‘शो मस्ट गो ऑन’ ये कहावत मनोरंजन उद्योग में दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रचलित कहावत है। मतलब कि कुछ भी हो जाए, शूटिंग नहीं रुकनी चाहिए। सितारों के घर में शोक होता है तो भी वह पहले से तय शूटिंग कम ही रोकते हैं। कर्मचारियों के लिए तो खैर कभी शूटिंग रुकती ही नहीं। साल के 365 दिन वह काम पर रहते हैं। लेकिन, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कार्यरत कर्मचारियो की छुट्टी का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक जा पहुंचा है। आयोग को इस बारे में मिली शिकायत के बाद इस मसले पर गंभीरता से विचार होने के आसार दिखने लगे हैं।
Holidays in Bollywood: मानवाधिकार आयोग पहुंचा फिल्म इंडस्ट्री में छुट्टी का मामला, जारी किए ये अहम निर्देश
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हिंदी फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले कामगारों, तकनीशियनों व अन्य की संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने बीते महीने से साल में अनिवार्य छुट्टियों की सूची जारी की थी, जिसमें महीने के हर रविवार की छुट्टी के अलावा साल भर में 12 और छुट्टियों का ऐलान किया गया था। इस घोषणा के बारे में ‘अमर उजाला’ ने तहकीकात की तो पता चला कि अभी तक ये छुट्टियां लागू नहीं हुई हैं। यही नहीं, इस दौरान कुछ रोचक जानकारियां भी सामने आईं।
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज की तरफ से तय साल 2023 की छुट्टियों में 26 जनवरी, 18 फरवरी को महाशिवरात्रि, 8 मार्च को होली, 22 अप्रैल को रमजान, 1 मई को मजदूर दिवस, 29 जून को मोहर्रम, 15 अगस्त, गणेश चतुर्थी, दशहरा, दीपावली और क्रिसमस शामिल हैं। 26 जनवरी और 18 फरवरी को शिवरात्रि के दिन जब सिने वर्कर्स को छुट्टी न मिलने की बात ‘अमर उजाला’ को पता चली तो इस बारे में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के अध्यक्ष बी एन तिवारी से इसकी वजह जानने की कोशिश की गई।
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बी एन तिवारी ने बताया कि इस मामले में फेडरनेशन ने सबसे पहले महाराष्ट्र ह्यूमन कमीशन से मांग की थी लेकिन उनके स्तर से सिने कर्मचारियों के लिए कुछ किया नहीं गया। फेडरेशन की मांग थी कि छुट्टी के अलावा शूटिंग पर वर्करों की सुरक्षा का ध्यान दिया जाए और सरकार ने जो आठ घंटे की ड्यूटी लागू की है, उसका पालन फिल्म इंडस्ट्री में भी हो। कर्मचारी अगर आठ घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं तो उसे डबल शिफ्ट माना जाए और उसी हिसाब से भुगतान किया जाए।
राज्य मानवाधिकार आयोग में अपनी सुनवाई न होते देख फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इसकी शिकायत की है। बी एन तिवारी कहते हैं, 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य मानवाधिकार आयोग को 15 दिन में इस बाबत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सिने कामगारों की शिकायतों को लेकर एक त्रिपक्षीय समिति बनाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह समिति तीन महीने में बननी है और इसमें फेडरेशन, राज्य सरकार और निर्माताओँ के प्रतिनिधि शामिल होंगे।’ हालांकि तिवारी के मुताबिक इस बाबत अभी महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कोई कदम नहीं उठाया है और हमने इसकी शिकायत राज्य सरकार से भी की है।
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