हामिद अली खान के नाम से हैदराबाद में जन्में दिग्गज अभिनेता को दुनिया अजीत के नाम से जानती है। लगभग चार दशक लंबे इनके फिल्मी करियर में इनके प्रशंसक अजीत के बोलने के अंदाज के कायल रहे। अजीत को याद तो एक नायक के रूप में किया जाता है लेकिन उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक नायक बनने से की थी। ये बात अलग है कि उनका नाम नायक के रूप में चल नहीं सका तो वह खलनायक बन गए। अजीत ने अपने फिल्मी करियर में बहुत ही बेहतरीन फिल्मों में काम किया है, उनके जन्मदिन पर इनमें से 10 दमदार किरदारों के बारे में आपको बताते हैं।
Ajit Khan: जिसे सारा शहर ‘लॉयन’ के नाम से जानता था, उसे इस हीरो ने बनाया बॉलीवुड का खतरनाक विलेन
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बेकसूर (1950)
अजीत जब अपनी किताबें बेचकर हैदराबाद से मुंबई अभिनेता बनने के लिए चले आए तो उन्हें यहां बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें एक अभिनेता तो बनना ही था इसलिए वह एक मुख्य काम की तलाश में न रहते हुए जूनियर आर्टिस्ट ही बन गए। शुरुआती दौर में उन्होंने 'कुरुक्षेत्र', 'पतंगा', 'जीवनसाथी' जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में अजीत को हामिद अली खान के नाम से जाना गया। जब 1950 में आई फिल्म 'बेकसूर' में अजीत ने मशहूर फिल्मकार के. अमरनाथ के साथ काम किया तो अमरनाथ ने ही अजीत का नाम हामिद से बदलकर अजीत रख दिया। इस फिल्म में अजीत मधुबाला के साथ नजर आए और यह फिल्म साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म से मधुबाला तो चमक ही गई थीं, साथ ही अजीत भी इस फिल्म के साथ एक हीरो के रूप में लोगों की नजरों में आ गए।
नास्तिक (1954)
अजीत खान लगातार नायक बनकर फिल्मों में काम करते रहे और वर्ष 1954 में वह एक नायक की भूमिका निभाते हुए नजर आए क्राइम ड्रामा फिल्म 'नास्तिक' में। इस फिल्म का निर्देशन आई एस जौहर ने किया। इस फिल्म की कहानी देश के विभाजन के वक्त पर आधारित है। कहानी एक आदमी की है जो विभाजन के वक्त हुए दंगों में अपने माता पिता के मर जाने के बाद भगवान पर विश्वास करना बंद कर देता है। उसके भाई बहन भी रिफ्यूजी बनकर अपना दम तोड़ देते हैं। जब सब लोग उनकी सहायता करने से इंकार कर देते हैं तो वह आदमी बदला लेने की ठानता है। इस फिल्म का एक गीत मशहूर रहा जो आज भी बहुत लोकप्रिय है। उस गीत के बोल हैं, 'देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान'। यह गीत अजीत पर ही फिल्माया गया।
बारादरी (1955)
अजीत को के. अमरनाथ के साथ एक बार फिर से काम करने का मौका मिला जब उन्होंने वर्ष 1955 में आई म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'बारादरी' में उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का मौका दिया। इस फिल्म में अजीत के साथ अभिनेत्री गीता बाली मुख्य भूमिका में हैं। इसके अलावा प्राण, चंद्रशेखर, मुराद, मुमताज बेगम आदि कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए। यह कहानी एक विधवा की है जिसके पति का सिर राजा ने ही कटवा दिया। वह औरत अपने बेटे और राजा के बेटे को एक साथ बड़ा करती है। बड़े होकर दोनों लड़के एक ही लड़की से प्यार करने लगते हैं।
नया दौर (1957)
मुख्य अभिनेता के तौर पर अजीत का करियर बहुत ज्यादा दूर तक न जा सका। उनके पास अपनी जीविका को चलाने का कोई साधन भी नहीं था इसलिए उन्होंने फिल्मों में सह अभिनेता बन कर आना शुरू कर दिया। बी आर चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म 'नया दौर' में अजीत दिखे दिलीप कुमार, वैजयंती माला और जीवन के साथ एक अहम भूमिका में। यह एक ड्रामा फिल्म है जिसमें मुकाबला इंसान का मशीन से मुकाबला होता है। इसी फिल्म से प्रेरित होकर आशुतोष गोवारिकर ने अभिनेता आमिर खान को लेकर वर्ष 2001 में फिल्म 'लगान' बनाई। इस फिल्म का गीत, 'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का' आज भी बहुत मशहूर है।