मोहम्मद युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार आज 97 वर्ष के हो गए हैं। दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार भारतीय सिनेमा जगत के ट्रेजडी किंग और पहले खान सुपरस्टार के रूप में पहचाने जाते हैं। पांच दशक से भी लंबे समय के करियर में उन्होंने दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उन्होंने साल 1944 में फिल्म 'ज्वार भाटा' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। वहीं 1998 में फिल्म 'किला' में वह आखिरी दफा नजर आए। दिलीप कुमार के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे अधिक पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अभिनेता के तौर पर दर्ज है। इनमें 10 सर्वोत्तम अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार भी शामिल हैं। हिंदी सिनेमा जगत का मुख्य हिस्सा बन चुके दिलीप कुमार के जन्मदिन के अवसर पर आज हम आपको उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में बताएंगे-
दिलीप कुमार ने ऐसे जीता लोगों का दिल, जानिए दिग्गज अभिनेता के 10 सर्वोत्तम किरदार
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दाग (1952)
इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर का किरदार निभाया है जो अपनी विधवा मां के साथ गरीबी में जीवन जी रहा है। खिलौने बेचकर वह अपना जीवन यापन करता। उसे शराब पीने की लत पड़ जाती है। वह पार्वती (निम्मी ) को अपना दिल दे बैठता है। अपनी मां से बहस करने के बाद वह अपना जीवन बदलने का फैसला करता है।हालांकि उसके अतीत के दुश्मन उसके भविष्य को लगातार प्रभावित करते हैं। इस फिल्म का निर्देशन अमिय चक्रवर्ती ने किया है। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार ने अपने करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का किरदार जीता था।
देवदास (1955)
1955 मे बनी यह फिल्म शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर आधारीत है। फिल्म में दिलीप कुमार ने देवदास का किरदार निभाया था जो एक आकर्षक युवक होता है जो शराब के शिकंजे में फंस जाता है। फिल्म को बहुत अधिक सफलता मिली थी। देवदास हिंदी फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक है। दिलीप कुमार के साथ ही साथ पारो और चंद्रमुखी का किरदार निभाने वाली सुचित्रा सेन और वैजयंती माला के अभिनय को भी समीक्षकों द्वारा सराहा गया। इस फिल्म के जरिए दिलीप कुमार को सिनेमा जगत में एक सशक्त अभिनेता के तौर पर पहचान मिली।
आजाद (1955)
एस० एम० श्रीरामुलु नायडू निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने एक अमीर व्यक्ति और कुख्यात डाकू आजाद का किरदार निभाया है। फिल्म में शोभा (मीनाकुमारी) अगवा कर ली जाती हैं। उनके करीबी उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उनका पता नहीं चलता है। फिर कुछ समय बाद जब शोभा वापस आती है और बताती है कि उसे आजाद ने बचाया और उसका काफी ख्याल रखा। वह आजाद से शादी करना चाहती है। हालांकि शोभा का परिवार इसके खिलाफ होता है।
नया दौर (1957)
आजादी के बाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी, गानें और एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आई थी। बी. आर चोपड़ा निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर नामक एक तांगेवाले की भूमिका अदा की है जो बस की वजह से तांगेवालों की जीविका खत्म होने के खिलाफ लड़ता है। फिल्म में वैजयंती माला, अजीत और जीवन भी मुख्य किरदार में हैं।