ईशा फाउंडेशन के वासुदेव जग्गी (जिन्हें सद्गुरु के नाम से भी जाना जाता है) के द्वारा मिट्टी बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत दुनियाभर के लोगों को मिट्टी में जैविक सामग्री बढ़ाने के लिए जागरूक किया जा रहा है और मिट्टी बचाओ (Save Soil) अभियान में कई जानी मानी हस्तियों को भी जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में कॉमनवेल्थ गेम विजेता और इंडिया एंटी टोबैको के ब्रांड एंबेसडर पहलवान संग्राम सिंह को भी इस कैंपेन का हिस्सा बनाया गया है। इसी के तहत संग्राम सिंह सद्गुगुरू से मिले और अखाड़े में उन्हें मिट्टी की महत्वता बताई।
Save Soil Campaign: संग्राम सिंह ने अखाड़े में बैठ सद्गुरु को बताया मिट्टी का महत्व, बोले- धरती हमारी मां है
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बोले हरियाणा का ये सपूत धरती मां को बचाने हमेशा खड़ा रहेगा
पहलवान संग्राम सिंह ने मिट्टी बचाओ अभियान से जुड़कर कहा कि जिस अखाड़े की मिट्टी को अपने तन से लगाकर संग्राम सिंह ने दुनिया जीती। उसी धरती मां को बचाने का जब–जब अभियान चलेगा , हरियाणा का ये सपूत हमेशा खड़ा रहेगा।
संग्राम सिंह ने दिया मिट्टी बचाने का संदेश
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के साथ मिलकर संग्राम सिंह ने मिट्टी बचाओ (save soil) अभियान के जरिए लोगों को मिट्टी से प्यार करने और उसे बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी से प्यार करो और उसे बचाओ, क्योंकि जो इस मिट्टी में छुपा हैं वो और किसी में नहीं। ये मिट्टी इंसान, पशुओं और पर्यावरण और इस पूरे ब्रह्मांड के लिए वरदान हैं। इसे प्यार करो और इसे बचाकर रखो।
बाइक से 22 देशों की यात्रा पर हैं सद्गुरु
सदगुरु के साथ अपने इस नेक सहयोग पर संग्राम सिंह कहते हैं," सद्गुरु जी मुझे हमेशा से बहुत प्रभावित करते रहे हैं। दुनिया को अध्यात्म का पाठ पढ़ाने वाले और उन्हें जीवन की परिभाषा बताने वाले 65 साल के सद्गुरु का जोश देखते बनता हैं। ये 75 दिनों से भी ज्यादा तीस हजार किलोमीटर,20 से 22 देशों में बाइक पर यात्रा कर रहे हैं और मिट्टी बचाओ अभियान को प्रमोट कर रहे हैं।
अखाड़े की मिट्टी को हम मां समझते हैं
संग्राम कहते हैं कि मुझे जब उनकी (सद्गुरु) टीम ने अप्रोच किया तो मैने तुरंत हामी भर दी और सद्गुरु को ये भी बताया कि ये अभियान बगैर अखाड़े में जाए पूरी नहीं होता, क्योंकि अखाड़े की मिट्टी को हम मां समझते हैं और अखाड़े की मिट्टी तो इतनी शुद्ध होती हैं कि हम सब उसी से बड़े होते हैं और हम उसमे तेल, हल्दी, घी डालते है। मैने सद्गुरु जी को भी अखाड़े की मिट्टी का महत्व समझाया, तो मुझे लगता है कि अखाड़े में आकर इस अभियान का असल मकसद पूरा हो गया"।