फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी के बेटे सैफ अली खान ने हिंदी सिनेमा में ‘सेफ’ रहने के लिए इन दिनों विलेन का चोला पहनने का फैसला किया है। अजय देवगन की फिल्म ‘तानाजी द अनसंग वॉरियर’ में लोगों को उनकी खलनायिकी पसंद भी आई। और, अब वह इसी फिल्म के निर्देशक ओम राउत की अगली फिल्म में बनने जा रहे हैं रावण। सैफ अली खान का करियर हिंदी सिनेमा में हमेशा दो कदम आगे और चार कदम पीछे ही चलता रहा। ‘तानाजी’ की रिलीज से पहले उनकी फिल्म ‘रेस 2’ के बाद लाइन से एक दर्जन फिल्में फ्लॉप हुईं लेकिन सही समय पर लिए गए एक सही फैसले ने सैफ अली खान का करियर फिल्म ‘तानाजी’ में बचा लिया। सैफ अली खान की डेब्यू फिल्म ‘परंपरा’ यश चोपड़ा ने निर्देशित की थी। शर्मिला टैगोर को लगा था कि उनके करियर को फिल्म ‘दाग़’ से बुलंदियों पर पहुंचाने वाले निर्देशक के हाथों में उनका शादीशुदा बेटा ‘सेफ’ रहेगा लेकिन फिल्म सुपरफ्लॉप रही। सैफ अली खान के करियर की पहली हिट फिल्म रही ‘ये दिल्लगी’ जिसे यश चोपड़ा के सहायक और तमाम हिट फिल्मों के एडिटर नरेश मल्होत्रा ने निर्देशित किया।
Bioscope S2: पहली ही फिल्म से निकाले गए सैफ का इस निर्देशक ने बचाया करियर, पब्लिक ने गाया ‘ओले ओले’
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पहली ही फिल्म से निकाले गए
फिल्म ‘ये दिल्लगी’ संयोग से बनी फिल्म है। अगर संयोग नहीं होता तो नरेश मल्होत्रा का बतौर डायरेक्टर डेब्यू फिल्म ‘डर’ से हुआ होता। फिल्म ‘डर’ का साराम काम नरेश मल्होत्रा और उनकी टीम ने तैयार किया था। लेकिन, ऐन मौके पर ये फिल्म यश चोपड़ा ने ली। ये पूरा किस्सा मैं बताऊंगा अभी थोड़ी देर में लेकिन पहले आपको ये बताना जरूरी है कि फिल्म ‘परंपरा’ भी दरअसल सैफ अली खान के करियर की दूसरी फिल्म है क्योंकि जो पहली फिल्म उन्होंने बतौर हीरो साइन की थी, वह फिल्म थी ‘बेखुदी’ और उसकी शूटिंग के पहले ही दिन फिल्म के निर्देशक राहुल रवैल ने सैफ को फिल्म से निकाल दिया था। राहुल को सैफ तब बहुत ही बिगड़ैल नवाब लगे थे और उन्होंने फिल्म ‘बेखुदी’ में सैफ को निकालकर एक दूसरे नए चेहरे कमल सदाना को ले लिया था। इस फिल्म में भी सैफ के साथ काजोल ही थीं, लेकिन सैफ को काजोल के साथ की ही हिट फिल्म से आगे बढ़ना तो दोनों के फिर मिलने का संयोग बनी फिल्म ‘ये दिल्लगी’।
निर्देशक की पहली फिल्म
फिल्म ‘बेखुदी’ से बाहर किए जाने को सैफ अली खान ने बरसों बाद अपना पहला सबक माना और ये भी माना कि वाकई उन्हें तब एक्टिंग नहीं आती थी। राहुल रवैल उनसे पहले ही दिन एक इमोशनल गाने पर एक्टिंग करवाना चाह रहे थे और गाने की लाइन के हिसाब से उनके चेहरे के भाव बदल नहीं पा रहे थे। फिल्म ‘परंपरा’ में इसीलिए यश चोपड़ा ने उन्हें तमाम बड़े सितारों के साथ पेश किया। इस बात का एहसान सैफ अली खान अब भी मानते हैं। यश चोपड़ा का बेहद सम्मान करने वाले सैफ अली खान अब भी कभी बातों के बीच यश चोपड़ा का जिक्र आने पर भावुक हो जाते हैं। यशराज फिल्म्स की आने वाली फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में भी वह आखिरी मौके पर शामिल हुए। फिल्म में अभिषेक बच्चन ने काम करने से मना कर दिया तो आदित्य चोपड़ा की एक फोन कॉल पर उन्होंने अभिषेक की जगह काम करने की हामी भर दी थी। खैर हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘ये दिल्लगी’ की तरफ। नरेश मल्होत्रा ने इस फिल्म के बाद बतौर निर्देशक तमाम और फिल्में भी बनाईं। लेकिन, उनके साथ काम करने वाले लोग बताते हैं कि फिल्म ‘ये दिल्लगी’ में उन्होंने एक परिवार बनाया। इसके पहले वह ‘युद्ध’ और ‘त्रिदेव’ जैसी सुपरहिट फिल्में एडिट कर चुके थे और यश चोपड़ा के मुख्य सहायक निर्देशक हुआ करते थे।
जब यश चोपड़ा ने ली ‘डर’ की पटकथा
ये बात जानकर शायद आप चौंक जाएं कि नरेश मल्होत्रा को निर्देशन की शुरुआत दरअसल फिल्म ‘डर’ से करनी थी। फिल्म ‘ये दिल्लगी’ से ही अपने सिनेमैटोग्राफी करियर की शुरूआत करने वाले राजू केजी बताते हैं, “हम सब लोग नरेश जी के साथ एक परिवार की तरह ही काम करते थे। हनी ईरानी (जावेद अख्तर की पहली पत्नी), नरेश जी हम सबने मिलकर जिस कहानी पर काम किया और जिसका सीन डिवीजन वगैरह सब तैयार कर लिया, वह फिल्म थी, ‘डर’। इस फिल्म में हीरो का किरदार तब दीपक मल्होत्रा को करना था। लेकिन उनकी पहली फिल्म ‘लम्हे’ के बाद कोई उनके साथ काम नहीं करना चाहता था। आमिर खान ने ये फिल्म सुनी। ऋषि कपूर ने सुनी। ऋषि कपूर ने ही यश चोपड़ा को ये फिल्म निर्देशित करने की सलाह दे डाली।” यश चोपड़ा अपनी पिछली फिल्म ‘लम्हे’ में दीपक मल्होत्रा के होने का नुकसान उठा चुके थे। उन्होंने नरेश मल्होत्रा से पूरी रेडी स्क्रिप्ट ली। दीपक वाले किरदार में लिया सनी देओल को और जो रोल आमिर खान ने छोड़ा वो मिला शाहरुख खान को। बाकी सब इतिहास है।
सचिन भौमिक ने सुनाई कहानी
अब जब फिल्म ‘डर’ की पूरी पटकथा फिल्म के सारे सीन्स के स्टोरी बोर्ड समेत नरेश मल्होत्रा ने बतौर गुरु दक्षिणा यश चोपड़ा को सौंप दी तो अगली कहानी की तलाश शुरू हुई। ऋषि कपूर की तमाम हिट फिल्मों के राइटर रहे सचिन भौमिक ने नरेश मल्होत्रा को 1954 में रिलीज हुई फिल्म ‘सबरीना’ की कहानी सुनाई जो एक मशहूर उपन्यास ‘सबरीना फेयर’ पर आधारित थी। दो रईस भाइयों के बीच हवेली के एक गरीब ड्राइवर की बेटी के आने की कहानी है सबरीना। ये कहानी नरेश मल्होत्रा ने यश चोपड़ा को सुनाई तो उन्हें तुरंत पसंद आ गई। लेकिन कहानी में पेंच ये फंसा कि इसी कहानी पर लेखक रॉबिन भट्ट अपने भाई महेश भट्ट के लिए फिल्म लिख रहे थे। सचिन भौमिक ने कहा कि अगर नरेश मल्होत्रा जाकर रॉबिन भट्ट से बात कर आएं तो वह उनके लिए फिल्म लिख सकते हैं। नरेश मल्होत्रा जाकर महेश भट्ट से मिले। उन्होने कहा कि अगर रॉबिन को एतराज़ नहीं है तो मैं भी उसके फैसले के साथ रहूंगा। रॉबिन भट्ट ने अपनी पूरी स्क्रिप्ट नरेश मल्होत्रा को सौंप दी लेकिन नरेश मल्होत्रा फिल्म लिखवाने का वादा तो सचिन भौमिक से कर चुके थे। नरेश ने रॉबिन भट्ट से गुज़ारिश की और रॉबिन भट्ट ने इस पर कोई मन खट्टा नहीं किया। हां, लेकिन शर्त ये जरूर लगा दी कि नरेश मल्होत्रा ने अगर साल भर में ये फिल्म न बनाई तो फिर वह अपनी लिखी पटकथा पर फिल्म बना लेंगे। खैर, ऐसी नौबत आई नहीं और फिल्म बनी, ‘ये दिल्लगी’।

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