बीता एक साल मुंबई के फिल्म पत्रकारों पर बहुत भारी बीता है। इसलिए नहीं कि कोरोना काल में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा बल्कि इसलिए कि जितने नामचीन और गुमनाम लोगों ने इस उद्योग मे दुनिया को अलविदा कहा, शायद ही किसी दूसरे क्षेत्र में ऐसा हुआ होगा। वजह भी इसकी यही है कि सिनेमा वाले सबको गले लगाने के लिए जाने जाते हैं। यहां किसी तरह का भेद नहीं है। सितारे भी सबके अपने हो जाते हैं। कोई गुजरता है तो यूं लगता है कि कोई अपना ही चला गया। बीते साल इरफान के जाने के अगले ही दिन जब ‘चिंटूजी’ के जाने की खबर आई तो दिल धक से रह गया था। दिल से काफी करीबी रिश्ता रहा ताउम्र ‘चिंटूजी’ का। पुराने, नए सारे पत्रकार ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) को इसी नाम से बुलाते रहे।
Rishi Kapoor: संदेशों का आखिर तक जवाब देते रहे चिंटूजी, हिंदी पत्रकारों से इस बात के लिए मांगी माफी
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भोला सा राजू और उसके सवाल
अपनी टीचर को बहते पानी के किनारे कपड़े उतारते देख मतवाला हो जाने वाला फिल्म ‘मेरा नाम जोकर का बुद्धू सा लेकिन चित्ताकर्षक राजू इस फिल्म के सिर्फ तीन साल बाद ही राजा बनकर जमाने से कहता मिला, ‘मैं शायर तो नहीं, मगर ऐ हसीं, जबसे देखा मैंने तुझको, मुझको शायरी आ गई…’। इसके चेहरे पर अब तक मोहब्बत में गिरफ्तार होने का डर बाकी था। लेकिन, साल 1980 में जब इसने शालीनता उतारकर किनारे रखी और दुनिया से चिल्लाकर पूछा, ‘तुमने कभी किसी से प्यार किया?’ तो जमाने को पता चला कि आखिर प्यार करना किसे कहते हैं? रंगा और बिल्ला वाले जमाने में ऋषि कपूर ने दुनिया को मोहब्बत करना सिखाया। ये सिखाया कि कैसे बिना हीरोइन को परेशान किए आंखों ही आंखों में इजहार, इसरार और इकरार किया जा सकता है। और, ये भी सिखाया कि कैसे महिला सशक्तिकरण की बातें शुरू होने से दशकों पहले सिनेमा में महिला किरदारों को दमदार बनाने में उनके जैसा हीरो आगे आता रहा।
सबके प्यारे चिंटूजी
अपने हीरो को एक जगह खड़े खड़े, किसी स्टूल पर बैठे या फिर ड्राइविंग सीट पर स्टीयरिंग थामे थामे पूरा गाना फिल्मा देने का खतरा इससे पहले निर्देशकों ने या तो देव आनंद के साथ उठाया था या फिर राजेश खन्ना के साथ। रूमानियत का ये नया राजकुमार था, ऋषि कपूर। एक ऐसा सितारा जिसे फिल्म इंडस्ट्री में शायद ही किसी ने इस नाम से बुलाया हो, वह सबके प्यारे चिंटू या चिंटू जी ही रहे। ‘बॉबी’ में वह खड़े खड़े मोहब्बत के सबक सुना देते हैं, ‘सागर’ में स्टूल पर बैठे बैठे अपनी माशूक से सारे सवाल पूछ लेते हैं और ‘दामिनी’ में स्टीरयिंग पकड़े पकड़े मीनाक्षी शेषाद्रि से रोमांस कर डालते हैं।
हीरोइनों की हॉफ सेंचुरी
ऋषि कपूर को रोमांस का राजकुमार इसलिए भी कहा गया कि उन्होंने डिंपल कपाड़िया से शुरू करके नीतू सिंह, मौसमी चटर्जी, शोमा आनंद, संगीता बिजलानी, विनीता गोयल, राधिका, अश्विनी भर्वे हेमा मालिनी, श्रीदेवी, जया प्रदा और दिव्याभारती तक करीब 50 हीरोइनों के साथ परदे पर रोमांटिक गाने गाए हैं। इसमें तीन पीढ़ियों की वे अभिनेत्रियां भी शामिल हैं जो अपने अपने समय में हिंदी सिनेमा की नंबर वन हीरोइन कहलाईं। ऋषि कपूर की फिल्मों के शौकीनों के लिए एक खास बात जो हमेशा नोट करने लायक रही, वह था उनका किसी वाद्य यंत्र के साथ शूटिंग करना। ‘कर्ज’ में जब वह बार बार अतीत याद दिलाने वाली गिटार की ट्यून बजाते हैं तो उनकी अंगुलियां गिटार के तारों पर बिल्कुल किसी साजिंदे जैसी ही चलती हैं, या फिर ‘सरगम’ का वो गाना, ‘ढपली वाले ढपली बजा…’। इस गाने के शुरू होने से पहले जया प्रदा कन्हैया की प्रतिमा से एक माला निकालकर ऋषि कपूर के गले में डालती हैं। ऋषि कपूर की सिनेमा में बरसों की मेहनत को जानने, समझने और समझाने का सारा काम निर्देशक के विश्वनाथ ने बस 30 सेकंड में कर दिखाया। ‘बॉबी’ से लेकर ‘दीवाना’ तक वो हिंदी सिनेमा के कन्हैया ही बने रहे।
‘अग्निपथ’ का रऊफलाला
और, जब कंस बनने की चुनौती सामने आई तो ऋषि कपूर ने वो भी करके दिखाया। अपने पिता यश जौहर की अमिताभ बच्चन के साथ बनाई फिल्म ‘अग्निपथ’ का करण जौहर ने जब रीमेक किया तो उसमें एक नए किरदार का प्रवेश हुआ, रऊफ लाला। आंखों में सुरमा, पठानी सूट और हाथ में लंबा रूमाल, कोई सोच भी नहीं सकता था कि शाहरुख खान जैसे सितारों को बाहें फैलाकर और शरीर को एक तरफ झुकाकर संवाद बोलने वाली अदाएं सिखाने वाला कलाकार ऋषि कपूर, लोगों के मन में अपने लिए नफरत भी जगा सकता है। क्योंकि, ऋषि कपूर को तो लोगों ने ‘एक चादर मैली सी’ में भी प्यार किया और ‘जहरीला इंसान’ में भी।