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शब्दों की शानदार रवानगी, उनकी खनक महसूस करनी है तो सुनिए नुसरत फतेह अली खान के ये 5 बेहतरीन गानें

Thu, 16 Aug 2018 01:36 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 16 Aug 2018 01:36 PM IST
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Death Anniversary of legendary singer Ustad Nusrat Fateh Ali Khan

मशहूर पाकिस्तानी सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान की आज पुण्यतिथि है। नुसरत साहब अपनी अलग आवाज के साथ-साथ अपनी गायकी के अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। नुसरत फतेह अली खान की आवाज और शब्दों का जादू कुछ ऐसा है जो एक बार सुन ले वो बस उन्हीं का हो जाता है। ऐसे में 'मेरे रश्के कमर...', से 'ये जो हल्का हल्का सुरूर है...' तक हम आपके लिेए लाए है उनके कुछ ऐसे गाने जो पीड़ियो की पीड़ियां गुनगुनाती जाएंगी।

'मेरे रश्के कमर...'

ये गाना अाज किसी की जुबान से उतरने का नाम ही नहीं लेता लेकिन कम ही लोगो को पता होगा कि सबसे पहले ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। 
मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम....

नुसरत उन बहुत कम लोगो में से है जिन्हे जीते जी इतनी महोब्बत नहीं मिली जितनी जिंदगी से रुखसती के बाद मिली। 
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'इश्क दा रुतबा'

1999 में आई फिल्म 'कारतूस' में 'इश्क दा रुतबा' गाना भी नुसरत फतेह अली खान की आवाज में था जो लोगों को काफी पसंद आया।
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ये जो हल्का-हल्का सुरूर है....

आज भी नुसरत फतेह अली खान की आवाज कानों में पड़ती हैं, तो बहुत से लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी गायकी में खो जाते हैं। 
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