यूं तो फिल्मों में अपनी कॉमेडी के लिए कई कॉमेडियन मशहूर हुए हैं। फिर चाहे वो हिंदी सिनेमा के कॉमेडियन हो या अन्य सिनेमा के। ऐसे ही मराठी सिनेमा में एक कॉमेडियन ऐसा भी हुआ है, जिसने फिल्मों में डबल मीनिंग कॉमेडी करके लोगों को खूब हंसाया। सिर्फ यही नहीं उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपना नाम दर्ज कराया। आज हम बात कर रहे हैं मराठी सिनेमा के सुपरस्टार दादा कोंडके की। उन्हें आम आदमी के हीरो के रूप में जाना जाता है। आज हम आपको दादा कोंडके के बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।
दादा कोंडके का असली नाम कृष्णा कोंडके था और उनका बचपन गरीबी में गुजरा था। दादा कोंडके को राजनीति से बहुत लगाव था, इसलिए वो इसमें खूब दखलंदाजी रखते थे। मराठियों के अधिकारों के लिए वो शिवसेना से भी जुड़े थे। शिवसेना की रैलियों में दादा भीड़ जुटाने का काम करते थे। दादा कोंडके हास्य कलाकार थे और अपनी फिल्मों में डबल मीनिंग कॉमेडी का इस्तेमाल भी करते थे। यही वजह थी कि वह लोगों के बीच मशहूर होते चले गए।
दादा कोंडके की मराठी फिल्मों के टाइटल भी इतने अश्लील होते थे कि सेंसर बोर्ड उन्हें पास करने में शरमा जाता था। कोंडके की फिल्मों के देखकर उन्हें पास करना सेंसर बोर्ड के लिए सबसे बड़ी चुनौती होता था। दादा के कई नाटक भी मशहूर हुए। उनका मराठी नाटक 'विच्छा माझी पूरी करा' काफी चर्चा में आया था।
इस नाटक को कांग्रेस विरोधी माना जाता है। क्योंकि इस नाटक में इंदिरा गांधी का मजाक उड़ाया गया था। दादा कोंडके ने इस नाटक के 1100 से ज्यादा स्टेज शो किए थे। 1975 में आई दादा कोंडके की फिल्म 'पांडू हवलदार' बेहद चर्चित रही थी। इसमें उन्होंने लीड रोल निभाया। इस फिल्म के बाद से ही हवलदारों को पांडु कहा जाने लगा था।
दादा कोंडके की सात मराठी फिल्मों ने गोल्डन जुबली मनाई, इसी वजह से उनका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो गया। उसके बाद उनकी दो और मराठी फिल्मों ने गोल्डन जुबली मनाई थी। उनकी मराठी फिल्मों के नाम 'आली अंगावर' यानी शरीर से चिपकने वाली, 'तुमचं अमचं जमहं', यानी तुम्हारी-हमारी जम गई, 'बोट लाबिन तिथं गुदगुल्या' यानी जहां छुओ वहीं गुदगुदी, 'ह्रोच नवरा पाहयजे' यानी मुझे यही पति चाहिए आज भी लोकप्रिय हैं। दादा की अन्य चर्चित फिल्मों में 'सोंगाड्या', 'आली अंगावर' प्रमुख हैं।