हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने इस चकाचौंध भरी दुनिया में कदम रखने के साथ ही अपना नाम बदला है और उसी नए नाम से आज तक फैंस उन्हें जानते हैं। बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार मनोज कुमार भी उनसे से एक हैं, जिन्होंने सिनेमा से प्रभावित होकर अपना नाम बदल लिया था लेकिन फैंस उन्हें प्यार से 'भारत कुमार' कहते हैं। अभिनेता मनोज कुमार 24 जुलाई को हर साल अपना जन्मदिन मनाते हैं। 85 साल के मनोज कुमार का असली नाम शायद ही आप जानते होंगे। मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को कई हिट फिल्में दी हैं। उन्होंने देशभक्ति से लबरेज कई शानदार फिल्मों में भी अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों को जीता है। आज मनोज कुमार का जन्मदिन है। इस खास मौके पर हम आपको उनके जीवन के कुछ अनसुने किस्से बताने जा रहे हैं, जिसमें इमरजेंसी की एक घटना भी शामिल है।
Manoj Kumar: पाकिस्तान... एक्टिंग... इंदिरा और इमरजेंसी... पढ़ें मनोज कुमार के किस्से, जिनसे बने 'भारत कुमार'
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हरिकिशन से ऐसे बने मनोज कुमार
24 जुलाई 1937 को हरिकिशन गिरि गोस्वामी (मनोज कुमार) का जन्म ऐबटाबाद में हुआ, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बना। मनोज कुमार के माता-पिता ने उन दिनों भारत को चुना और दिल्ली आ गए। मनोज कुमार ने बंटवारे के दर्द को अपनी आंखों से देखा है। बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का काफी शौक रहा। वह अशोक कुमार, दिलीप कुमार और कामिनी कौशल के बहुत बड़े फैन थे। उनकी हर फिल्म देखना वह काफी पसंद करते थे और उनकी फिल्मों से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपना नाम हरिकिशन से बदलकर मनोज कुमार कर लिया था। वह हर जगह अपना नाम मनोज कुमार ही बताते थे, जिससे धीरे-धीरे सब उन्हें मनोज कुमार के नाम से ही जानने लगे।
सिनेमा में ऐसे हुई एंट्री
मनोज कुमार अपने कॉलेज के दिनों में काफी हैंडसम हुआ करते थे और इसी वजह से वह कॉलेज में थिएटर से जुड़ गए थे और फिर उन्होंने एक दिन दिल्ली से मुंबई का रास्ता चुन लिया। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 1957 में आई फिल्म 'फैशन' से की थी। इसके बाद 1960 में उनकी फिल्म 'कांच की गुड़िया' रिलीज हुई। इस फिल्म में वह बतौर लीड अभिनेता नजर आए थे, जो सफल रही। मनोज कुमार ने 'उपकार', 'पत्थर के सनम', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'संन्यासी' और 'क्रांति' जैसी कमाल की फिल्में दीं। अधिकतर फिल्मों में मनोज कुमार का नाम 'भारत कुमार' हुआ करता था और इसी वजह से वह अपने चाहने वालों के बीच 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर हो गए।
लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई थी फिल्म
मनोज कुमार के कलाकारों के साथ-साथ राजनेताओं से भी अच्छे संबंध थे। साल 1965 में भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ था और इस युद्ध के बाद ही मनोज कुमार ने लाल बहादुर शास्त्री से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने अभिनेता से युद्ध से होने वाली परेशानियों पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा। हालांकि, उन दिनों तक अभिनेता को फिल्म बनाने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद अभिनेता ने 'जय जवान जय किसान' से संबंधित 'उपकार' फिल्म बनाई, जिसे दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। हालांकि, इस फिल्म को खुद लाल बहादुर शास्त्री नहीं देख पाए थे। ताशकंद से लौटने के बाद लाल बहादुर शास्त्री इस फिल्म को देखने वाले थे। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।
इमरजेंसी में झेलीं परेशानियां
मनोज कुमार के लिए इमरजेंसी का दौर काफी मुश्किलों भरा था। इंदिरा गांधी के साथ उनके संबंध अच्छे जरूर थे। लेकिन अभिनेता ने इमरजेंसी का विरोध करके सरकार को नाराज कर दिया था। जिसका नतीजा ये हुआ कि मनोज कुमार जब अपनी सुपरहिट फिल्म 'शोर' फिर से सिनेमाघरों में रिलीज करने जा रहे थे। उससे पहले ही यह फिल्म दूरदर्शन पर आ गई थी। इसके अलावा, फिल्म 'दस नंबरी' को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बैन कर दिया था।