हमारे सिनेमा में अधिकतर प्रेम कहानियां बनती आई हैं या फिर नायक का महिमामंडन करती फिल्में दर्शकों को देखने को मिलती हैं। लेकिन हिंदी और बाकी भारतीय फिल्मों में समय-समय पर अलग-अलग तरह के प्रयोग भी कहानियों से साथ होते रहते हैं। कभी असल जिंदगी पर आधारित कहानियां सामने आती हैं, कई बार सदियों से प्रचलित लोककथाओं पर आधारित फिल्में भी बनी हैं। पिछले कुछ सालों में तो ऐसी कई फिल्में दर्शकों ने देखी हैं, इन फिल्मों में सबसे ज्यादा चर्चा 'स्त्री' और 'स्त्री-2' को मिली। लेकिन इस फिल्म के बनने से पहले भी कुछ फिल्में ऐसी आईं, जिनमें लोककथाओं को आधार बनाकर एक अनोखी दुनिया से दर्शकों को रूबरू करवाया गया। उन्हें एक अलग तरह के सिनेमा का आनंद लेने का अवसर दिया गया। जानिए, ऐसी ही कुछ लोककथाओं पर आधारित फिल्मों के बारे में।
Local Folklore Films: जब पर्दे पर आईं लोककथाओं से सजी कहानियां, दर्शकों को मिला अनोखा सिनेमा देखने का आंनद
फिल्म 'स्त्री-2' के लेखक निरेन भट्ट ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में कहा कि लोककथाओं पर आधारित फिल्में बनने से दर्शकों को अलग तरह का सिनेमा देखने का अवसर मिला रहा है, लेकिन यह पहली बार नहीं है, पहले भी कई फिल्मों की कहानियां लोककथा से प्रेरित रहीं।
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मुंजया
'मुंजया' फिल्म ने भी इस साल दर्शकों का ध्यान अपनी तरह खींचा, इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की और फिल्म हिट साबित हुई। इस फिल्म की कहानी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में प्रचलित मुंजया की लोककथा से प्रेरित रही। कोंकण की इस लोककथा के अनुसार अगर एक छोटा लड़का जिसका मुंडन किया गया हो और उसकी मृत्यु 10 दिन के भीतर हो जाए तो वह हमेशा के लिए भूत बन जाता है और पीपल के पेड़ पर रहने लगता है। इस कहानी को आधार बनाकर ही फिल्म 'मुंजया' बनी। फिल्म में हॉरर के साथ कॉमेडी का तड़का भी रहा, तो दर्शकों को यह फिल्म खूब पसंद आई। इस फिल्म के निर्देशक आदित्य सरपोतदार हैं, जो कोंकण क्षेत्र से ही संबंध रखते हैं, उन्होंने मुंजया की लोककथा को बचपन में खूब सुना इसलिए यह कहानी कहना उनके लिए काफी आसान रहा। फिल्म में 'मुंजया' जो की एक प्रेत है, उसको सीजीआई की मदद से बनाया गयाए जो कि दर्शकों को डराने में पूरी तरह से कामयाब रहा।
लैला-मजनू
साल 2018 में फिल्म 'लैला-मजनू' रिलीज हुई लेकिन उस समय यह फिल्म नहीं चली। इस साल इस फिल्म को दोबारा रिलीज किया गया और इसने बॉक्स ऑफिस पर मनचाही सफलता हासिल की। दर्शकों ने इस फिल्म की कहानी और गानों को खूब सराहा। फिल्म में लैला की मुख्य भूमिका में तृप्ति डिमरी और मजनू की भूमिका में अविनाश तिवारी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए खूब तारीफें मिलीं। यह फिल्म भी लैला मजनू की एक प्रचलित लोककथा पर आधारित रही। बस इस फिल्म को नए समय के हिसाब से दिखाया गया। निर्देशक साजिद अली ने फिल्म को बहुत शिद्दत से बनाया है।
कांतारा
2022 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म 'कांतारा' को पूरे देश में पसंद किया गया। यह एक एक्शन थ्रिलर फिल्म जरूर रही, लेकिन इस फिल्म में ग्रामीण जीवन, पर्यावरण संरक्षण और लोक देवताओं के प्रभाव को जोड़ते हुए कहानी को बुना गया। फिल्म 'कांतारा' में लोक देवताओं के एक उत्सव भूता कोला को भी बहुत ही सुंदर तरीके से दिखाया गया। जब दर्शकों ने लोक देवताओं के इस रूप को देखा, तो उनके भीतर एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। यही कारण रहा कि फिल्म को कन्नड़ भाषी दर्शकों के अलावा देश भर से खूब तारीफें मिलीं। इस फिल्म का लेखन, निर्देशन और इसमें मुख्य किरदार की जिम्मेदारी ऋषभ शेट्टी ने ही निभाई, वह इन तीनों कामों को बखूबी इसलिए कर पाए क्योंकि वह अपनी संस्कृति और लोककथाओं से गहरा लगाव रखते हैं। जल्द ही इस फिल्म का दूसरा पार्ट भी आएगा।
पहेली
शाहरुख खान का जब नाम आता है, तो सिर्फ उनका रोमांटिक अंदाज ही जेहन में उभरता है, लेकिन फिल्म 'पहेली' (2005) में उन्होंने एक भूत का किरदार किया। यह फिल्म एक पारंपरिक लोककथा पर आधारित रही, इसमें एक भूत को एक व्यापारी की पत्नी से प्रेम हो जाता है तो वह व्यापारी का रूप लेकर उसकी पत्नी के साथ रहने लगता है। व्यापारी और भूत दोनों ही किरदार शाहरुख ने किए, वहीं पत्नी की भूमिका में रानी मुखर्जी रहीं। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन शाहरुख खान और रानी मुखर्जी को बिल्कुल अलग किरदारों में देखना दर्शकों के लिए नया अनुभव रहा। फिल्म को नामी अभिनेता अमोल पालेकर ने निर्देशित किया था।