महाराष्ट्र में हर साल धूमधाम से मनाए जाने वाले गणेश उत्सव पर भी कोरोना वायरस का असर देखने को मिलेगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल लोगों से गुजारिश की है कि वह मौजूदा हालात को देखते हुए ही गणेश उत्सव मनाएं। प्रधानमंत्री के फैसले पर सहमति जताते हुए भारतीय सिनेमा की अभिनेत्री अमृता राव ने भी इस बार लोगों से प्रार्थना की है कि इस साल के गणेशोत्सव को टाल दिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। अमृता राव को अपने समुदाय गणेश पंडाल कमेटी पर गर्व है कि उन्होंने समय रहते हुए सालाना गणेश चतुर्थी पंडाल महोत्सव को 21 अगस्त से लेकर अगले साल फरवरी तक के लिए टाल दिया है।
गणेशोत्सव के लिए अमृता राव ने दिए ये खास सुझाव, बोलीं- 'धरती से निकली वस्तु धरती में ही...'
अमृता राव बताती हैं कि वह बचपन से ही इन गणेश पंडालों के दर्शन करते हुए आ रही हैं। वह कहती हैं, 'मेरी गणेश चतुर्थी तब तक पूरी नहीं होती है, जब तक मैं किसी गणेश पंडाल में जाकर गणपति के दर्शन ना कर लूं। हालांकि, मैं जीएसबी समिति की तरफ से उठाए गए इस कदम से बहुत प्रभावित हूं। उन्होंने किसी भी चीज की चिंता न करते हुए सीधे इस साल के समारोह को अगले साल तक के लिए टाल दिया है। मुझे खुशी है कि उन्होंने लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए ऐसा फैसला लिया। मुझे आशा है कि बाकी सभी पंडाल समिति भी इससे प्रेरणा लेंगे और इस पर अमल भी करेंगी।'
महाराष्ट्र में हर साल बड़े पैमाने पर सार्वजनिक गणेश विसर्जन भी किए जाते हैं। अमृता के हिसाब से इस साल इन सार्वजनिक गणेश विसर्जनों को नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि इस स्थिति में यह घातक साबित हो सकता है। उन्होंने इसका दूसरा रास्ता सुझाते हुए कहा, 'हमें अपनी प्राचीन सभ्यता को याद करना चाहिए जब गणेश की मूर्ति को अपने। घर के कुएं में विसर्जित किया जाता था। यह इस बात का प्रतीक था कि जो धरती में से आया है वह धरती में ही वापस जाएगा। आज के समय को देखते हुए हम इस चीज को फिर से जीवंत कर सकते हैं। हम गणेश की मूर्ति को किसी पानी से भरी बाल्टी में विसर्जित कर सकते हैं और उस पानी और मिट्टी का इस्तेमाल किसी गमले में फूल उगाने के लिए कर सकते हैं। यह सबसे सुरक्षित और सबसे अच्छा तरीका हो सकता है।'
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोग्राम 'मन की बात' में इको फ्रेंडली मूर्तियां बनाने के बारे में कही बात से भी अमृता इत्तेफाक रखती हैं। वह कहती हैं, 'प्रकृति ने खुद का संतुलन बनाने के लिए लोगों को घरों में कैद कर दिया है। नदियां और तालाब खुद से साफ हो रहे हैं जिन्हें हमने गंदा कर दिया था। कोरोना प्रकृति की तरफ से दिया गया एक बहुत बड़ा इशारा है जिसने हमें एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सोचने पर मजबूर किया है। हमें अपनी प्रकृति को और अपने वातावरण को साफ और जहर मुक्त करने का इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता।'
अमृता के काम की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2013 में आई प्रकाश झा की फिल्म 'सत्याग्रह' के बाद फिल्मों से एक लंबा ब्रेक लिया था। इसके बाद वह पिछले साल रिलीज हुई बालासाहेब ठाकरे की बायोपिक 'ठाकरे' में ही नजर आई थीं।
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