{"_id":"6065f9fc6467481f78505782","slug":"dada-kondke-s-double-meaning-comedy-in-films-also-mention-name-in-the-guiness-book-of-world","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"डबल मीनिंग कॉमेडी कर इस अभिनेता ने बनाई थी पहचान, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है नाम","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
डबल मीनिंग कॉमेडी कर इस अभिनेता ने बनाई थी पहचान, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है नाम
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीपाली श्रीवास्तव
Updated Fri, 02 Apr 2021 09:46 AM IST
विज्ञापन
1 of 5
दादा कोंडके
Link Copied
यूं तो फिल्मों में अपनी कॉमेडी के लिए कई कॉमेडियन मशहूर हुए हैं। फिर चाहे वो हिंदी सिनेमा के कॉमेडियन हो या अन्य सिनेमा के। ऐसे ही मराठी सिनेमा में एक कॉमेडियन ऐसा भी हुआ है, जिसने फिल्मों में डबल मीनिंग कॉमेडी करके लोगों को खूब हंसाया। सिर्फ यही नहीं उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपना नाम दर्ज कराया। आज हम बात कर रहे हैं मराठी सिनेमा के सुपरस्टार दादा कोंडके की। उन्हें आम आदमी के हीरो के रूप में जाना जाता है। आज हम आपको दादा कोंडके के बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।
Trending Videos
2 of 5
दादा कोंडके
दादा कोंडके का असली नाम कृष्णा कोंडके था और उनका बचपन गरीबी में गुजरा था। दादा कोंडके को राजनीति से बहुत लगाव था, इसलिए वो इसमें खूब दखलंदाजी रखते थे। मराठियों के अधिकारों के लिए वो शिवसेना से भी जुड़े थे। शिवसेना की रैलियों में दादा भीड़ जुटाने का काम करते थे। दादा कोंडके हास्य कलाकार थे और अपनी फिल्मों में डबल मीनिंग कॉमेडी का इस्तेमाल भी करते थे। यही वजह थी कि वह लोगों के बीच मशहूर होते चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 5
दादा कोंडके
दादा कोंडके की मराठी फिल्मों के टाइटल भी इतने अश्लील होते थे कि सेंसर बोर्ड उन्हें पास करने में शरमा जाता था। कोंडके की फिल्मों के देखकर उन्हें पास करना सेंसर बोर्ड के लिए सबसे बड़ी चुनौती होता था। दादा के कई नाटक भी मशहूर हुए। उनका मराठी नाटक 'विच्छा माझी पूरी करा' काफी चर्चा में आया था।
4 of 5
दादा कोंडके
इस नाटक को कांग्रेस विरोधी माना जाता है। क्योंकि इस नाटक में इंदिरा गांधी का मजाक उड़ाया गया था। दादा कोंडके ने इस नाटक के 1100 से ज्यादा स्टेज शो किए थे। 1975 में आई दादा कोंडके की फिल्म 'पांडू हवलदार' बेहद चर्चित रही थी। इसमें उन्होंने लीड रोल निभाया। इस फिल्म के बाद से ही हवलदारों को पांडु कहा जाने लगा था।
विज्ञापन
5 of 5
दादा कोंडके
दादा कोंडके की सात मराठी फिल्मों ने गोल्डन जुबली मनाई, इसी वजह से उनका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो गया। उसके बाद उनकी दो और मराठी फिल्मों ने गोल्डन जुबली मनाई थी। उनकी मराठी फिल्मों के नाम 'आली अंगावर' यानी शरीर से चिपकने वाली, 'तुमचं अमचं जमहं', यानी तुम्हारी-हमारी जम गई, 'बोट लाबिन तिथं गुदगुल्या' यानी जहां छुओ वहीं गुदगुदी, 'ह्रोच नवरा पाहयजे' यानी मुझे यही पति चाहिए आज भी लोकप्रिय हैं। दादा की अन्य चर्चित फिल्मों में 'सोंगाड्या', 'आली अंगावर' प्रमुख हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X