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वक्त के हर मोड़ पर अमिताभ बच्चन ने जड़ा सिक्सर, छह दशकों की ये छह फिल्में बताती हैं जिंदगी का सलीका

Fri, 29 May 2020 11:49 PM IST
Mishra Mishra अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Mishra Mishra Updated Fri, 29 May 2020 11:49 PM IST
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how amitabh bachchan kept changing with times from 60s these six films are proof
अमिताभ बच्चन - फोटो : Social Media

हिंदी सिनेमा में वह कलाकार उंगलियों पर गिने जा सकते हैं जिनका करियर पांच दशक तक या उससे ज्यादा चला हो। उन कलाकारों में से एक हैं पिछली सदी के महानायक अमिताभ बच्चन। हिंदी सिनेमा में उन्होंने अपनी शुरूआत तो 60 के दशक के ठीक अंत में कर ली थी लेकिन लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना 70 के दशक में ही शुरू किया। जब उन्होंने खुद को बदला और 'जंजीर' के साथ उतर गए फिल्मी रण में, तब अमिताभ बने हिंदी सिनेमा के 'एंग्री यंग मैन'। आज हम आपको बताते हैं कि बदलते वक्त के साथ कैसे बदलते रहे अमिताभ? और कैसे अब तक कर रहे हैं पीढ़ी दर पीढ़ी नए कलाकारों की बराबरी।

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जंजीर - फोटो : Social Media

जंजीर (1973)
'सात हिंदुस्तानी' के लिए ढेर सारी तारीफें और सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म 'आनंद' में सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने के बाद भी जब अमिताभ बच्चन की फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं तब अमिताभ के काम ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया था। हाल कुछ ऐसा था कि उनके साथ काम करने के लिए कोई हीरोइन भी तैयार नहीं थी। तब प्रकाश मेहरा ने उन्हें ऑफर की फिल्म 'जंजीर'। इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन से रूठकर करवट लेकर लेटी उनकी किस्मत ऐसी जागी कि फिर तो अमिताभ बच्चन के आगे काम की लाइन लग गई। इस फिल्म से अमिताभ ने जान लिया था कि किसी काम में बने रहना है तो वक्त के साथ चलना पड़ेगा।

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शहंशाह - फोटो : Social Media

शहंशाह (1988)
कामयाबी मिलने के बाद अमिताभ की जिंदगी में बहुत कुछ बदल गया था। इसमें तो कोई शक नहीं था कि उन दिनों वह फिल्मों में बहुत काम कर रहे थे। साथ ही वह जया भादुड़ी से शादी करके राजनीति में भी सक्रिय हो गए थे। अमिताभ की यह फिल्म राजनीति में शामिल होने के बाद उनके कमबैक के रूप में भी जानी जाती है। और ऐसा धांसू कमबैक किया कि उन्होंने साबित कर दिया कि वही हैं इस इंडस्ट्री के 'शहंशाह'। टीनू आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अमिताभ ने दोहरा किरदार निभाया। एक था इंस्पेक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव और दूसरा खुद शहंशाह। फिल्म में ये दोनों इंसान तो एक ही होते हैं। इन दो किरदारों से उन्होंने दो पीढ़ियों का मनोरंजन किया।

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हम - फोटो : Social Media

हम (1991)
90 के दशक में एक बार फिर से अमिताभ शहंशाह जैसे दोहरे चरित्र के साथ वापस लौटे। फिल्म में उनके साथ रजनीकांत और गोविंदा नजर आए। गोविंदा अपने करियर की शुरुआत में ही थे जब उन्होंने अमिताभ के साथ यह फिल्म की। गोविंदा का अभिनय करने का एक अलग ही अंदाज था और उस चीज को भी अमिताभ बच्चन ने अपने अंदर समेट लिया था। यही वजह थी कि इस दशक में भी अमिताभ बच्चन का जलवा कायम रहा। हालाकि इस फिल्म के बाद भी अमिताभ और गोविंदा एकसाथ कई फिल्मों में नजर आए जिसमें से सुपरहिट फिल्म 'बड़े मियां छोटे मियां' भी एक है।

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पा - फोटो : Social Media

पा (2009)
जब अमिताभ की उम्र ढलती गई तो धीरे-धीरे उन्होंने अपने आपको भी वक्त में ढालना शुरू किया। लेकिन इस फिल्म के साथ उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जो शायद ही किसी अभिनेता ने कभी इतनी बेहतरी से किया हो। यहां वह अपनी असल जिंदगी के बेटे अभिषेक बच्चन के बेटे के रूप में नजर आए। एक बुजुर्ग होकर भी एक 12 साल के बच्चे का किरदार निभाना सोचने में ही चुनौतीपूर्ण लगता है, तो करने में तो कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। हालांकि अमिताभ बच्चन ने इस किरदार को बहुत शानदार तरीके से निभाया और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला।

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