भारतीय सिनेमा के 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' यानी राज कपूर को भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे महान और सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्माता और अभिनेता माना जाता है। उन्हें समीक्षकों और अपने चाहने वालों से हमेशा सराहना ही मिली। फिल्मों के इतिहासकार और सिनेमा के शौकीन लोग उन्हें हिंदी सिनेमा का चार्ली चैपलिन कहते थे। उन्होंने अपनी फिल्मों से हमेशा दर्शकों का मनोरंजन किया। हिंदी सिनेमा को एक से एक बेहतरीन फिल्में देने के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें फिल्मों के सबसे बड़े सम्मान 'दादासाहेब फाल्के' अवार्ड से भी नवाजा गया। कला में अपना योगदान देने के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म भूषण से भी अलंकृत किया। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में दर्जनों सुपरहिट फिल्में दीं। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको उनकी जिंदगी की कुछ सुपरहिट फिल्मों से रूबरू कराते हैं।
'आवारा' बन राज कपूर ने बॉलीवुड में लगाई थी 'आग', जानें 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' की टॉप 10 फिल्में
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नीलकमल (1947)
1947 में आई फिल्म 'नीलकमल' को किदार शर्मा ने निर्देशित और निर्मित किया है। इस ड्रामा फिल्म में पहली बार राजकपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में दो राजकुमारियों को तख्तापलट के बाद उनके महल से बाहर निकाल दिया और एक अछूत परिवार के साथ रहने के लिए भेज दिया जाता है। दोनों बहनों को एक कलाकार से प्यार हो जाता है, जिसके कारण उनमें से एक आत्महत्या कर लेती है। इस ब्लैक एंड वाइट फिल्म में राजकपूर, मधुबाला और बेगम पारा मुख्य भूमिका में थे।
आग (1948)
साल 1948 में आई फिल्म 'आग' एक ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन और निर्माण राजकपूर ने किया है। कहानी में केवल अपनी कानून की परीक्षा में असफल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसे अपने घर से बाहर निकाल दिया जाता है। वह अपने दोस्त राजन के पास आता है। केवल का एक स्टेज कलाकार बनने का सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए उसका दोस्त राजन केवल की पूरी मदद करता है। राजकपूर ने इसी फिल्म से निर्माता और निर्देशकों की दुनिया में कदम रखा। यह नरगिस के साथ राजकपूर की पहली फिल्म थी। राजकपूर और नरगिस के अलावा प्रेमनाथ और कामिनी कौशल फिल्म में मुख्य भूमिका में थे।
आवारा (1951)
वर्ष 1951 की फिल्म 'आवारा' एक क्राइम ड्रामा फिल्म है। इसे राजकपूर ने निर्देशित और निर्मित किया है। कहानी में राज उस व्यक्ति की हत्या करता है जो उसके माता-पिता के अलग होने के लिए जिम्मेदार था। फिर उसे मुकदमे में भेज दिया जाता है और जज का सामना करना पड़ता है। वह जज उसके बेगुनाह पिता हैं, जो अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश करते हैं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह फिल्म एक मील का पत्थर साबित हुई। इसकी ख्याति सोवियत संघ, पूर्वी एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिमी यूरोप तक फैली। इसका गाना 'आवारा हूं' सोवियत संघ, चीन, बुल्गारिया, तुर्की, अफगानिस्तान और रोमानिया तक हिट हुआ। इस फिल्म को 1953 में कांन्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्राइज के लिए भी नामित किया गया था। टाइम मैगजीन ने आवारा को 100 सबसे बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट में भी शामिल किया। फिल्म में राजकपूर, नरगिस, पृथ्वीराज कपूर और लीला चिटनीस मुख्य भूमिका में हैं।
बूट पॉलिश (1954)
बूट पोलिश एक ड्रामा फिल्म है। इसे प्रकाश अरोरा ने निर्देशित और खुद राजकपूर ने निर्मित किया है। कहानी में कमला अपनी बहन की मौत के बाद भाई-बहन बेलू और भोला को भीख मांगने के लिए मजबूर करती है। वे जीवित रहने के लिए जूते पॉलिश करना सीखते हैं और भीख मांगने से इंकार करते हैं, लेकिन उनकी किस्मत तब बदलती है जब वह अलग होते हैं। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। साथ ही कांन्स फिल्म फेस्टिवल में नामित भी किया गया। राजकपूर, कुमारी नाज, रतन कुमार और चाँद बुर्के फिल्म की मुख्य भूमिका है।