Interview: मैंने तानों को जीवन का तराना बना लिया- अमित गुप्ता
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लेकिन, आप तो इंडियन आइडल छोड़कर चले गए थे?
हां, इंडियन आइडल में जब मेरा सेलेक्शन हुआ और मैं आखिर के टॉप 30 तक जा पहुंचा तो घर वालों का दबाव बनने लगा। रिश्तेदारों के ताने घरवालों को सुनने को मिलते कि अगर इसे यही सब करना था तो फिर इंजीनियरिंग में एडमिशन क्यों दिलाया? मैं उन दिनों इंजीनियिंरग कर रहा था। बहुत सोचा, विचारा फिर लगा कि पहले घर वालों का सपना पूरा कर देता हूं फिर अपना सपने की सोचूंगा तो इंजीनियरिंग पूरी करने के लिए ही मुझे वापस जाना पड़ा।
और, अब राधे राधे की इतनी बड़ी कामयाबी। अवध के ठेठ पारंपरिक परिवार के लड़के का सफर कैसा रहा अब तक?
मेरा मानना है कि पढ़ाई-लिखाई के अलावा भी करियर बहुत हैं। हर युवा को करियर वही चुनना चाहिए जो उसकी पसंद का हो और हमारे अभिभावकों को भी ये समझना जरूरी है कि हर लड़का डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए ही पैदा नहीं हुआ। घरवालों से अब तो बहुत तारीफ और समर्थन मिलता है लेकिन मेरी शुरूआत आसान नहीं रही। खूब ताने सुनने को मिले कि गुप्ताजी का लड़का जागरण में गाता है, शादी बारात में बैंड के साथ गाता है। घरवालों को शायद कोफ्त भी होती होगी, लेकिन ये सब भी करियर है, इसे समझने में रिश्तेदारों को बहुत समय लगा।
गाने तो आपके वजह तुम हो और जुगनी भी हिट हुए, फिर राधे राधे ने कैसे आपको एकदम से सिंगिंग सुपरस्टार बना दिया?
मुझे लगता है कि फिल्म देखने वाले दर्शकों और फिल्मी गाने सुनने वाले श्रोताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। मैं बोलियों पर, जमीन से जुड़ी चीजों पर अपने साथ काम करने वाले लोगों से सीखता रहता हूं। राधे राधे के गीतकार कुमार मेरे भाई की तरह हैं। उनके जैसा विविध लेखन करने वाला गीतकार आनंद बक्शी के बाद शायद ही कोई दूसरा हुआ हो। वह अपने में मगन रहते हैं और लोगों की परवाह नहीं करते। मैंने भी अपने जीवन का यही फलसफा बना लिया है। तानों को मैंने अपना तराना बना लिया है। मुझे खुशी है कि मेरा समर्पण और मेरी मेहनत रंग ला रही है।