सचिन बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री का जाना माना नाम हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई सचिन की सहज कलाकारी का फैन है। 17 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाने वाले सचिन आज 64 साल की उम्र पार कर चुके हैं। सचिन की पहली हिंदी फिल्म साल 1965 में आई थी, जिसका नाम था डाकघर। ये फिल्म रविंद्रनाथ टैगोर के नाटक पर आधारित थी। हालांकि इससे पहले सचिन मराठी फिल्म हा माझा मार्ग एकला 1962 में आ चुकी थी। सचिन की पूरी जिंदगी कैमरे के सामने बीत गई ऐसा कहना गलत नहीं होगा क्योंकि जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म की थी, तो उनकी उम्र चार साल थी।
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चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले सचिन ने सबसे पहले एक्टिंग का गुर 1961 में फिल्म सूनबाई से सीखा। इस फिल्म के निर्देशक माधवराव शिंदे थे लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद सचिन ने राजा परांजपे की मराठी फिल्म हा माझा मार्ग एकला को चुना था। एक्टिंग को लेकर सचिन से डेडिकेशन का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि महज 4 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मराठी फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत लिया था। ये पुरस्कार उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने दिया था।
सचिन की पहली हिंदी फिल्म की बात करें तो वो थी डाकघर, जिसमें उन्होंने जहां अमल का किरदार निभाया था। हिंदी फिल्मों में शुरुआत करने के बाद फिर सचिन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1967 में आई अपनी दूसरी फिल्म मझली दीदी में सचिन ने दिग्गज कलाकार धर्मेंद्र और मीना कुमार के साथ स्क्रीन साझा की। इस फिल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। इसके बाद वो कई बड़ी फिल्मों में एक्टिंग करते दिखाई दिए उनमें ज्वैल थीफ, चंदा और बिजली, ब्रह्मचारी और मेला जैसे नाम रहे हैं। उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करीब 15 फिल्मों में काम किया था।
सचिन ने अपनी जिंदगी का पहला लीड रोल बतौर हीरो फिल्म गीत गाता चल में किया। ये राजश्री प्रोडक्शन के तहत बनने वाली फिल्म थी। इस फिल्म में उनकी हीरोइन सारिका थीं। इस फिल्म की अप्रत्याशित सफलता से उन्हें कई और लीड रोल फिल्में मिलीं। ये दोनों कलाकार फिर साल 1976 में बालिका वधु, कॉलेज गर्ल और नदिया के पार जैसी फिल्मों में साथ नजर आए।
सचिन ने लीड रोल के अलावा कई फिल्मों में अच्छे सपोर्टिंग रोल भी निभाए हैं। उन्होंने त्रिशूल, शोले, अवतार, सुर संगम और सत्ते पर सत्ता जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया लेकिन इसके बाद उन्होंने निर्देशन की ओर अपना रुख किया। उन्होंने मराठी फिल्मों के साथ साथ कई टीवी सीरियलों का निर्देशन किया। मराठी के अलावा उन्होंने हिंदी फिल्मों का निर्देशन किया जैसे 1992 में आई फिल्म प्रेम दीवाने औरप ऐसी भी क्या जल्दी है।फिल्मों के अलावा हिंदी टीवी सीरियल जैसे तू-तू, मैं-मैं का निर्देशन उन्होंने किया, जो जबरदस्त हिट साबित हुआ। इस फिल्म में उनकी पत्नी सुप्रिया और मशहूर अदाकारा रीमा लागू भी थीं। उन्होंने दारा सिंह को लेकर भी एक सीरियल बनाया जिसका नाम था हद कर दी।