कोरोना संक्रमण से जूझ रहे शहर मुंबई में अगले छह महीनों तक फिल्म या टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। फिल्मों की शूटिंग से जुड़ी सारी कामगार यूनियनों की फेडरेशन को इस बारे में सरकार की तरफ से गाइडलाइंस तय किए जाने का इंतजार है। वहीं, फिल्म निर्देशकों की संस्था का मानना है कि पहली जरूरत मुंबई में कोरोना से जंग जीतने की है, सिनेमा उसके बाद की प्राथमिकता है।
EXCLUSIVE: मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में और गहराएगा संकट, सर्दियों से पहले शूटिंग शुरू होने के आसार नहीं
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शनिवार सुबह से मुंबई में ये सूचना आग की तरह फैली है कि स्वीडेन और डेनमार्क जैसे देशों ने अपने यहां की सरकारी की तरफ से बनाई गई सरकारी गाइडलाइंस के हिसाब से शूटिंग शुरू कर दी है। हॉलीवुड के फिल्म निर्देशकों की संस्था डायरेक्टर्स गिल्ड ने भी इस दिशा में काम शुरू किया है। कोई 12 दिन पहले गिल्ड ने मशहूर निर्देशक स्टीवन सोडरबर्ग की अध्यक्षता में एक समिति बनाई, जिसका काम है लॉक डाउन खत्म होने के बाद की स्थिति का अध्ययन करना और ये तय करना कि शूटिंग कब से शुरू की जा सकती है। गौरतलब है कि इस कोरोना काल में स्टीवन निर्देशित फिल्म कंटेजियन दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
मुंबई में फिलहाल ऐसा कोई अध्ययन नहीं चल रहा है जिससे देश की सबसे तेजी से तरक्की करती रहे मनोरंजन उद्योग का काम फिर से शुरू करने की कोई योजना बन सके। इंडस्ट्री की सारी यूनियनों की संरक्षक फेडेरशन ऑफ वेस्टर्न इंडियन सिने एम्प्लाइज का मानना है कि इसके लिए केंद्र सरकार को दिशा निर्देश बनाने चाहिए। हालांकि, फेडरेशन के महासचिव अशोक दुबे कहते हैं, “कानून बनाने से भी ज्यादा कुछ मुंबई में होने वाला नहीं है क्योंकि कामगारों के हितों की रक्षा को बने 1981 के कानून को ही अभी तक यहां लागू नहीं कराया जा सका है। शूटिंग के दौरान काम करने वालों को शौचालय तक की सुविधा ढंग से नहीं मिलती तो सैनेटाइजर, दास्ताने, मास्क और पीपीई किट जैसा कुछ उन्हें मिल सकेगा, ये कहना मुश्किल है।”
इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित का अनुमान है कि मुंबई में शूटिंग सितंबर-अक्टूबर से पहले शुरू हो पाना मुश्किल है और वह भी तब जब हालात और गंभीर नहीं होते। वह कहते हैं, “अभी शहर की पहली प्राथमिकता कोरोना को हराना है। बाकी सब इसके बाद होगा।” यह पूछे जाने पर कि क्या अभी फिल्म इंडस्ट्री की तरफ से कोई पहल कोरोना काल के बाद के समय में होने वाली शूटिंग के लिए गाइडलाइंस बनाने की हुई है, वह कहते हैं, “इस बारे में जो भी फैसला होगा वह सारे लोग मिलकर लेंगे।” फेडरेशन के महासचिव दुबे बताते हैं कि फिल्म निर्माताओं की तरफ से इस बारे में सोच विचार के लिए फेडरेशन को पत्र मिला है।
दुबे का कहना ये भी है कि कोरोना काल के बाद कम लोगों के साथ शूटिंग करने का प्रस्ताव ठीक नहीं है। अगर किसी सीरियल या फिल्म की शूटिंग पर सौ लोग काम करते हैं तो वही शूटिंग 50 लोगों के साथ पूरी करने से आगे चलकर ये परंपरा भी बन सकती है और इंडस्ट्री के लाखों लोग बेराजगार हो सकते हैं। उनका कहना है कि इस बारे में केंद्र सरकार को पहल कर फिल्म इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श करना चाहिए। लेकिन, जिस सरकार ने लॉक डाउन का एक महीना बीत जाने के बाद भी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों की सुधि नहीं ली, उससे ज्यादा उम्मीद वह नहीं कहते।