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मैंने शास्त्रीजी की मौत पर पड़ा पर्दा हटा दिया है: विवेक अग्निहोत्री

Thu, 04 Apr 2019 06:55 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Thu, 04 Apr 2019 06:55 AM IST
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exclusive interview of tashkent files director Vivek Agnihotri
Vivek Agnihotri - फोटो : instagram

चॉकलेट, हेट स्टोरी और जिद जैसी फिल्मों के चलते निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की छवि हिंदी सिनेमा में हीरोइनों के अंग प्रदर्शन के अतिरेक वाली फिल्में बनाने की रही है। बुद्धा इन ए ट्रैफिक जैम से विवेक ने अपनी धारा बदली और अब द ताशकंद फाइल्स के जरिए वह एक नए तरह का सिनेमा पेश करने जा रहे हैं। विवेक से अमर उजाला संवाददाता अक्षित त्यागी की एक खास मुलाकात।

exclusive interview of tashkent files director Vivek Agnihotri
Vivek Agnihotri - फोटो : social media
हिंदी सिनेमा में भी एजेंडा सिनेमा की दस्तक हो चुकी है, द ताशकंद फाइल्स का एजेंडा क्या है?
मेरा यही एजेंडा है कि हमारे प्रधानमंत्री एक युद्ध जीतने के बाद विदेश जाते हैं और वहां जाकर उनकी मृत्यु हो जाती है। इस बात को 53 साल हो गए। आज 53 साल बाद भी इस विषय पर किसी को जानकारी नहीं है। बस इसी बात को मैं सबके सामने लाना चाहता हूं।
exclusive interview of tashkent files director Vivek Agnihotri
Tashkent Files - फोटो : social media
फिर भी इस फिल्म का बनाने का कोई तो ट्रिगर प्वाइंट रहा होगा?
आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए और लाल बहादुर शास्त्री जी को लेकर सवाल कीजिए। सभी कहते हैं कि उनकी मौत के पीछे बहुत बड़ा राज़ है। लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर कुछ साल पहले मैंने ट्वीट किया तो लोगों ने मुझसे सवाल किया कि आप फिल्म क्यों नहीं बनाते शास्त्रीजी पर। तो मेरी शुरूआत वहीं से हुई। सूचना के अधिकार के तहत मैंने जानकारियां मांगी लेकिन किसी के पास कोई सूचना ही नहीं है। अगर हमारे पास सच जानने का ही अधिकार नहीं है तो किस लोकतंत्र की बात करते हैं हम। इसके बाद मैंने जनता के बीच मौजूद तथ्य जुटाए और जो बातें पता चलीं उन्हें इस फिल्म में देख सभी को हैरानी होगी।
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Tashkent Files - फोटो : instagram
तो जिस एजेंडा को लेकर आप चले थे, उसमें कितने कामयाब रहे?
मैं जज नहीं हूं और न ही कोर्ट हूं। मैंने बस जिन बातों पर अब तक पर्दा पड़ा था, उन्हें सामने लाने की कोशिश की हैं, मैंने पर्दा पूरी तरह ही हटा दिया है। अब इसे देखकर किसी नतीजे तक पहुंचना जनता का काम है।
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Vivek Agnihotri
इन दिनों हिंदी सिनेमा का प्रधानमंत्री काल चल रहा है, एक साथ इतने सारे कहानीकारों में एक साथ प्रधानमंत्रियों की कहानी को लेकर जागे आकर्षण की क्या वजह हो सकती है?
जब राजनीतिक सवाल उठते हैं तो सबसे ऊंचे ओहदे पर बैठने वाले व्यक्तियों पर ही उठने चाहिएं। इन दिनों जमीन से जुड़ी कहानियां खूब बन रहीं हैं। दंगल, दम लगाकर हइशा, बधाई हो जैसी कहानियां लोग पसंद कर रहे हैं। ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान जैसी फिल्में फ्लॉप हो रही हैं। दर्शकों की मानसिकता बदल चुकी है। 
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