आज की तारीख में बॉलीवुड जो कुछ भी है उसे इस स्तर तक पहुंचाने का क्रेडिट चेतन आनंद को जाता है। चेतन आनंद प्रसिद्ध अभिनेता देव आनंद के बड़े भाई थे। कहा जाता है कि चेतन आनंद की बदौलत ही देव आनंद फिल्मों में आ सके थे। चेतन आनंद फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक थे। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को जो कुछ भी दिया है वह भुलाया नहीं जा सकेगा। 1949 में उन्होंने अपने भाई देव आनंद के साथ 'नवकेतन फिल्म्स' की स्थापना भी की थी। आज चेतन आनंद की पुण्यतिथि है, इस खास मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं-
Chetan Anand Death Anniversary: वो लाजवाब डायरेक्टर जो कभी नहीं भुलाया जाएगा, जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से
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ऐसे की थी करियर की शुरुआत
चेतन आनंद ने 1940 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने पहली स्क्रिप्ट अशोका की लिखी थी, जिसे वह मुंबई में डायरेक्टर फानी मजूमदार को दिखाने गए। तब डायरेक्टर फानी मजूमदार ने उन्हें अपनी फिल्म राजकुमार के लिए लीड रोल में कास्ट कर लिया। ये फिल्म 1944 में रिलीज हुई। इसके बाद उन्होंने सोच लिया कि वह फिल्मों में डायरेक्शन करेंगे। फिर उन्होंने नीचा फिल्म नाचा नगर का निर्देशन किया। ये फिल्म हिट हुई और 1946 में इस फिल्म ने कान फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार भी जीता। इसके बाद 1949 में चेतन ने अपने भाई देव आनंद के साथ मिलकर 1949 में नवकेतन फिल्म्स की स्थापना की।
ये हिट फिल्में दी थीं
नवकेतन फिल्म्स की स्थापना के बाद उन्होंने टैक्सी ड्राइवर, हकीकत, हीर रांझा, कुदरत, आखिरी खत, हिंदुस्तान की कसम, आंधियां, अफसर, हाथों की लकीरें, काला बाजार, अमन, अर्पंण, परमवीर चक्र जैसी शानदार फिल्में दी हैं। चेतन की ज्यादातर फिल्मों में प्रिया राजवंश का खास रोल होता था। प्रिया और चेतन एक दूसरे से प्यार करते थे। प्रिया सुख-दुख में हमेशा उनके साथ रहती थीं। दोनों जिंदगी भर साथ रहे, लेकिन कभी शादी नहीं की।
ऐसे बढ़ीं थीं प्रिया से नजदीकियां
1967 में एक फिल्म आई 'द लॉन्ग डुअल', इसे रणवीर सिंह ने लिखा था। रणवीर चाहते थे कि इस फिल्म में प्रिया लीड रोल में रहें। हालांकि तब किसी वजह से ये फिल्म होल्ड हो गई। कुछ दिनों बाद रणवीर ने चेतन से बात की और उनसे कहा कि उनकी फिल्म के लिए एक नया चेहरा मिल गया है। चेतन ने उसकी फोटो भेजने के लिए कहा। तब चेतन ने जैसे ही प्रिया की तस्वीर देखी तो वह देखते ही रह गए। एक और बात और ये शायद बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि प्रिया राजवंश ने ही उन्हें चेतन आनंद नाम दिया था। इससे पहले उनका नाम वीर सुंदर सिंह था।
प्रिया की हुई थी हत्या
प्रिया ने अपने करियर में ज्यादातर फिल्में चेतन के साथ कीं। इस दौरान चेतन और प्रिया एक-दूसरे के काफी नजदीक आ गए थे। चेतन पहले से शादीशुदा थे और दो बेटे भी थे। लेकिन प्रिया के लिए उन्होंने अपनी पत्नी उमा को छोड़ दिया और इनके साथ रहने लगे। फिर 82 साल की उम्र में चेतन आनंद साल 1997 में दुनिया से रुखसत हो लिए। चेतन की मौत के बाद प्रिया अकेली पड़ गईं। 27 मार्च 2000 को चेतन आनंद ने बेटे केतन और विवेक आनंद ने नौकरों के साथ मिलकर प्रिया की हत्या कर दी। हत्या के जुर्म में उन दोनों को उम्रकैद की सजा भी हुई। हालांकि मौत की असल वजह सामने नहीं आ पाई, लेकिन प्रिया का अंत दुखद हुआ था।