12 जुलाई 2002 को शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म देवदास रिलीज हुई थी। 'देवदास' उस साल की सबसे बड़ी रिलीज थी। लगभग 50 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म उस समय की सबसे महंगी फिल्म थी। फिल्म को संजय लीला भंसाली ने निर्देशित किया था। फिल्म को आज 17 साल पूरे हो चुके हैं। न सिर्फ फिल्म सुपरहिट थी , बल्कि इसके गाने भी सभी की जुबां पर चढ़ गए थे। इसके साथ ही फिल्म के डायलॉग्स तो आज भी लोगों की जुबां पर हैं। ऐसे में एक नजर फिल्म के 9 दमदार डायलॉग्स पर.....
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शाहरुख- ऐश्वर्या- माधुरी की 'देवदास' ने पूरे किए 17 साल, दिल को छू गए थे ये 9 डायलॉग्स
Fri, 12 Jul 2019 10:05 PM IST
Avinash Pal
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avinash Pal
Updated Fri, 12 Jul 2019 10:05 PM IST
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देवदास
- फोटो : सोशल मीडिया
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देवदास में शाहरुख खान
- फोटो : सोशल मीडिया
कौन कमबख्त बर्दाश्त करने के लिए पीता है, हम तो पीते हैं कि यहां बैठ सके, तुम्हे देख सकें, तुम्हें बर्दाश्त कर सकें।
बाबूजी ने कहा गांव छोड़ दो, सब ने कहा पारो को छोड़ दो, पारो ने कहा शराब छोड़ दो, आज तुमने कह दिया हवेली छोड़ दो, एक दिन आएगा जब वो कहेंगे दुनिया ही छोड़ दो।
बाबूजी ने कहा गांव छोड़ दो, सब ने कहा पारो को छोड़ दो, पारो ने कहा शराब छोड़ दो, आज तुमने कह दिया हवेली छोड़ दो, एक दिन आएगा जब वो कहेंगे दुनिया ही छोड़ दो।
devdas
अपने हिस्से की जिंदगी तो हम जी चुके चुन्नी बाबू, अब तो बस धडकनों का लिहाज़ करते हैं, क्या कहें इन दुनिया वालों को जो, आखिरी सांस पर भी ऐतराज़ करते हैं।
प्यार का कारोबार तो बहुत बार किया है। मगर प्यार सिर्फ एक बार।
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devdas
औरत मां होती है, बहन होती है, पत्नी होती है, दोस्त होती है... और जब वो कुछ नहीं होती तो वो तवायफ होती है।
एक बात होती थी जब तुम बहुत याद आती थीं.. (कब), जब- जब मैं सांस लेता था तब- तब।
एक बात होती थी जब तुम बहुत याद आती थीं.. (कब), जब- जब मैं सांस लेता था तब- तब।
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devdas
कितनी आसानी से गिनवा दिया कि तुम्हें हर पल मेरी याद आती थी, लेकिन ये नहीं सोचा कि उन पलों में बीतता तो मैं ही था। दीया तुम जलाती थी तो जलता तो मैं ही था।
जहां ख से खुश होकर जीना चाहिए वहां ख से इतने खामोश बैठे हो... अरे ख से इतने खोए- खोए हो... कि पता ही नहीं चलता कि आप घर पे हो।
जहां ख से खुश होकर जीना चाहिए वहां ख से इतने खामोश बैठे हो... अरे ख से इतने खोए- खोए हो... कि पता ही नहीं चलता कि आप घर पे हो।