{"_id":"5d9844278ebc3e01557e75e7","slug":"exclusive-interview-manoj-bajpayee-the-family-man","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"EXCLUSIVE: खास मुलाकात में बोले मनोज बाजपेयी-कपड़ों से किरदार नहीं बनता, आत्मा डालनी पड़ती है","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
EXCLUSIVE: खास मुलाकात में बोले मनोज बाजपेयी-कपड़ों से किरदार नहीं बनता, आत्मा डालनी पड़ती है
Sat, 05 Oct 2019 02:13 PM IST
अपूर्वा राय
मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Sat, 05 Oct 2019 02:13 PM IST
विज्ञापन
The Family Man
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनोज बाजपेयी की गिनती हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में होती है, जिनके निभाए किरदार लोगों को उनके नाम के साथ याद रह जाते हैं। दिक्कत बस ये है कि जब तक उन्हें अभिनय की चुनौती न मिले, वह आरामतलबी में रह जाते हैं। अरसे बाद मनोज बाजपेयी ने एक शानदार किरदार किया है, प्राइम वीडियो की सीरीज द फैमिली मैन में। मनोज से एक एक्सक्लूसिव मुलाकात।
द फैमिली मैन
- फोटो : सोशल मीडिया
द फैमिली मैन में आपने खुफिया एजेंट होते हुए मुंबई में बसे एक आम इंसान का चोला पहना है। आपके हिसाब से कितना मुश्किल होता है एक आम इंसान के लिए काम और परिवार के बीच संतुलन बिठाना?
श्रीकांत तिवारी का यह किरदार रहता है मुंबई में, काम करता है मुंबई में लेकिन है ये बनारस का और शादी की है इसने एक दक्षिण भारतीय लड़की से। दोनों बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं। तीन तरीके की संस्कृति है इसके घर में। तीनों का एक साथ समझौता चलता रहता है, साथ ही साथ सांस्कृतिक द्वंद्व भी चलता रहता है। काम और परिवार के बीच में एक संतुलन बनाए रखना एक अलग तरह का संघर्ष है। और इसके साथ ही सिर्फ भारत के लोग ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों का संघर्ष है।
श्रीकांत तिवारी का यह किरदार रहता है मुंबई में, काम करता है मुंबई में लेकिन है ये बनारस का और शादी की है इसने एक दक्षिण भारतीय लड़की से। दोनों बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं। तीन तरीके की संस्कृति है इसके घर में। तीनों का एक साथ समझौता चलता रहता है, साथ ही साथ सांस्कृतिक द्वंद्व भी चलता रहता है। काम और परिवार के बीच में एक संतुलन बनाए रखना एक अलग तरह का संघर्ष है। और इसके साथ ही सिर्फ भारत के लोग ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों का संघर्ष है।
द फैमिली मैन
- फोटो : सोशल मीडिया
कितना कठिन होता है मनोज बाजपेयी के लिए एक नए किरदार में ढल जाना ?
यही सबसे जरूरी है। अगर आपकी तैयारी बहुत अच्छी हुई हो और आपने उस किरदार की ज़िंदगी को शूटिंग पर आने से पहले काफी बार जी लिया है। उसका चरित्र आपके रोम रोम में समाया हुआ है, स्क्रिप्ट आपके जहन में पूरी तरीके से बस चुकी है। तब मेरे लिहाज से वो चीजें पहुंच पाती हैं वहां तक। अगर वो वहां तक पहुंच नहीं रही, फिर लगता है कहीं ना कहीं दिक्कत है आपकी तकनीक में। अपने अभिनय से आगे जाकर कुछ करना है तो इतनी मशक्कत तो करनी ही पड़ेगी।
यही सबसे जरूरी है। अगर आपकी तैयारी बहुत अच्छी हुई हो और आपने उस किरदार की ज़िंदगी को शूटिंग पर आने से पहले काफी बार जी लिया है। उसका चरित्र आपके रोम रोम में समाया हुआ है, स्क्रिप्ट आपके जहन में पूरी तरीके से बस चुकी है। तब मेरे लिहाज से वो चीजें पहुंच पाती हैं वहां तक। अगर वो वहां तक पहुंच नहीं रही, फिर लगता है कहीं ना कहीं दिक्कत है आपकी तकनीक में। अपने अभिनय से आगे जाकर कुछ करना है तो इतनी मशक्कत तो करनी ही पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Manoj Bajpayee
- फोटो : सोशल मीडिया
आपके हिसाब से अभिनय क्या है ?
अभिनय किसी चरित्र की लाइनें बोलना नहीं है। एक किरदार में रक्त ही नहीं अपनी पूरी की पूरी आत्मा डालना, ये होता है असली अभिनय। इस कपड़ा बदलने वाले और सिर्फ संवाद बोलने वाले अभिनय से मुझे बहुत परहेज है। कपड़े के अंदर की आत्मा दर्शकों को अगर नहीं दिखाई दे रही तो फिर वह अभिनय नहीं है।
आपकी गली गुलियां, भोसले या अलीगढ़ जैसी फिल्मों को जब अच्छी रिलीज़ नहीं मिल पाती है तो कितना दर्द महसूस करते हैं?
मैं हर बार अफसोस करता हूं जैसे हर बार आप प्रेम में पड़ते हैं और हर बार आपका दिल टूटता है। उसी समान है। लेकिन वैसा असर आपके दिमाग पर नहीं हो पाता और आप प्रेम करना नहीं छोड़ते हैं। आप हमेशा प्रेम में रहते हैं। मेरा प्रेम है इस तरह की फिल्मों के साथ, इस तरह की कहानियों के साथ। मुझे लगता है कि इस तरह की कहानियां आती रहनी चाहिए हैं। नहीं आएंगी तो चीज़ें बदलेंगी नहीं। इसी प्रेम और जुनून के कारण आज चीज़ें यहां तक आई हैं।
अभिनय किसी चरित्र की लाइनें बोलना नहीं है। एक किरदार में रक्त ही नहीं अपनी पूरी की पूरी आत्मा डालना, ये होता है असली अभिनय। इस कपड़ा बदलने वाले और सिर्फ संवाद बोलने वाले अभिनय से मुझे बहुत परहेज है। कपड़े के अंदर की आत्मा दर्शकों को अगर नहीं दिखाई दे रही तो फिर वह अभिनय नहीं है।
आपकी गली गुलियां, भोसले या अलीगढ़ जैसी फिल्मों को जब अच्छी रिलीज़ नहीं मिल पाती है तो कितना दर्द महसूस करते हैं?
मैं हर बार अफसोस करता हूं जैसे हर बार आप प्रेम में पड़ते हैं और हर बार आपका दिल टूटता है। उसी समान है। लेकिन वैसा असर आपके दिमाग पर नहीं हो पाता और आप प्रेम करना नहीं छोड़ते हैं। आप हमेशा प्रेम में रहते हैं। मेरा प्रेम है इस तरह की फिल्मों के साथ, इस तरह की कहानियों के साथ। मुझे लगता है कि इस तरह की कहानियां आती रहनी चाहिए हैं। नहीं आएंगी तो चीज़ें बदलेंगी नहीं। इसी प्रेम और जुनून के कारण आज चीज़ें यहां तक आई हैं।
विज्ञापन
Manoj Bajpayee
मुझे लगता है यह अगला पड़ाव फैमिली मैन ही है आपका। जिन दर्शकों तक आपका सिनेमा नहीं पहुंच पा रहा था, वह अब आपको सीधे मोबाइल पर देख पा रहा है। क्या कहेंगे तकनीक के इस परिवर्तन के बारे में?
इसीलिए मैं चाहता हूं जो वेब है वो इस तरह की स्वतंत्र फिल्मों को लेने में और अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने में और रुचि दिखाए। जब गली गुलियां जैसी फिल्मों को ओटीटी भी नहीं खरीदता है तो मैं आश्चर्यचकित होता हूं। भोसले को अभी फिल्म समारोह में दिखाया जा रहा है। उसे हम जल्द ओटीटी पर रिलीज करेंगे। मुझे बहुत गर्व है इस फिल्म पर।
सत्यमेव जयते का दूसरा पार्ट बन रहा है। उसमें दिखेंगे आप?
इसके लिए निर्देशक मिलाप झवेरी ने काफी पहले बात की थी मुझसे। लेकिन उसके बाद कुछ महीनो से तो नहीं हुई है, उसकी खबर पढ़ी है मैंने। मेरे सम्पर्क में नहीं हैं अभी। मुझे उस पर संदेह है। क्योंकि उस पूरे समाचार में मेरा नाम नहीं है तो हो सकता है मैं नहीं हूं। नई कहानी होगी इस बार शायद।
इसीलिए मैं चाहता हूं जो वेब है वो इस तरह की स्वतंत्र फिल्मों को लेने में और अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने में और रुचि दिखाए। जब गली गुलियां जैसी फिल्मों को ओटीटी भी नहीं खरीदता है तो मैं आश्चर्यचकित होता हूं। भोसले को अभी फिल्म समारोह में दिखाया जा रहा है। उसे हम जल्द ओटीटी पर रिलीज करेंगे। मुझे बहुत गर्व है इस फिल्म पर।
सत्यमेव जयते का दूसरा पार्ट बन रहा है। उसमें दिखेंगे आप?
इसके लिए निर्देशक मिलाप झवेरी ने काफी पहले बात की थी मुझसे। लेकिन उसके बाद कुछ महीनो से तो नहीं हुई है, उसकी खबर पढ़ी है मैंने। मेरे सम्पर्क में नहीं हैं अभी। मुझे उस पर संदेह है। क्योंकि उस पूरे समाचार में मेरा नाम नहीं है तो हो सकता है मैं नहीं हूं। नई कहानी होगी इस बार शायद।