हमेशा फिल्मों में हीरो की लव स्टोरी नजर आती है, लेकिन ऐसा नहीं है। विलेन की भी लव स्टोरी हो सकती है। अक्सर जिस विलेन की पहचान लड़कियों से बदसलूकी और उन्हें परेशान करने की होती है, वह असल जिंदगी में बेहद दयालु और साफ दिल के होते हैं। इनमें से एक थे अमरीश पुरी, जिनकी आवाज तक से महिलाओं की नींद उड़ जाती थी, लेकिन वह पहली ही नजर में अपनी होने वाली पत्नी को दिल दे बैठे थे। वह पहली मुलाकात जिंदगी भर का साथ बन जाएगी, दोनों ने कभी सोचा भी नहीं था। आज अमरीश पुरी और उर्मिला दिवेकर के शादी की सालगिरह के मौके पर आइए जानते हैं फिल्मी दुनिया के विलेन और असल जिंदगी के बेहतरीन इंसान अमरीश पुरी की लव स्टोरी के बारे में...
Amrish Puri: जब खलनायक को हुई मोहब्बत, पढ़ें हिंदी सिनेमा के सबसे खूंखार विलेन की प्रेम कहानी
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बॉलीवुड में मोगैंबो के नाम से मशहूर दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी बेशक सिल्वर स्क्रीन पर हमेशा विलेन के तौर पर नजर आए हों, मगर असल जीवन में वह बहुत ही साधारण और सज्जन व्यक्ति थे। यह बात इससे पता चल जाती है कि अमरीश पुरी फिल्मों में शराब के नशे में धुत नजर आते थे। वहीं, उन्हें महिलाओं से छेड़खानी करते हुए दिखाया जाता था। वहीं, असल जीवन में वह अपने निभाए किरदारों के विपरीत थे और केवल अपनी पत्नी से ही प्रेम करते थे।
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अमरीश पुरी की मुलाकात उर्मिला दिवेकर से एक बीमा कंपनी में हुई थी, जहां अमरीश एक क्लर्क के रूप में काम करते थे। इस ऑफिस में उनकी मुलाकात उर्मिला जी से हुई थी। सीधी-साधी और सादगी से भरी उर्मिला दिवेकर को देखते ही अमरीश अपना दिल दे बैठे थे। उर्मिला को भी अमरीश पुरी से मिलकर काफी अच्छा लगा और दोनों को ही एक-दूसरे का साथ पसंद आने लगा। उस समय लव मैरिज का चलन कम होने के कारण अमरीश और उर्मिला दोनों के ही घरवालों ने इस रिश्ते पर एतराज जताया। दरअसल, अमरीश और उर्मिला दोनों ही अलग-अलग प्रांतों के थे। अमरीश पंजाबी थे तो उर्मिला साउथ इंडियन थीं। दोनों के प्यार के आगे परिवार वालों को झुकना पड़ा और फिर धूमधाम से दोनों की शादी हो गई। शादी के बाद भी अमरीश और उर्मिला बहुत समय तक एक साथ काम करते रहे।
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बता दें कि अमरीश हमेशा से ही एक्टर बनना चाहते थे। वह फिल्मों में विलेन बन जाएंगे, ऐसा उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। मीडिया से बातचीत के दौरान उनके पोते वर्धान ने बताया कि उनके दादा जी यानि अमरीश पुरी हमेशा हीरो बनना चाहते थे, मगर उन्हें हमेशा नेगेटिव रोल ही मिले। अपने एक्टिंग करियर को आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपनी जॉब छोड़नी पड़ गई थी।
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अमरीश पुरी के शुरुआती दिन काफी संघर्ष भरे थे। दिल-ओ-जान से मेहनत करने के बाद 41 की उम्र में अमरीश पुरी को सफलता मिली और इंडस्ट्री में पहचान भी। मगर विलेन का ठप्पा उन पर से कभी हटा नहीं। हालांकि, उन्हें इससे परेशानी नहीं थी। अमरीश पुरी को ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘करण अर्जुन’ और ‘नायक: द रियल हीरो’ ‘मिस्टर इंडिया’ में भूमिका के लिए याद किया जाता है। उन्होंने लगभग 500 से भी अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। बता दें कि ब्रेन हेमरेज के चलते 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की आयु में अमरीश पुरी का निधन हो गया था।
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