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Death Anniversary: गोपालदास नीरज के कंठ और हाथों में बसता था महाकाव्य, तीन बार जीता था फिल्मफेयर अवॉर्ड

Wed, 19 Jul 2023 08:24 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: रुपाली रामा जायसवाल Updated Wed, 19 Jul 2023 08:24 AM IST
सार

बेहतरीन गीत लेखक गोपालदास नीरज की आज पुण्यतिथि है। आइए इस दिन पर दिग्गज से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं।
 

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Gopaldas Neeraj Death Anniversary Know untold story about his career family and best songs
गोपालदास नीरज - फोटो : अमर उजाला

बॉलीवुड को कई सदाबहार गाने देने वाले दिग्गज लिरिक्स राइटर गोपालदास नीरज आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके शानदार काम ने उन्हें अमर कर दिया है। 19 जुलाई वर्ष 2018 को इस नगीने ने आखिरी सांस लेकर हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि, गोपालदास ने अपनी बेहतरीन लेखनी से काव्यमंच, साहित्य जगत और फिल्म जगत में अलग ख्याति हासिल की। आइए उनके पुण्यतिथि विशेष में उनसे जुड़े कुछ अनकहे पहलुओं और उन्हें मिले सम्मान पर गौर फरमा लेते हैं-

Gopaldas Neeraj Death Anniversary Know untold story about his career family and best songs
गोपालदास नीरज - फोटो : सोशल मीडिया

गोपालदास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। महज छह वर्ष की आयु में नीरज ने पिता ब्रजकिशोर सक्सेना को खो दिया। गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद नीरज ने 1953 में हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री हासिल की। वहीं, आर्थिक परेशानियों के कारण उन्होंने 12वीं कक्षा से ही काम करना शुरू कर दिया था। नीरज ने मेरठ कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता के पद पर अध्यापन कार्य शुरू किया, लेकिन कॉलेज प्रशासन के जरिए आरोप लगाए जाने के कारण उन्होंने स्वंय ही नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वे अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक नियुक्त हुए और मैरिस रोड जनकपुरी अलीगढ़ में बस गए। नीरज वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर जेल भी गए थे। 

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गोपालदास नीरज - फोटो : सोशल मीडिया

गोपालदास नीरज ने अपने काव्य का जादू इस कदर चलाया कि हर कवि सम्मेलन में उनकी उपस्थिति अनिवार्य हो गई। इतना ही नहीं कवि सम्मेलनों की लोकप्रियता ने नीरज को मायानगरी मुंबई की ओर आकर्षित किया। नीरज ने हिंदी फिल्म जगत को अति उत्तम रचनाएं दीं। हालांकि, अंत में उनका मन कहीं नहीं लगा, और वह वापस अलीगढ़ आ गए। रिपोर्ट के अनुसार, नीरज ने हिंदी सिनेमा को 10 वर्ष का समय दिया। 

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गोपालदास नीरज - फोटो : सोशल मीडिया

10 वर्ष में गोपालदास नीरज ने इंडस्ट्री को कई सदाबहार गाने दिए, जिनमें ‘फूलों के रंग से, दिल की कलम से’ (प्रेम पुजारी 1970), ‘ए भाई, जरा देखके चलो, आगे ही नहीं पीछे’ (मेरा नाम जोकर 1972), ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ (पहचान 1971), ‘ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली’ (शर्मीली 1971), 'रंगीला रे तेरे रंग में’ (प्रेम पुजारी 1970), ‘काल का पहिया घूमे भैया’ (अज्ञात 1970) ‘लिखे जो खत तुझे’ (कन्यादान 1968) शामिल है। 

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गोपालदास नीरज - फोटो : सोशल मीडिया

गोपालदास नीरज फक्कड़ इंसान थे, उन्हें महंगी चीजों का शौक नहीं था। हालांकि, उनकी लेखनी और खूबसूरत जुबां का ही जादू रहा कि उन्होंने सितंबर 2004 से नवंबर 2004 तक अमेरिका के लगभग 20 शहरों में कवि सम्मेलन किया। नीरज की कलाकारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1968 में शशि कपूर और आशा पारेख स्टारर फिल्म ‘कन्यादान’ के हिट गाने ‘लिखे जो खत तुझे , जो तेरी याद में…’ को महज छह मिनट में लिख डाला था। बतौर टाइपिस्ट करियर की शुरुआत करने वाले नीरज आगे चलकर लिरिक्स राइटर बने थे। गोपालदास नीरज को बेस्ट लिरिक्स राइटर के लिए तीन बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। नीरज ने हिंदी सिनेमा को तकरीबन 200 बेहतरीन गीत दिए थे। 

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