हिंदी फिल्मों में 'बैडमैन' नाम से मशहूर अभिनेता गुलशन ग्रोवर सिर्फ फिल्मों में ही बदनाम हैं। वैसे उनके अच्छे इंसान होने के कई किस्से प्रचलित हैं। वह अपने बेटे संजय ग्रोवर से जितना प्यार करते हैं, उतना ही प्यार गुलशन को अपनी बहनों से मिला है। गुलशन काम भले ही हिंदी सिनेमा में करते हैं लेकिन उन्होंने अपनी जान पहचान और दोस्ती हॉलीवुड तक फैला रखी है। इस 21 सितंबर को गुलशन 65 साल के ही गए हैं और उनकी फिल्में आना अब भी जारी हैं। हाल ही में उन्हें महेश भट्ट की फिल्म 'सड़क 2' में देखा गया है और आने वाले समय में वह 'मुंबई सागा' और रोहित शेट्टी की फिल्म 'सूर्यवंशी' में नजर आएंगे। आज हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से सुनाते हैं।
10 अनसुनी कहानियां: गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस करने के लिए तालियां बजाने वाले साथ लेकर जाते थे 'बैडमैन'
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पेट्रोल का बूंद बूंद हिसाब
गुलशन ग्रोवर से जुड़ा यह किस्सा बहुत अनोखा है। अपने संघर्ष के दिनों में गुलशन ने एक गाड़ी खरीदी और उसमें नपा तुला पेट्रोल डलवाते थे। वह हर चीज का पूरा हिसाब लगाते थे कि वह एक दिन में कितनी पेट्रोल खर्च करेंगे और इससे कहां-कहां घूम लेंगे? एक दिन गुलशन के एक करीबी दोस्त अपनी प्रेमिका को घुमाने के लिए गुलशन से वह गाड़ी चाहते थे। लेकिन, गुलशन ने अपने दोस्त को गाड़ी नहीं दी। उनके दोस्त शशि रंजन ने खुद बताया कि उस दिन गुलशन ने उन्हें गाड़ी नहीं दी, उसका कारण यह था कि गुलशन को अगली ही सुबह एक मीटिंग में जाना था। और आदत अनुसार गुलशन ने अपनी गाड़ी में पेट्रोल उतना ही डलवाया था जितना वह मीटिंग तक जा सकते थे। अगर वह अपने दोस्त को गाड़ी दे देते तो सुबह होने वाली उनकी मीटिंग रद्द हो जाती।
भाई सेर, बहनें सवा सेर
गुलशन का परिवार बहुत बड़ा था। उनकी पांच बहनें हैं और एक बड़े भाई। जब गुलशन छोटे थे तब वह अपनी बहनों की पढ़ाई पर बहुत ध्यान देते थे। वह चाहते थे कि हर वक्त उनकी बहनें पढ़ाई करें और उस पर ध्यान दें। लेकिन, उनकी बहनों ने भी गुलशन से बचने का एक उपाय खोज रखा था। वह अपनी छोटी बहनों को पढ़ाने के लिए एक कमरे में बैठाते थे और टीवी देखने से रोकते थे। जब गुलशन कमरे से बाहर निकलते तो उनमें से एक बहन दरवाजे पर खड़े रहकर पहरा देती और बाकी सभी कमरे में टीवी देखतीं। जैसे ही गुलशन वापस कमरे में आते तो वह तुरंत टीवी बंद करके किताब खोल कर बैठ जाती थीं। हालांकि गुलशन अक्सर अपनी परेशानियां लेकर अपनी बहनों के पास ही जाया करते थे। यहां से पता चलता है कि गुलशन अपनी बहनों से बहुत प्यार करते हैं और उनके लाडले भी रहे।
ताली बजवाने वाले साथ में
गुलशन अपने कॉलेज के दिनों से ही अभिनय करने लगे थे। वह उस समय रंगमंच के बड़े कलाकार थे। उन्हें कॉलेज में होने वाले हर नाटक में भाग लेना पसंद था और वह हर नाटक को प्रमुखता से करते थे। उनका उत्साह तक दोगुना होता जब कोई भी नाटक किसी लड़कियों के कॉलेज में होने जाता। वहीं पास ही आई पी कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा कविता चौधरी को गुलशन बहुत पसंद करते थे। जब भी यह इस कॉलेज में उनका नाटक होता तो वह अपने करीबी दोस्तों को अपने साथ जरूर ले जाते। उसका कारण यह था कि मंच पर गुलशन अभिनय चाहे जैसा भी करें लेकिन उनके करीबी दोस्त मौजूद होंगे तो वह तारीफ में तालियां बजाएंगे ही। इस तरह गुलशन लड़कियों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करते थे। पत्रकारिता की दुनिया में आजकल बड़ा नाम रखने वाले रजत शर्मा गुलशन के ही सहपाठी हैं।
अपने गुरु से ही मिली पहली तनख्वाह
गुलशन ग्रोवर को अभिनय सिखाने का काम रोशन तनेजा ने किया। वह गुलशन के गुरु हैं और गुलशन इनके प्रिय शिष्य भी। जब थिएटर के दिनों में रंगमंच पर गुलशन ने बेहतरीन अदाकारी का नमूना पेश किया तब खुद रोशन तनेजा ने गुलशन को शुभकामनाओं के तौर पर उनकी पहली कमाई थमाई। अभिनय के मामले में गुलशन इतने अच्छे थे कि रोशन ने गुलशन को अपना सहायक नियुक्त कर लिया। आगे चलकर गुलशन रोशन के साथ ही उसी जगह पर दूसरे विद्यार्थियों को भी अभिनय सिखाने लगे। अनिल कपूर, मजहर खान, सुरेंद्र पाल मदन जैन जैसे बड़े नाम भी रोशन तनेजा के ही विद्यार्थी हैं और गुलशन के साथ ही इन्होंने भी अभिनय सीखा है।