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साहिर लुधियावनी ने जावेद अख्तर को दिए थे 100 रुपए, लौटाते वक्त ऐसा कुछ हुआ फूट-फूटकर रो पड़े

Thu, 08 Mar 2018 04:01 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 08 Mar 2018 04:01 PM IST
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Birthday special Sahir Ludhianvi life unknown facts
साहिर लुधियानवी
साहिर लुधियानवी हिन्दी फिल्मों के ऐसे गीतकार हैं जिनके गाने और गजल किसी भी पहचान के मोहताज नहीं है। 8 मार्च 1921 को पंजाब के लुधियाना शहर में साहिर का जन्म एक जमींदार परिवार में हुआ। साहिर ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई लुधियाना के खालसा स्कूल से पूरी की। इसके बाद वह लाहौर चले गए जहां उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई सरकारी कॉलेज से पूरी की। बाद में वह कॉलेज के कार्यक्रमों में अपनी नज्में पढ़कर सुनाने लगे जिससे उन्हें काफी शोहरत मिली। 
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साहिर लुधियानवी

साहिर ने 1950 में प्रदर्शित ‘आजादी की राह पर’ फिल्म में अपना पहला गीत ‘बदल रही है जिंदगी’ लिखी, लेकिन फिल्म सफल नहीं रही। फिल्म ‘नौजवान’ में लिखे अपने गीत ‘ठंडी हवाएं लहरा के आए’ के बाद गीतकार के रूप में उन्होंने कुछ हद तक अपनी पहचान बनाई। गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ साहिर के सिने करियर की अहम फिल्म साबित हुई। मुंबई के मिनर्वा टॉकीज में जब यह फिल्म दिखाई जा रही थी तब जैसे ही ‘जिन्हें नाज है हिंद पर वो कहां हैं’ बजा, तब सभी दर्शक अपनी सीट से उठकर खड़े हो गए और गाने की समाप्ति तक ताली बजाते रहे। बाद में दर्शकों की मांग पर इसे 3 बार और दिखाया गया। 

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sahir

उन दिनों का एक किस्सा काफी मशहूर है जो साहिर लुधियानवी और जावेद अख्तर से जुड़ा हुआ है। साहिर लुधियानवी और जावेद अख्तर काफी अच्छे दोस्त थे। एक बार जावेद अख्तर ने घर छोड़ दिया और जहां उन्हें जगह मिलती वहीं रहने लग जाते। एक दिन जावेद अख्तर अपने दोस्त साहिर के घर पहुंचे। जावेद कई दिन से नहाए नहीं थे, तो वह बाथरूम में जाकर नहाने लगे। जब वह बाहर निकले तो टेबल पर सौ रुपए रखे थे। साहिर ने कहा, जावेद यह रुपए रख लो। उन दिनों सौ रुपए बड़ी रकम थी। जावेद मजबूर तो थे ही तो उन्होंने वह रुपए रख लिए।

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साहिर लुधियानवी

बाद में जब भी साहिर लुधियानवी उनसे अपने सौ रुपए मांगते तो जावेद अख्तर मजाक में कहते वह तो मैं खा गया अब वापस नहीं दूंगा। दोनों के बीच इसी तरह प्यार भरी नोंक-झोंक चलती रहती। एक दिन साहिर अपने डॉक्टर से मिलने उनके घर गए। वहीं दिल का दौरा पड़ने से साहिर लुधियानवी 59 साल की उम्र में 25 अक्टूबर 1980 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। 

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Sahir Ludhianvi

डॉक्टर ने साहिर के दोस्त जावेद अख्तर को फोन किया। जावेद पहुंचे और टैक्सी में साहिर के शव को लेकर डॉक्टर के यहां से घर तक आए। बाद में जावेद को याद आया टैक्सीवाले को तो पैसा दिया ही नहीं। टैक्सीवाला मैयत उठने के इंतजार में चुपचाप रुका रहा। जावेद अख्तर उस टैक्सीवाले के पास गए, 100 रुपए दिए और रोते हुए बोले- 'मरते-मरते अपने पैसे ले ही गया'।

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