14 सितंबर 1953 में पहली बार देशभर में हिंदी दिवस मनाया गया था। तभी से इस दिन को हर साल देशभर में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिंदी को न केवल देश के हर क्षेत्र में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रसारित करना है। हिंदी के प्रचार प्रसार में मनोरंजन जगत ने भी बढ़ चढ़कर अपना योगदान दिया है। हिंदी का रंग आपको गीतों पर भी देखने को मिलता है। ऐसे में आपको सुनाते हैं 50 के दशक के वो हिंदी गीत जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं।
#हिंदीहैंहम: 'बाबूजी धीरे चलना' से लेकर 'जादूगर सैंया' तक, 50 के दशक के सदाबहार नगमे
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गाना: बाबूजी धीरे चलना
फिल्म: आर पार
1954 में आई फिल्म 'आर पार' गुरु दत्त के निर्देशन में बनी फिल्म थी। फिल्म में मुख्य भूमिका भी उन्होंने ही निभाई थी। इस फिल्म का ये बाबूजी धीरे चलना लोगों की जुबान पर बसा हुआ है। इस गीत को गुरु दत्त की पत्नी गीता दत्त ने ही अपनी आवाज से सजाया था।
गाना: ए दिल मुझे बता दे
फिल्म: भाई भाई
1956 में आई फिल्म 'भाई भाई' में अशोक कुमार, किशोर कुमार, निम्मी, निरुपा रॉय और अभिनेत्री श्यामा थीं। फिल्म का निर्देशन एम वी रमन ने किया था। फिल्म का गाना 'ए दिल मुझे बता दे' गीता दत्त ने गाया था। ये सदाबहार गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।
गाना: सैंया दिल में आना रे
फिल्म: बहार
1951 में आई फिल्म 'बहार' का गाना 'सैंया दिल में आना रे' आज भी कई लोगों की पसंद है। इस गाने के कई रीमिक्स वर्जन भी बन चुके हैं। लेकिन असल गीत की बात फिर किसी गाने में नजर नहीं आई। ये गाना अभिनेत्री वैजयन्ती माला पर फिल्माया गया था। गाने को शमशाद बेगम ने अपनी आवाज दी थी।
गाना: ठंडी हवा काली घटा
फिल्म: मिस्टर एंड मिसेज 55
1955 में आई फिल्म 'मिस्टर एंट मिसेज 55' मधुबाला और गुरुदत्त को लेकर बनाई गई थी। फिल्म का गीत ठंडी हवा काली घटा आज भी खूब पसंद किया जाता है। इस गीत को गुरुदत्त की पत्नी गीता दत्त ने अपनी मधुर आवाज दी थी।