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खाली जेब में 'हसरत' लेकर आए थे ये गीतकार, बस में टिकट काटकर चलाते थे खर्च

Tue, 19 May 2020 09:34 AM IST
प्रतीक्षा राणावत प्रतीक्षा सिंह राणावत
प्रतीक्षा सिंह राणावत Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Tue, 19 May 2020 09:34 AM IST
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Hasrat Jaipuri Aka Iqbal Hussain hindi cinemas iconic lyricist and poet Early Life and Struggle
इतिहास का पर्दा- हसरत जयपुरी - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

आवाज देके हमें तुम बुलाओ


मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ।


कला किसी भी परिचय की मोहताज नहीं होती। निधन तो कलाकार का होता है, कला तो हमेशा जिंदा रहती है। कला भले ही किसी को विरासत में मिली हो लेकिन उस कला को उसी तरह सजा संवारकर रखना कोई आम बात नहीं होती। कई कलाकार ऐसे भी होते हैं जो इस विरासत को ना केवल सजा संवारकर रखते हैं बल्कि उसे मेहनत मशक्कत कर और खूबसूरत बनाते हैं। इन्हीं कुछ कलाकारों में से एक थे मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी।

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हसरत जयपुरी

हिंदी फिल्मों के शीर्ष गीतकार हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। बचपन से ही शायराना मिजाज वाले हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल 1922 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। हसरत के पिता फौज में थे उनका नाम नाजिम हुसैन था और हसरत की मां का नाम था फिरदौसी बेगम। हसरत को शेरो- शायरी का शौक भी मां से ही विरासत में मिला था, हालांकि इनकी मां शायर नहीं थीं, लेकिन हसरत जयपुरी के नाना अपने जमाने के जाने-माने शायर हुआ करते थे।

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हसरत जयपुरी - फोटो : Social Media

फिदा हुसैन फिदा हसरत जयपुरी यानी इकबाल हुसैन के नाना थे। हालांकि उनकी मां फिरदौसी बेगम को उनका शायरी करना जरा भी पसंद नहीं था। लेकिन इकबाल भी कहां मानने वाले थे। उन्होंने मां की बात नहीं सुनी और बस फिर क्या था मां ने हुक्म सुनाया कि तुम्हें अगर शायरी ही करना है तो मेरे घर से बाहर निकल जाओ। मां के इसी फरमान ने बेटे को इकबाल हुसैन से हसरत जयपुरी बना दिया। 1940 में अपनी जेब में 'हसरत' लिए इकबाल हुसैन पहुंच गए मायानगरी और यहां से शुरू हुआ उनके जीवन का सफर...

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हसरत जयपुरी - फोटो : Social Media

तुमने पुकारा और हम चले आए, जान हथेली पर ले आए रे... मुंबई आने के बाद हसरत के जीवन के असली सफर की शुरुआत हुई। मुंबई पहुंचे हसरत के हाथ में ना पैसे थे और ना ही कोई उनकी जान पहचान का व्यक्ति था। कभी उन्हें फुटपाथ पर सोना पड़ा तो कभी बिना खाना खाए ही सो गए। इसी बीच उन्हें अहसास हुआ कि जिंदगी की गाड़ी चलाने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा। तब उन्हें काफी ढूंढने के बाद बस कंडक्टर की नौकरी मिली। लेकिन उनका दिल तो अटका था शेरों- शायरी की तरफ। हसरत जयपुरी शायर होने के साथ ही थोड़े आशिक मिजाज भी थे। बस में वो कभी भी किसी खूबसूरत लड़की का टिकट नहीं काटते थे।

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हसरत जयपुरी - फोटो : Social Media

बदन पे सितारे लपेटे हुए ओ जान-ए-तमन्ना किधर जा रही हो... उनके गाने बता दिया करते थे कि वो कितने हुस्नपरस्त हैं। इस तरह के गाने उनके इस आशिक मिजाज को अच्छी तरह से बयां करते हैं। कंडक्टरी करते करते अपने शौक को पूरा करने के लिए हसरत मुशायरे में जाने लगे। यहां से बदली हसरत जयपुरी की किस्मत। एक दिन मशायरे के दौरान हसरत जयपुरी के ऊपर पृथ्वीराज कपूर की नजर पड़ी। उन्होंने हसरत को अपने बेटे राजकपूर से मिलवाया। उस दौरान राजकपूर भी अपनी आगामी फिल्म बरसात की तैयारी में लगे हुए थे। इस फिल्म के लिए हसरत ने अपना पहला गीत लिखा, 'जिया बेकरार है छाई बहार है'। ये गीत आज भी लोग गुनगुनाते हैं।

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