अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘सूर्यवंशम’ हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है। बाइस्कोप में हम आपको उसी दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में बताते हैं लेकिन ‘सूर्यवंशम’ के बारे में बात करते समय लगता है कि ये फिल्म तो कभी पुरानी हुई ही नहीं और शायद कभी होगी भी नहीं। 1997 में पहली बार तमिल में बनी इस कहानी में शरत कुमार ने लीड रोल किया, तेलुगू में 1998 में यही रोल वेंकटेश के पास आया और 1999 में अमिताभ बच्चन ने वही किरदार करके इस कहानी को अमर कर दिया। हालांकि, इसके अगले ही साल ये कहानी कन्नड़ में भी इसी नाम से बनी जिसमें विष्णुवर्धन ने लीड रोल किया और फिर इसके पांच साल बाद रवि किशन ने भी इसे भोजपुरी में बनाने की कोशिश की फिल्म ‘दूल्हा मिलल दिलदार’ में।
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बिग बी की अंतिम रेखा
फिल्म ‘सूर्यवंशम’ को सेट मैक्स चैनल ने इतनी बार दिखाया है कि देश का बच्चा बच्चा इस फिल्म को जानता है, पहचानता है। इस फिल्म के बारे में बने मीम्स ने डिजिटल दुनिया में एक रिकॉर्ड बनाया है। ऐसे मीम्स को ट्रैक करने वालों की मानें तो किसी भी हिंदी फिल्म पर इतने मीम्स नहीं बने। इस फिल्म की लीड हीरोइन सौंदर्या ने बाद में बीजेपी ज्वाइन कर ली थी और चुनाव प्रचार के दौरान हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी जान चली गई थी। फिल्म में उनके किरदार की डबिंग रेखा ने की थी। वैसे तो अमिताभ बच्चन और रेखा की साथ साथ बनी आखिरी फिल्म ‘सिलसिला’ मानी जाती है, लेकिन परदे पर लिखे नामों के हिसाब से देखें तो ‘सूर्यवंशम’ आखिरी फिल्म है जिसमें दोनों के नाम आप क्रेडिट्स में पा सकते हैं।
फिर कभी अमिताभ नहीं बने हीरो
अमिताभ बच्चन के हीरो के रोल से मोह तोड़ने का काम उनके करियर में ‘सूर्यवंशम’ ने ही किया। एक युवा अभिनेत्री के सामने खुद को एक युवा के किरदार में पेश करने के चक्कर में अमिताभ बच्चन को दर्शकों से इतना कुछ सुनने को मिला कि उन्होंने आगे का करियर ठाकुर भानुप्रताप सिंह वाले गेटअप में ही जीने का फैसला कर लिया और हीरा ठाकुर वाली शख्सीयत उनके जीवन से हमेशा हमेशा के लिए विदा हो गई। 1999 में अमिताभ बच्चन की चार बड़ी फिल्में ‘सूर्यवंशम’, ‘लाल बादशाह’, ‘हिंदुस्तान की कसम’ और ‘कोहराम’ रिलीज हुईं। चारों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं।
निर्देशक ने फिर नहीं बनाई हिंदी फिल्म
फिल्म ‘कोहराम’ के निर्देशक थे मेहुल कुमार और साल 1999 उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा। इसके बाद उनका करिश्मा लगातार कम ही होता गया। ‘कोहराम’ से ठीक पहले उन्होंने अमिताभ बच्चन को लेकर ‘मृत्युदाता’ बनाई थी और वह भी फ्लॉप रही। ‘लाल बादशाह’ ने इसके निर्देशक के सी बोकाडिया के पैकअप का एलान किया। वह सक्रिय तो फिल्म इंडस्ट्री में और आठ दस साल रहे लेकिन ‘लाल बादशाह’ के फ्लॉप होने के ठप्पे ने बोकाडिया को भीतर से तोड़ दिया। ‘हिंदुस्तान की कसम’ फिल्म से मशहूर स्टंट निर्देशक वीरू देवगन फिल्म निर्देशक बने थे। फिल्म में अजय देवगन भी थे, लेकिन फिल्म नहीं चली। वीरू देवगन ने इसके बाद दूसरी कोई फिल्म निर्देशित भी नहीं की। ‘सूर्यवंशम’ के निर्देशक ई वी वी सत्यनारायण तेलुगू सिनेमा के मशहूर निर्देशक रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी इस फिल्म के बाद दूसरी कोई हिंदी फिल्म निर्देशित करने की हिम्मत नहीं दिखाई।
लड़का तो हीरा है..!
फिल्म ‘सूर्यवंशम’ की कहानी एक ठाकुर परिवार की कहानी है जिसका मुखिया भानु प्रताप सिंह अपने तीन बेटों और एक बेटी के साथ इलाके का भी मुखिया बनकर रह रहा है। भानु प्रताप के दो बेटे तो पढ़ लिखकर कुछ बन गए। लेकिन तीसरा बेटा हीरा ठाकुर शुरू से नटखट रहा है। स्कूल के दिनों में जिस लड़की से प्रेम किया, वह उसे पगलैट समझकर छोड़ गई। घर में वह सारा काम नौकरों वाला करता है। बाप उसे झिड़कने के जैसे मौके ढूंढता रहता है। राधा उसकी जिंदगी में नई रोशनी बनकर आती है। खुद आईएएस बनती हैं और हीरा को बड़ा कारोबारी बनने में मदद करती है। दोनों का बेटा अपने बाबा से मिलने जुलने लगता है। वह बाप बेटे के बीच की दीवार करीब करीब गिरा भी देता है कि भानु प्रताप के खाने में मौजूद जहर के चलते वह मृत्युशय्या पर पहुंच जाता है।