फराह खान (Farah Khan) ने का साल 2004 में आई फिल्म 'मैं हूं ना' को लेकर दिया गया बयान बहुत चर्चा में है। लोग इसे अपने नजरिये से देख रहे हैं। फराह ने कहा है- वह नहीं चाहती थीं कि फिल्म का विलन कोई मुस्लिम हो। उन्होंने जानबूझकर फिल्म में सुनील शेट्टी के सबसे खास साथी (राइट हैंड) का सरनेम खान रखा था जो कि मुसलमान है वह फिल्म में मेजर राम प्रसाद शर्मा को जानकारी देकर खलनायक से नायक बनता दिखता है।
फिल्म में मुस्लिम आतंकवादी न बनाने वाले बयान पर ट्रोल हुईं फराह खान, यूजर्स बोले- 'ये है असली चेहरा'
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फराह अपने इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। लोग उन्हें जिहादी सोच वाला इंसान भी बता रहे हैं। बहस एक बार फिर हिंदू और मुस्लिम आतंकवादी पर छिड़ गई है। एक यूजर ने फराह के बयान को लेकर कहा है- ''इसी से भारत में धर्मनिरपेक्षता बची है और इसलिए संविधान बचा है! फराह खान ने साबित कर दिया कि धर्मनिरपेक्षता को बढ़ाने के लिए आतंकवादियों को फिल्मों में हिंदू होना चाहिए।''

एक यूजर ने लिखा- ''फराह खान ने जानबूझकर 'मैं हूं ना' में मुस्लिम नाम नहीं दिया क्योंकि इससे उनके समुदाय की छवि खराब हो सकती थी। और यहां हमारे पास ऐसे हिंदू उदारवादी हैं जो चाहते हैं कि लोग सीएए का विरोध करने के लिए इस्लाम में परिवर्तित हो जाएं।''

शाहरुख खान की फिल्म 'मैं हू ना' पर फराह खान बोलीं- मैं नहीं चाहती थी इसका विलेन मुसलमान हो