तब तक ‘शोले’ समेत तमाम फिल्मों में अमजद खान बहुत ही क्रूर और खूंखार विलेन का रोल कर चुके थे। राकेश कुमार ने ‘याराना’ में अमजद खान को पहली बार एक दोस्त के रूप में और भले इंसान के रूप में पेश करने का फैसला किया।
अमिताभ की तारीखों पर अटका मामला
फिल्म ‘याराना’ की राइटिंग टीम अपना काम शुरू कर चुकी थी। राजेश खन्ना की फिल्म ‘आविष्कार’ से शुरू करके अनिल कपूर की फिल्म ‘बेटा’ तक करीब 20 फिल्में लिखने वाले राइटर ज्ञानदेव अग्निहोत्री ने फिल्म ‘याराना’ की कहानी लिखी। अभिनेता अपूर्व अग्निहोत्री इनके ही बेटे हैं। राकेश कुमार की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘खून पसीना’ में उनके मुख्य सहायक रहे विजय कौल तब तक प्रकाश मेहरा की हिट फिल्मों ‘हेराफेरी’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की पटकथा लिख चुके थे। राकेश ने अपने इस दोस्त को फिल्म ‘याराना’ में फिर साथ लिया। सबने मिलकर एक ठीक ठाक सी कहानी और पटकथा लिख ली। कादर खान भी तब तक अमिताभ बच्चन को अमित कहकर ही बुलाते थे और अमिताभ बच्चन की फिल्मों में संवाद लेखक के तौर पर नियमित काम करते रहते थे। फिल्म ‘याराना’ में एक खास किरदार निभाने के साथ साथ कादर खान ने ‘याराना’ के संवाद भी लिखे। अब जब कहानी वगैरह सब तैयार हो गई और हीरोइन के तौर पर नीतू सिह भी आ गई तो मामला अमिताभ बच्चन की तारीखों पर अटक गया।
घंटा घंटा जोड़कर यूं बनी फिल्म
राकेश कुमार की अमिताभ बच्चन से दोस्ती इतनी गहरी थी कि वह उनकी तमाम निजी चीजें भी देख लिया करते थे। ऐसे में ही एक दिन राकेश कुमार उनके दफ्तर में बैठे बैठे डेट डायरी देखने लगे। उन्होंने नोट किया अमिताभ शिफ्ट में काम कर रहे हैं और लगातार काम कर रहे हैं। फिल्मों की शूटिंग की पहली शिफ्ट तब भी और अब भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सुबह सात बजे शुरू होती है। तो राकेश कुमार ने अमिताभ से रीक्वेस्ट की कि अगर वह अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए तैयार होकर निकलने के बाद अपनी लोकेशन पर पहुंचने से पहले एक एक घंटा भी रोज उनको देते रहें तो वह फिल्म बना सकते हैं। बीच में जो ब्रेक अमिताभ को मिलते थे, उनका इस्तेमाल भी फिल्म याराना को बनाने में किया गया। तारीखों के बीच तारीख निकालने का ये प्रयोग हिंदी सिनेमा में अपनी तरह का अनोखा बताया जाता है।
मोबाइल से पहले के दौर की मोहब्बत
फिल्म ‘याराना’ की हीरोइन नीतू सिंह का किस्सा भी इस फिल्म का कम अजीब नहीं है। फिल्म ‘याराना’ का मुहूर्त 1 जुलाई 1977 को हुआ और फिल्म रिलीज हुई 23 अक्टूबर 1981 को। ये उन दिनों की बात है जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह का रोमांस अपनी बुलंदियों पर था और दोनों खुल्लम खुल्ला प्यार भी कर रहे थे। फिल्म ‘याराना’ की शूटिंग के दौरान नीतू सिंह को फिल्म के एक गाने की शूटिंग के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) जाना पड़ा। वहां के नेताजी सुभाष इनडोर स्टेडियम में फिल्म के गाने की शूटिंग थी और नीतू सिंह को ऋषि कपूर की बहुत याद आ रही थी। फोन मिल नहीं रहा था और उनका काम में मन नहीं लग रहा था। अमिताभ बच्चन ने ये देखा तो उन्होंने नीतू के रोने की वजह पूछी और मामला पता चलने पर उन्होंने तुरंत नीतू को अगली ही फ्लाइट से बंबई (अब मुंबई) भेजने का इंतजाम कर दिया और कहा कि वह बिना हीरोइन के ही ये गाना मैनेज कर लेंगे।