हिंदी दिवस को लेकर सभी लोगों को जागरुक करने का जिम्मा हमेशा से बॉलीवुड ने भी उठाया है। बॉलीवुड शुरुआत से ही अपने फिल्मों, उनके संवाद और गानों से लोगों को हिंदी के प्रति जागरुक कर रहे हैं। हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत 1953 से की गई थी। जिसके बाद से आज तक इसे मनाया जाता रहा है। वहीं हिंदी सिनेमा ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है। इस पैकेज में आपको बताते हैं 50 और 60 के दशक की फिल्मों के डायलॉग्स...
#हिंदीहैंहम: 'यह अमीर और गरीब का झगड़ा नहीं है बाबू', पढ़ें 50-60 के दशक के सदाबहार फिल्मी संवाद
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फिल्म: श्री 420 (1954)
डायलॉग: वाह राज क्या ठाठ है। तुम्हारे ये शानदार सूट, मंहगी टाई, क्या चमकदार जूते हैं। वाह! भाई तुमने सच ही कहा था कि एक दिन बम्बई पर राज करोगे। राज असलियत में - मेरा दम घुट रहा है।
फिल्म: मिस्टर एंड मिसेज 55
डायलॉग: तुम्हारी बातों से लगता है कि तुम कम्युनिस्ट हो।
गुरुदत्त - जी नहीं मैं कम्यूनिस्ट नहीं...कार्टूनिस्ट हूं मुझसे क्या डरना।
फिल्म: गंगा जमुना (1961)
डायलॉग: देवरजी अपनी भौजाई के लिए कंगन तो नहीं लाए पर भैया के लिए हथकड़ी लेकर आए हो।
फिल्म: आवारा (1951)
डायलॉग: जज साहब, मैं जन्म से अपराधी नहीं हूं। मेरी मां चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर वकील बनूं, जज बनूं परंतु हमारी बस्ती से एक गंदा नाला गुजरता है जिसमें अपराध के कीड़े बहते हैं। मेरी फिक्र छोड़िए, मुझे सजा दीजिए परंतु इन मासूम बच्चों को बचा लीजिए।