अभिनेता जिमी शेरगिल अपने करियर में हर तरह की फिल्में कर चुके है, लेकिन उनका मानना है छोटे और सपोर्टिंग रोल में उन्हें ज्यादा लोकप्रियता मिली है। अभिनेता का मानना है कि एक समय के बाद उनका सपोर्टिंग रोल करने का फैसला सही था, नहीं तो अब तक वह फिल्मों में सिर्फ नाचते ही रहते। जिमी शेरगिल के मुताबिक अपनी आने वाली वेब सीरीज 'चूना' में वह काफी दमदार भूमिका निभा रहे हैं। यह सीरीज 3 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। सीरीज के खास प्रिव्यू के मौके पर अभिनेता जिमी शेरगिल ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत की।
Jimmy Shergill: 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में पहले मुझे ही मिला था मुन्ना का किरदार, लेकिन फिर संजय दत्त आए और...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैरियर के शुरुआत में भी आपको गुलजार साहब से जैसे दिग्गज कवि -गीतकार और निर्देशक के साथ आपको काम करने का मौका मिला, इस फिल्म से जुड़ना कैसे हुआ और गुलजार साहब के साथ काम करने के अनुभव कैसा रहा?
'माचिस' मेरी पहली फिल्म थी वह हमेशा मेरे लिए स्पेशल रहेगी। गुलजार साहब से मेरी मुलाकात सहायक निर्देशक बनने के लिए हुई थी। गुलजार साहब से मिला तो उन्होंने मिलते ही कहा कि मेरी फिल्म के किरदार जयमल के रूप में तुम्हें देख रहा हूं। गुलजार साहब को लगा कि जयमल के किरदार में मैं फिट बैठ रहा हूं, इस तरह से मेरी अभिनय यात्रा की शुरुआत गुलजार साहब के निर्देशन में बनी फिल्म 'माचिस' से हुई। एक एक्टर के तौर के गुलजार साहब के साथ बहुत सीखने को मिला। कुछ मैंने रोशन तनेजा के एक्टिंग इंस्टीट्यूट में सीखा और कुछ गुलजार साहब के साथ काम करके सीखने को मिला। बाकी जो सीखना रह गया था वह आदित्य चोपड़ा की फिल्म 'मोहब्ब्बतें' में सीखने को मिला।
इसे भी पढ़ें- TMKOC: तारक मेहता में छह साल बाद होगी दयाबेन की वापसी? जानें कब तक लौट सकती हैं दिशा वकानी
‘मोहब्बतें’ में तो आपको हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज सितारों के साथ काम करने का मौका मिला…
'मोहब्बतें' में मैंने कॉलेज स्टूडेंट करण चौधरी का किरदार निभाया था और पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान एक स्टूडेंट की तरह सीखता रहा। अमिताभ बच्चन साहब का अपना एक अलग आभामंडल और व्यक्तित्व है। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। शाहरुख खान, अनुपम खेर और अमरीश पुरी जैसी शख्सियतों के साथ काम करना ही अपने जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। ऊपर से आदित्य चोपड़ा जैसे निर्देशक के साथ काम करना तो सोने पर सुहागा रहा। इन दोनों फिल्मों का मेरे करियर पर काफी प्रभाव रहा है।
और, 'मेरे यार की शादी'?
'मेरे यार की शादी' के किस्से तो आज तक चलते रहते हैं। उसको लड़की क्यों नहीं मिली, ऐसा क्यों हुआ? यह सब आज भी चलता रहता है। फिल्म की कहानी तो दिलचस्प थी ही, फिल्म के गाने ऐसे वायरल हुए कि उन गानों के चलते फिल्म के किरदार आज भी जिंदा हैं। उस फिल्म का एक गाना 'शरारा शरारा' पिछले तीन चार साल से ऐसा वायरल हुआ कि अभी भी फिल्म के किरदारों को जिंदा रखे हुए है। अभी भी तीन चार महीने में कहीं न कहीं वह गाना सुनने को मिल जाता है और फिल्म के किरदार फिर जिंदा हो जाता है। 'मोहब्बतें' को रिलीज हुए 23 साल हो गए हैं। 21 साल 'मेरे यार की शादी है' को रिलीज हुए हो गए, आज भी जब इन फिल्मों की चर्चा होती है, तो बहुत खुशी होती है।
'मोहब्बतें' हो, 'मेरे यार की शादी है' या फिर कुंदन शाह के निर्देशन में बनी फिल्म 'दिल है तुम्हारा', इन फिल्मों में जो कॉमन बात रही, वह यह थी कि इन फिल्मों में आप रोमांटिक किरदार में ही नजर आए?
'मोहब्बतें', 'मेरे यार की शादी' और ‘दिल है तुम्हारा' मेरे करियर के पहले चरण की फिल्में थी। इसके बाद 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'यहां' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्में मेरे करियर के दूसरे चरण की फिल्में हैं जिसमे मुझे काफी अलग -अलग किरदार निभाने के मौके मिले। उस दौरान ही मैंने फैसला किया कि सपोर्टिंग रोल में एक एक्टर के तौर पर कुछ अलग करने को मिला रहा है, तो कर लेना चाहिए नहीं तो जिंदगी भर नाचते ही रहना होगा।