{"_id":"57ebc8da4f1c1b073d575d59","slug":"birthday-spl-story-comedy-king-mehmood-sold-toffees-in-local-train","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचता था ये कॉमेडी किंग","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचता था ये कॉमेडी किंग
Thu, 29 Sep 2016 12:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:58 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
अपने विशिष्ट अंदाज, हाव भाव और बेहतरीन आवाज से लगभग पांच दशक तक दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने वाले महमूद ने फिल्म इंडस्ट्री में 'किंग ऑफ कॉमेडी' का दर्जा हासिल किया था। हालांकि उन्हें इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था और यहां तक सुनना पड़ा था कि वो ना तो अभिनय कर सकते हैं और ना ही कभी अभिनेता बन सकते हैं। एक्टर महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1933 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो में काम किया करते थे। घर की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए महमूद मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनो में टॉफियां बेचा करते थे। बचपन के दिनों से ही महमूद का रुझान अभिनय में था।
अपने पिता की सिफारिश की वजह से ही 1943 में उन्हें बॉम्बे टॉकीज की फिल्म 'किस्मत' में अपनी खुद की किस्मत को आजमाने का मौका मिला। फिल्म में महमूद ने अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाई थी।
Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचते थे कॉमेडी किंग महमूद!
2 of 5
बन गए ड्राइवर..
इस बीच महमूद ने गाड़ी चलाना सीखा और निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां ड्राइवर का काम करने लगे। इसका मुख्य कारण ये था कि इसी बहाने उन्हें मालिक के साथ हर दिन स्टूडियो जाने का मौका मिल जाया करता था जहां वो कलाकारों को करीब से देख सकते थे। इसके बाद महमूद ने गीतकार गोपाल सिंह नेपाली, भरत व्यास, राजा मेंहदी अली खान और निर्माता पीएल संतोषी के घर पर भी ड्राइवर का काम किया। महमूद की किस्मत का सितारा तब चमका जब फिल्म 'नादान' की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री मधुबाला के सामने एक जूनियर कलाकार लगातार दस रीटेक के बाद भी अपना संवाद नहीं बोल पाया। फिल्म निर्देशक हीरा सिंह ने महमूद को डायलॉग बोलने के लिए दिया और सीन बिना रिटेक के एक बार में ही ओके हो गया।
Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचते थे कॉमेडी किंग महमूद!
3 of 5
पहले करते थे छोटे मोटे रोल...
इस फिल्म में महमूद को 300 रुपये मिले जबकि बतौर ड्राइवर उन्हें महीने में सिर्फ 75 रुपये ही मिलते थे। इसके बाद महमूद ने ड्राइविंग का काम छोड़ दिया और अपना नाम जूनियर आर्टिस्ट एसोसिएशन मे दर्ज करा दिया। यहीं से उन्होंने फिल्मों में काम करने के लिए संघर्ष करना शुरू किया। इसके बाद बतौर जूनियर आर्टिस्ट महमूद ने 'दो बीघा जमीन', 'जागृति', 'सीआईडी', 'प्यासा' जैसी फिल्मों में छोटे मोटे रोल किए जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। महमूद के बारे में एबीएम की राय कुछ इस तरह की थी कि वह ना कभी अभिनय कर सकते हैं और ना ही अभिनेता बन सकते हैं। बाद में बैनर की ना सिर्फ महमूद के बारे में राय बदली बल्कि उन्होंने महमूद को लेकर फिल्म 'मैं सुंदर हूं' भी बनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचते थे कॉमेडी किंग महमूद!
4 of 5
रिश्तेदार ने सुनाई खरी खोटी...
इसी दौरान महमूद अपने रिश्तेदार कमाल अमरोही के पास फिल्म में काम मांगने के गए तो उन्होंने महमूद को यहां तक सुना दिया कि आप अभिनेता मुमताज अली के पुत्र हैं और जरूरी नहीं कि एक अभिनेता का पुत्र भी अभिनेता ही बने। आपके पास फिल्मों में अभिनय करने की योग्यता ही नहीं है. आप चाहें तो मुझसे कुछ पैसे लेकर कोई अलग व्यवसाय शुरू कर सकते हैं." इस तरह की बात सुनकर कोई भी मायूस हो सकता है लेकिन महमूद ने इसे चैलेंज की तरह लिया।
विज्ञापन
Bday Spl : कभी लोकल ट्रेन में टॉफियां बेचते थे कॉमेडी किंग महमूद!
5 of 5
छोटी बहन से सफलता...
इस बीच महमूद ने संघर्ष करना जारी रखा। जल्द ही उनकी मेहनत रंग लाई और 1958 में फिल्म 'परवरिश' में उन्हें एक अच्छा रोल मिल गया। इस फिल्म में महमूद ने राज कपूर के भाई का किरदार निभाया। इसके बाद उन्हें एलवी प्रसाद की फिल्म 'छोटी बहन' में काम करने का अवसर मिला जो उनके फिल्मी करियर के लिए अहम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म के लिए महमूद को 6000 रुपये मिले थे। 1961 में महमूद को एमवी प्रसाद की फिल्म 'ससुराल' में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म की सफलता के बाद बतौर हास्य अभिनेता महमूद फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।