पूरी सृष्टि में पिता का स्थान कोई नहीं ले सकता है। बच्चों का सामाजिक अस्तित्व पिता पर ही टिका होता है। बचपन में पिता की बातें भले ही कड़वी लगे, लेकिन उन बातों का अहसास तब होता है जब हम बड़े होते हैं। पिता मित्र भी हैं और गुरु भी हैं जो भटके हुए अपने बच्चों को सही राह दिखाते हैं। अपने जीवन के अनुभवों को साझा करके अपने बच्चों को जीवन में सही राह पर चलने की सीख देते हैं। आज फादर्स डे के अवसर पर हिंदी सिनेमा 10 मशहूर सितारे बता रहे हैं अपने जीवन पर पड़े अपने अपने पिता के प्रभाव के बारे में...
Fathers Day 2023: पिता से मिली सीख ने इन सितारों को बनाया सुपरस्टार, फादर्स डे पर सुनाए संस्कारों के पहले पाठ
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पिता बहुत ही आगे की सोच रखते थे: करण जौहर
निर्माता-निर्देशक करण जौहर के पिता यश जौहर बहुत ही खुले विचारो के थे। उन्होंने हमेशा बड़े सितारों के साथ ही फिल्में बनाईं। करण जौहर कहते हैं, 'मेरे पिता ने मुझे कभी भी इस बात का अहसास नहीं दिलाया कि मैं किसी और से अलग था। जब मैंने आठ साल की उम्र में जयाप्रदा की फिल्म 'सरगम' देखी, तो यह फिल्म मुझे बहुत पसंद आई थी। पिताजी कहने पर मैंने जयाप्रदा जैसा डांस किया था, मेरा डांस देखकर वह बहुत खुश थे।'
पिताजी के फिल्में देखने के शौक से मिला मेरा नाम: मनोज बाजपेयी
अभिनेता मनोज बाजपेयी के पिता राधाकांत बाजपेयी को सिनेमा देखने का बहुत शौक था। मनोज बाजपेयी कहते हैं, 'मेरे पिता बहुत ही बहुत ही सहज और सरल व्यक्तित्व के थे। मां के हाथ से कभी -कभार पिटाई भी हो जाती थी, लेकिन पिता जी ने कभी भी मुझ पर हाथ नहीं उठाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था। वह मनोज कुमार की फिल्में बहुत पसंद करते थे। मनोज कुमार की एक्टिंग उनको इतनी पसंद थी कि उन्होंने उनके नाम पर ही मेरा नाम मनोज रख दिया। पिता जी अब नहीं रहे, लेकिन उनके साथ बिताए एक -एक पल मुझे हमेशा याद रहते हैं।'
डैडी की वजह से आध्यात्म की तरफ झुकाव हुआ: रणबीर कपूर
अभिनेता ऋषि कपूर भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी कला के जरिए वह सदियों तक याद किए जाते रहेंगे। रणबीर कपूर कहते हैं, 'डैडी बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे, सुबह और शाम दोनों वक्त पूजा करते थे। यहां तक कि कार से सफर के दौरान भी रास्ते में छोटा या बड़ा मंदिर देखते थे तो जय कहते थे। उनकी इन बातों का असर मुझपर भी बहुत पड़ा है। इस तरह के संस्कार बच्चों को अपने पिता से ही मिलते हैं। जब आप अपने पिता से मिले संस्कार को अपने जीवन में उतारते हैं, तो अंदर से बहुत खुशी मिलती है। डैडी की उस आदत को मैंने अपने जीवन में आत्मसात कर लिया। मुझे बहुत ही आत्मिक संतोष मिलता है।'
पिताजी से सीखा अनुशासन में रहना: आयुष्मान खुराना
अभिनेता आयुष्मान खुराना के पिता पी खुराना ज्योतिष विद्या में ज्यादा रुचि रखते थे। आयुष्मान खुराना कहते हैं, 'मेरे पिता जी को संगीत, कविता, फिल्म और कला से बहुत ही लगाव था। उन्होंने भले ही कानून की पढाई की, लेकिन वह ज्योतिष में ज्यादा रूचि रखते थे। वही एकमात्र कारण है कि मेरे नाम में दो बार एन और आर आता है। पिताजी पूरा जीवन अनुशासन में ही रहे। समय के वह बहुत पाबंद थे, बचपन में उनकी पाबंदिया तोड़ने में बहुत मजा आता था। लेकिन अब समझ में आता है कि वह पाबंदियां कितनी जरूरी थी। अब बड़े होकर खुद पर लगाई पाबंदियां तोड़ी नहीं जाती। अगर मैं खुद को अनुशासन में रख पाता हूं तो वह पिता जी ही देन है।'