बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रहीं श्रीदेवी की बड़ी बेटी जाह्नवी कपूर और शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर की फिल्म 'धड़क' का सबको बहुत ही बेसब्री से इंतजार था। आज यह फिल्म रिलीज हो गई है। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान हैं। यह फिल्म मराठी भाषा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सैराट' की हिन्दी रीमेक है लेकिन इसे सैराट समझने की भूल न करें। कई बातों में यह सैराट से बहुत अलग है। वैसे करण जौहर की फिल्म हो और उसमें ड्रामा न हो तो कैसे चलेगा। फिल्म में लव स्टोरी के साथ साथ ड्रामा क्रिएट करने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं जिन्हें आम दर्शकों के लिए हजम करना बड़ी बात है। आइए बताते हैं उन सीन्स के बारे में-
'धड़क' के 5 ऐसे सीन जो फिल्म को फ्लॉप न करवा दें, क्योंकि रियल में तो ये संभव नहीं
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फिल्म में जाह्नवी कपूर का इमेज काफी बोल्ड दिखाया गया है। वह ईशान खट्टर पर हावी होती नजर आती हैं। कई जगह पर ईशान को पीछे छोड़ते हुए जाह्नवी ने हीरो की भूमिका निभाई है। पुलिस की बंदूक छीनकर अपनी कनपटी पर लगाकर हीरो को भगा ले जाने का दम सिर्फ जाह्नवी के अंदर ही था। वैसे हीरोइन का इतना दमदार होना शायद ही कोई आसानी से पचा पाता हो।
फिल्म के शुरुआती भाग में ईशान को एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए दिखाया जाता है जिसमें कई व्यंजनों को एकसाथ खाना होता है। इनमें कचौड़ी से लेकर घेवर, बूंदी और हरी मिर्च भी शामिल होते है। इनकी मात्रा इतनी अधिक होती है कि यह संभव ही नहीं है कि कोई सामान्य व्यक्ति एकसाथ इतना खाना खा सके। ईशान खट्टर को देखने के बाद तो आप इस बात पर बिल्कुल यकीन नहीं कर पाएंगे कि ऐसे शरीर का शख्स इतना खाना एकसाथ खा सकता है। इस सीन को हजम कर पाना बहुत मुश्किल है।
फिल्म में इंटरवेल से ठीक पहले जाह्नवी और ईशान को घर से भागते हुए दिखाया गया है। दोनों उदयपुर की सड़कों पर भागते नजर आते हैं। भागते भाते दोनों इतना थक जाते हैं कि उनसे चलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोनों स्टेशन पहुंच जाते हैं जहां से ट्रेन रवाना हो रही होती है। दोनों तेजी और पूरी फूर्ति के साथ उस ट्रेन को पकड़ने के लिए दौड़ते हैं और सफल भी हो जाते हैं। वहीं उनके पीछे दौड़ रही पुलिस और पार्थवी के पिता के भेजे गए गुंडे उस ट्रेन को नहीं पकड़ पाते। अब ये तो पूरा फिल्मी ड्रामा हो गया जहां भागने वाले जोड़े को अचानक ही ट्रेन मिल जाती है। जो लोग सही से चल नहीं पा रहे थे वो अचानक ही तेजी से दौड़कर ट्रेन पकड़ने में सफल हो जाते हैं जबकि उनके पीछे भागने वाले इतने सारे लोग ट्रेन छोड़ देते हैं।
फिल्म ‘धड़क’ की सबसे बड़ी खामी ये है कि इसके किरदारों ने बहुत ही खराब मेवाड़ी बोली है। कई बार तो जाह्नवी और ईशान मेवाड़ी बोलते-बोलते हरियाणवी में बात करने लगते हैं। दोनों की भाषा को लेकर बड़ा कंफ्यूजन नजर आया। दर्शकों को ये सीन्स शायद ही पचें। उनकी लव स्टोरी बेहद कमजोर दिखाई गई है। दोनों परिवार से बचने के लिए ऐसा कुछ भी खास नहीं करते हैं जिसे असाधारण लव स्टोरी के रुप में देखा जा सके।