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भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय: दूसरे एपिसोड में जानें सिनेमा की शुरुआत

Thu, 28 Nov 2019 11:49 AM IST
Avinash Pal अमित कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमित कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Avinash Pal Updated Thu, 28 Nov 2019 11:49 AM IST
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Episode Two About National Museum Of Indian Cinema in Mumbai Maharashtra
भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय में क्या- क्या है, इसके बारे में काफी हद तक जानकारी आपको इस स्पेशल रिपोर्ट के पहले एपिसोड में दी गई थी। अब इस स्पेशल सीरीज को आगे बढ़ाते हुए बात करते हैं सिनेमा के शुरुआत की। इस पैकेज में आपको न सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट सहित मूक फिल्मों से सिनेमा की शुरुआत के बारे में बताएंगे बल्कि साथ ही साथ  100 सालों के भारतीय इतिहास का भी जिक्र करेंगे।

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Episode Two About National Museum Of Indian Cinema in Mumbai Maharashtra
भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वर्ष 1913 में दादासाहब फाल्के ने भारतीय सिनेमा की पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चचंद्र का निर्माण किया था। इस फिल्म के साथ ही भारत में मूक सिनेमा का दौर शुरू हो गया। पुराने फिल्मकारों की तस्वीरों के माध्यम से संग्रहालय में बड़ी खूबसूरती से मूक चलचित्र युग के प्रवर्तकों का ब्यौरा दिया गया है। राजा हरिश्चंद्र के बाद से सम्पूर्ण भारत में सिनेमा का विस्तार होता गया। संग्रहालय में सिनेमा जगत के शुरुआती नायक और नायिकाओं का भी वर्णन मिलता है। इसके साथ ही प्रारंभिक भारतीय फिल्मों को औपनिवेशिक प्रतिक्रिया और अंतराष्ट्रीय सहयोग को भी बड़ी खूबी से दिखाया गया है।  
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Episode Two About National Museum Of Indian Cinema in Mumbai Maharashtra
भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मूक सिनेमा के बाद भारत में आवाज वाली फिल्मों का आगमन हुआ। संग्रहालय में हमें आगे देखने को मिलता है कि किस तरह रिकॉर्डर के सहारे विश्व सिनेमा में ध्वनि प्रस्तुत करने का प्रारंभिक प्रयास किया गया। जिसके बाद धीरे-धीरे भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक परिवर्तन नजर आने लगे भारत की पहली आवाज वाली फिल्म आलम आरा थी जिसका पूरे देश पर प्रभाव पड़ा। धीरे- धीरे पूरे देश में टॉकीज का प्रसार होता गया और देश भर में अनेक भाषाओं में टॉकीज की शुरुआत हुई वहीं दूसरी तरफ भारतीय सिनेमा में पार्श्वगीत का भी उदय हो गया।  
Episode Two About National Museum Of Indian Cinema in Mumbai Maharashtra
भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गुलशन महल में एक खूबसूरत गलियारा भी है जिसमें 100 सालों के भारतीय इतिहास दिखाया गया है। इस गलियारे में 100 सालों में जो भी प्रमुख फिल्में दिखी उन सब का वर्णन देखने को मिलता है। इनमें नए जमाने से लेकर गुजरे जमाने की खास फिल्में शुमार हैं। आज के सिनेमा में हमें जो सुपरस्टार्स का स्टारडम दिखाई देता है उसकी शुरुआत गुजरे जमाने से ही हुई थी। 
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भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
संग्रहालय में यह भी पता चलता है कि कैसे साहित्य का सिनेमा पर प्रभाव  देखा गया है। कैसे -कैसे भारतीय सिनेमा में स्टेम्पस बदलते गए। कैसे सिनेमा सह जीवन और राष्ट्रीय भावना का उत्कर्ष होता गया। कैसे सिनेमा में करीब आधा दर्जन बार देवदास को फिल्माया गया। कैसे सिनेमा से जुड़ी मैगजीन का उदय हुआ और कैसे स्टूडियो प्रणाली का उत्थान हुआ। इतिहास की ऐसी सारी यादों का जखीरा भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय में आपका इंतजार कर रहा है। 
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